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    Homeसाहित्‍यकवितामहादेवी जी की मन की भावना

    महादेवी जी की मन की भावना

    इच्छाएं मेरी अनेक अनंत थी
    उनका मैंने अब त्याग किया
    इच्छाएं ही दुख की कारण थी
    उनका नहीं मैंने स्मरण किया

    साथी मेरा अब चला गया
    उसका शोक अब क्या करना
    जीवन की बची है पगडंडियां
    उन पर चल जीवन पूरा करना

    भू की न प्यास बुझा पाई
    उसकी भी मै न कुछ दे पाई
    प्रयत्न किए थे बहुत कुछ मैंने
    पर अंत समय तक न दे पाई

    जा रही हूं मैं स्वर्ग लोक को
    शायद वापिस न आ पाऊंगी
    कोई गम न करे अब मेरा
    मै आंसू पीकर रह जाऊंगि

    मै देवी न थी महादेवी थी
    फिर भी मैं कुछ न कर पाई
    हिंदी भाषा को और बढ़ाना था
    उसको और अधिक न बढ़ा पाई
    पुन: जन्म जब लूंगी मैं ,भू को हरा भरा मैं  कर दूंगी बन कर नीर भरी बदली उसकी तृप्ति मैं  कर दूँगी 

    आर के रस्तोगी 

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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