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    Homeसाहित्‍यकविताआओ सब मिलकर नव वर्ष मनाएं

    आओ सब मिलकर नव वर्ष मनाएं

    आओ सब मिलकर नव वर्ष मनाएं
    सुखद हो जीवन हम सबका
    क्लेश पीड़ा दूर हो जाए
    स्वप्न हों साकार सभी के
    हर्ष से भरपूर हो जाएं
    मिलन के सुरों से बजे बांसुरी
    ये धरती हरी भरी हो जाए
    हों प्रेम से रंजीत सभी
    ऐसा कुछ करके दिखलायें
    आओ सब मिलकर नव वर्ष मनाएं ||
    हम उठें व उठावें जगत को
    सृजन का सुर ताल हो
    हम सजग हों
    सुखद हो जीवन हमारा
    उच्च उन्नत भाल हों
    अब न कोई अलगाव हो
    बस जोड़ने की बात हो
    बढ़ न पावे असत हिंसा
    शान्त सुरभित प्राण हों
    सतत प्रयास और लगन से ही
    हम अपना हर कदम बढ़ाएं
    आओ सब मिलकर नव वर्ष मनाएं ||
    मित्र सखा सत्कार करें सब
    जगत तुम्हारा यश गाए
    गुलशन सा महके सबका आंगन
    हर घर मंदिर सा पावन हो जाए
    बह उठे प्रेम की मन्दाकिनि
    मन में मिसरी सी घुलती जाए
    सबके आँगन हों सुखद सगुन
    कोकिल पंचम स्वर में गाए
    भूखा प्यासा रहे न कोई
    घर घर समता दीप जलाएं
    आओ सब मिलकर नव वर्ष मनाएं ||


    प्रभात पाण्डेय

    प्रभात पाण्डेय
    प्रभात पाण्डेय
    विभागाध्यक्ष कम्प्यूटर साइंस व लेखक

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