शहर छोड़ कर अब गांव चलेंगे

शहर छोड़ कर,अब गांव चलेंगे,
नौकरी छोड़ अब मालिक बनेंगे।
शुद्ध लाभ लेकर उद्यमी बनेंगे,
अपनी किस्मत अब खुद लिखेगे।

देख लिया है लॉक डाउन में ,
कितने पापड़ हमने बेले है।
पैदल चलकर परिवार के साथ
कितने कष्ट हमने झेले है।।

कोई किसी का कुछ नहीं करता,
केवल कोरी बाते ये करते हैं।
अपना उल्लू सीधा करके ये,
हमको खूब ये लोग ठगते है।।

बने करोड़ पति ये सब उद्यमी,
हमारी खून पसीने की कमाई से।
अब आंखे हमको दिखा रहे हैं,
देखा इनको हमने गहराई से।।

बन लिए बहुत गुलाम इनके,
अब इनके गुलाम नहीं बनेंगे।
शहर छोड़ कर अब गांव चलेंगे,
नौकरी छोड़ अब मालिक बनेंगे।।

आर के रस्तोगी

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