श्री देवी के अंतिम वाक्य

संसार एक थियेटर घर है
अनेको पात्र इसमें आते है
अपना अपना रोल निभा कर
अपने घरो को चले जाते है

मैं भी इस थियेटर घर में
अपना रोल निभाने आई थी
मेरा रोल अब खत्म हुआ
घर जाने की बारी आई थी

 

डायरेक्टर ऊपर बैठा हुआ है
सबको डायरेक्शन दे रहा
डायरेक्शन के मुताबिक ही
पात्र अपना रोल कर रहा

पात्र उसकी कठपुतलिया बनी
सबकी डोर उसके हाथ में है
किसको कैसे  नचाये वो
सब कुछ उसके हाथ में है

बोनी एक सफल डायरेक्टर है
एक पति का भी रोल निभा रहे
देखो ये उनका डबल रोल है
कितनी बखूबी से उसे निभा रहे

कर देना क्षमा अब मुझको
अगर गलती की कोई मैंने
स्वीकार करना प्रणाम मेरा
ये अंतिम प्रणाम है तुमको

हो सकता है कभी मैंने
दिल दुखाया हो तुम्हारा
मुझको गले लगा लेना तुम
ये अंतिम मिलन हो हमारा

मत कुरोदो मेरे जीवन को
न अब उसका ध्यान करो
जो होना था सो हो गया
मत मेरा अब अपमान करो

आर के रस्तोगी

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