महापुरूषों की आत्माओं ने कहा धन्यवाद ‘योगी’

कर्मयोगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह शिक्षा की दुर्दशा के मुद्देनजर विद्यालयों में महापुरूषों के नाम पर होने वाली सरकारी छुट्टियां रद्द करके उनके बारे में विशेष कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिये है उसका न केवल सूबे की जनता ने दिल खोलकर स्वागत किया है वरन् प्रदेश व देश के शिक्षा के प्रति समर्पित शिक्षा विदों ने भी सराहना की है।

शिवशरण त्रिपाठी
कभी उत्तर प्रदेश में भी केन्द्र सरकार की तर्ज पर साल में बामुश्किल १५-२० सार्वजनिक छुट्टियां हुआ करती थी। लगभग सभी को पहले से मालूम होता था कि अमुक-अमुक दिन, अमुक-अमुक महापुरूष की जयंती अथवा अमुक-अमुक त्योहार के चलते सरकारी कार्यालयों में अवकाश के चलते काम-काज नहीं होगा पर आज उत्तर प्रदेश में छुट्टियों की संख्या इस कदर बढ़ चुकी है कि एक बारगी सरकारी कर्मचारी भी छुट्टियों की सही संख्या नहीं बता सकता। छुट्टियों के इसी मकड़ जाल के भ्रम में अमूमन लोग समय व पैसा खर्च करके जब कार्यवश सरकारी कार्यालयों में पहुंचने पर ताला लगा पाते है तो सिवाय माथा पीटने के उनके पास और चारा ही क्या बचता है।
फि लहाल आज की तारीख में उत्तर प्रदेश में जहां ३८ सार्वजनिक अवकाश घोषित है वहीं १९ निबंर्धित अवकाश लागू है। अलावा इनके जनपदों में स्थानीय अवकाशों की संख्या कम से कम २-३ तो होती ही है।
विडंम्बना यह देखिये कि जिस देश में केन्द्र सरकार की अलग, राज्यों की अलग व अदालतों के अलग-अलग अवकाश लागू हो उस देश में कार्य संस्कृति की स्थिति को आसानी से समझा जा सकता है।
कहना अनुपयुक्त न होगा कि ज्यों-ज्यों येन-केन-प्रकारेण सत्ता हथियाने की ललक राजनीतिक दलों में बढ़ती गई त्यो-त्यों महापुरूषों व त्योहारों के नाम पर वोटों की जुगत के चक्कर में छुट्टियां घोषित करने की भी होड़ सी लग गई।
उत्तर प्रदेश की बात की जाये तो छुट्टियों की संख्या बढ़ाने में सर्वाधिक योगदान समाजवादी पार्टी व बसपा की सरकारों का ही रहा है। जाहिर है कि इन दोनो ही दलों की सरकारों में वोटों के लिहाज से ही महापुरूषों अथवा त्योहारों पर सार्वजनिक छुट्टियां घोषित की गई थी। इससे अधिक ढिठाई व खुली बेशर्मी और क्या हो सकती है कि जब भी इन सरकारों ने ऐसी छुट्टियां घोषित की तब-तब इनके आकाओं ने खुलेआम कहा, देखो हमारी सरकार ने तुम्हारी जाति के महापुरूष अथवा तुम्हारे धर्म के नाम पर छुट्टी घोषित की है अब तो वोट हमारी पार्टी को ही देना।
राजनीतिक दलों के आकाओं ने तो वोटों की जुगत में जाति धर्म आधारित छुट्टियां घोषित की है पर उन्हे क्या कहा जाये जो ऐसी छुट्टियों के लिये आंदोलन तक चलाने से बाज नहीं आते। ऐसी ही सरकारों व ऐसे ही लोगो के कारण आज खासकर सरकारी स्कूलों में सालभर में महज १२० दिनों की पढ़ाई संभव हो पा रही है। निजी स्कूलों की तुलना में कही अधिक भारी भरकम वेतन पाने वाले सरकारी शिक्षक बच्चों को कैसी शिक्षा दे रहे है इसका खुलासा आये दिन होता ही रहता है।
कक्षा आठ तक के बच्चों को पूरी गिनती व पहाड़ा न आना, देश के महापुरूषों के बारे में छोडि़ए राष्ट्रीय पर्वो १५ अगस्त २६ जनवरी के बारे में जानकारी न रखना अंधेर नगरी चौपट राजा न कहा जाये तो और क्या कहा जाये।
कर्मयोगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह शिक्षा की दुर्दशा के मुद्देनजर विद्यालयों में महापुरूषों के नाम पर होने वाली सरकारी छुट्टियां रद्द करके उनके बारे में विशेष कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिये है उसका न केवल सूबे की जनता ने दिल खोलकर स्वागत किया है वरन् प्रदेश व देश के शिक्षा के प्रति समर्पित शिक्षा विदों ने भी सराहना की है।
नि:संदेह उन महापुरूषों की भी आत्मायें गदगद हुई होगी और वे भी योगी जी को आर्शीवाद स्वरूप ऐसे ही कर्मयोग के मार्ग पर आगे बढऩे की कामना कर रहे होगें जिनके न ाम पर अनावश्यक छुट्टियां करके जनता की गाढ़ी कमाई को पानी में बहाया जाता रहा है।

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