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    Homeसाहित्‍यकविताजीवन का मोड़

    जीवन का मोड़

    राघवेन्द्र कुमार “राघव”-

    poem

    ये जीवन का कौन सा मोड़ है,

    जहाँ मार्ग में ही ठहराव है।

    दिखते कुछ हैं करते कुछ हैं लोग,

    यहाँ तो हर दिल में ही दुराव है ।

    किस पर ऐतबार करें किसे अपना कहें,

    हर अपने पराए हृदय में जहरीला भाव है ।

    अपना ही अपने से ईर्ष्या रखता है,

    हर जगह अहम् का टकराव है ।

    अरे “राघव” तू यहाँ क्यों आया,

    यहाँ दिखते रंगीन सपने महज़ भटकाव हैं ।।

    राघवेन्द्र कुमार 'राघव'
    राघवेन्द्र कुमार 'राघव'
    शिक्षा - बी. एससी. एल. एल. बी. (कानपुर विश्वविद्यालय) अध्ययनरत परास्नातक प्रसारण पत्रकारिता (माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय जनसंचार एवं पत्रकारिता विश्वविद्यालय) २००९ से २०११ तक मासिक पत्रिका ''थिंकिंग मैटर'' का संपादन विभिन्न पत्र/पत्रिकाओं में २००४ से लेखन सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में २००४ में 'अखिल भारतीय मानवाधिकार संघ' के साथ कार्य, २००६ में ''ह्यूमन वेलफेयर सोसाइटी'' का गठन , अध्यक्ष के रूप में ६ वर्षों से कार्य कर रहा हूँ , पर्यावरण की दृष्टि से ''सई नदी'' पर २०१० से कार्य रहा हूँ, भ्रष्टाचार अन्वेषण उन्मूलन परिषद् के साथ नक़ल , दहेज़ ,नशाखोरी के खिलाफ कई आन्दोलन , कवि के रूप में पहचान |

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