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    Homeविविधाआधुनिक भारत के निर्माता सरदार वल्लभ भाई पटेल

    आधुनिक भारत के निर्माता सरदार वल्लभ भाई पटेल

    -गुंजेश गौतम झा- patel

    आजादी के बाद भी सैकड़ों रियासतों के रूप में बंटे भारत को अखंड भारत बनाने में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अपने बहादुरी भरे कार्यों और दृढ़इच्छाशक्ति के दम पर लौह पुरूष का दर्जा हासिल करने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल की स्वतंत्रता आंदोलन में भी अत्यंत ही महत्त्वपूर्ण भूमिका रही।

                गुजरात के नाडियाड़ में 31 अक्टूबर,1875 को जन्मे पटेल जहाँ एक सफल वकील थे, वहीं वह जमीन से जुड़े नेता और महान राष्ट्रवादी भी थे। शुरुआत में उनके मन पर गाँधीजी के दर्शन का गहरा प्रभाव था और आजादी की लड़ाई में वह कई बार जेल गए। ब्रिटिश राज की नीतियों के विरोध में उन्होंनें अहिंसक और नागरिक अवज्ञा आंदोलन के जरिए खेड़ा, बोरसाद और बारदोली के किसानों को एकत्र किया। अपने इस काम की वजह से वह गुजरात के महत्त्वपूर्ण जननेता बने।

                15 अगस्त 1947 को भारत जब आजाद हुआ तो पटेल के ऊपर 565 अर्द्धस्वायत्त रियासतों और ब्रिटिश युग के उपनिवेशीय प्रांतों को भारत में मिलाने की जिम्मेदारी आ गई। आज हम जिस विशाल भारत को देखते हैं, उसकी कल्पना बिना सरदार वल्लभ भाई पटेल के शायद पूरी नहीं हो पाती। सरदार पटेल एक ऐसे इंसान थे जिन्होंने देश के छोटे-छोटे रजवाड़ों और राजघरानों को एक कर भारत में सम्मिलित किया। उनकी दृढ़इच्छाशक्ति, नेतृत्व कौशल और रणनीतिक चातुर्य का ही कमाल था कि 565 देशी रियासतों का भारत में विलय हो सका।

                जरूरत पड़ने पर वे कभी बल प्रयोग से भी नहीं चूके। हैदराबाद के निजाम ने जब एक भारत की अवधारणा को नहीं माना तो पटेल ने सेना उतारकर उसका घमंड चूर कर दिया। ‘ऑपरेशन पोलोनाम का यह सैन्य अभियान पूरी तरह सफल रहा और इस तरह हैदराबाद भारत का हिस्सा बन गया।

                जूनागढ़ के लिए भी उन्होंने यही रास्ता अख्तियार किया। लक्षद्वीप समूह को भी भारत के साथ मिलाने में पटेल की महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। इस क्षेत्र के लोग देश की मुख्यधारा से कटे हुए थे और उन्हें भारत की आजादी की जानकारी 15 अगस्त 1947 के बाद मिली। हालांकि यह क्षेत्र पाकिस्तान के नजदीक नहीं था, लेकिन पटेल को लगता था कि इस पर पाकिस्तान दावा कर सकता है। इसलिए ऐसी किसी भी स्थिति को टालने के लिए पटेल ने लक्षद्वीप में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए भारतीय नौसेना का एक जहाज भेजा। इसके कुछ घंटे बाद ही पाकिस्तानी नौसेना के जहाज लक्षद्वीप के पास मंडराते देखे गए लेकिन वहां भारत का झंडा लहराते देख वे वापस करांची चले गए।

                सरदार पटेल कश्मीर को भी बिना शर्त भारत में जोड़ना चाहते थे पर नेहरू जी ने हस्तक्षेप कर कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दे दिया। 565 रियासतों में से 562 रियासतों का सरदार पटेल ने बिना एक बूंद खून बहाए भारत में विलय करवाया और तीन रियासतों के विलय की जिम्मेदारी पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अपने हाथों में ली जो थे- हैदराबाद, जूनागढ़ और जम्मू-कश्मीर। कालांतर में ये तीनों रियासत इस देश के लिए नासूर ही बने। बाद में सरदार पटेल ने सैन्य कार्रवाई के द्वारा हैदराबाद और जूनागढ़ का भारत में विलय करवाया। लेकिन नेहरू जी की हठधर्मिता के कारण कश्मीर की समस्या अंतर्राष्ट्रीय समस्या बनकर रह गई। अगर कश्मीर का निर्णय पंडित जवाहरलाल नेहरू की बजाय सरदार पटेल के हाथ में होता तो कश्मीर आज भारत के लिए समस्या नहीं, बल्कि गौरव का विषय होता।

                इस प्रकार हम देखते हैं कि आचार्य विष्णुगुप्त-कौटिल्य के बाद यदि किसी ने संपूर्ण भारत के एकीकरण का प्रयास किया तो वह लौह-पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल थे। आधुनिक समय में बिस्मार्क ने जिस तरह जर्मनी के एकीकरण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई उसी तरह सरदार वल्लभ भाई पटेल ने भी आजाद भारत को एक विशाल राष्ट्र बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया। बिस्मार्क को जहाँ जर्मनी का आयरन चांसलरकहा जाता है, वहीं पटेल भारत के लौह-पुरूषकहलाते हैं।

    आज भी हम भारत के ताजा परिप्रेक्ष्य पर गौर करें तो देश का लगभग आधा भाग सांप्रदायिक एवं विघटनकारी राष्ट्रद्रोहियों की चपेट में फंसा दिखाई देता है, ऐसी संकट की घड़ी में सरदार पटेल की स्मृति हो उठना स्वाभाविक है।

    राष्ट्र के एकीकरण में महान योगदान देने वाले भारत के प्रथम ‘उप-प्रधानमंत्री’ का 15 दिसम्बर 1950 को बम्बई (वर्तमान मुंबई) में प्रातःकाल 09:37 पर 76 वर्ष की आयु में निधन हो गया। आज हमारा देश एक ऐसे ही ‘लौह-पुरूष’ की तलाश में है, जो समाज में किसी भी कीमत पर एकता लाने में सफल हो।

                सरदार वल्लभ भाई पटेल की स्मृति में गुजरात सरकार द्वारा स्टैच्यू आफ यूनिटीके निर्माण का जो संकल्प लिया गया है, यह एक अत्यंत ही सराहनीय तथा स्वागतयोग्य कदम है। मां भारती के इस वरद-पुत्रको कृतज्ञ राष्ट्र का शत-शत नमन।                                                                                                  

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