लेखक परिचय

हिमांशु डबराल

हिमांशु डबराल

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार व ब्लॉगर हैं।

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journalistक्या कहूँ कौन हूँ मैं???

शायद इंसानों की भीड़ का हिस्सा,

या उस भीड़ में सबसे जुदा

शब्दों का काश्तकार हूँ मैं,

शायद पत्रकार हूँ मैं…

एक आईना जो बहुत कुछ दिखता है,

कभी हकीकत तो कभी झूठ से भी मिलवाता है,

कभी-कभी तो धुंधुला भी पड़ जाता है,

उस आईने का व्यवहार हूँ मैं,

शायद पत्रकार हूँ मैं…

लोकतंत्र में रहते हुए

स्वयं को एक स्तम्भ कहते हुए,

जनता के इस तंत्र का पहरेदार हूँ मैं,

शायद पत्रकार हूँ मैं…

बाजारीकरण के इस दौर में

आगे बढ़ने की होड़ में,

टीरपी की दौड़ में,

पत्रकारिता से समझौता करता

एक नया बाज़ार हूँ मैं,

शायद पत्रकार हूँ मैं…

फिर भी पत्र को एक आकार देता हूँ

किसी को अन्धा तों किसी को आखे चार देता हूँ,

किसी को काली दुनिया तों किसी को रंगीन स्वप्नहार देता हूँ,

नए नए समाचारों के बीच,

एक अलग विचार हूँ मैं,

शायद पत्रकार हूँ मैं…

लकिन कभी खुद को कोसता,

अपने भीतर पत्रकारिता की लौ को खोजता,

रोज नई आधियों के बीच डगमगाती उस लौ का,

हिस्सेदार हु मैं,

शायद पत्रकार हूँ मैं…

– हिमांशु डबराल

5 Responses to “शायद पत्रकार हूँ मैं….”

  1. दीपक चौरसिया ‘मशाल’

    Dipak Chaurasiya 'Mashal'

    I beg my parden for using harsh words but that was only my observation and i didn’t mean to hurt anybody’s sentiments.

    Reply
  2. चंद्रमोहन

    भाई दीपक्,
    ऎक पॊस्ट नही लगनॆ पर आरॊप कैसॆ लगातॆ है, यॆ कॊइ दीपक भाइ सॆ सिखॊ,
    बिना चॆक कियॆ, कह दियॆ, सिर्फ बिहार कॆ पत्रकार और् छात्र लिखतॆ है.
    70% लॊग् बिहार् कॆ नहि है दॊस्त, और 50% छात्र है.
    लॆख जॊ भॆजॆगा उसिका तॊ लगॆगा भाई.

    Reply
  3. दीपक चौरसिया ‘मशाल’

    Dipak Chaurasiya 'Mashal'

    Dear Mr. Sanjeev,
    I was very hopeful that this e.paper would be a real and nonviased one, that’s why even after lack of time I stole some moments to compose a nazm for your paper. I did sent that nazm to you only after getting confirmation from some eminent shayars and kavis that the nazm was really a beautiful creation and amiable to get published. but unfotunately more even after 10 days here is no response from your side. a careful observation shows that there are only a handful writers whose articles and writings are being used for the site. the fact that disappointed me most is that, the site seems to be devoted to and property of some new journalists and writers from Bihar. You could not leave the mentality of promoting only to the people of your state. anyway, thanks for giving me a chance to understand the the real face of ‘patrakarita’ that is undercover.
    Dipak ‘Mashal’
    Belfast, UK
    mashal.com@gmail.com

    Reply
    • प्रवक्‍ता ब्यूरो

      प्रवक्‍ता ब्यूरो

      प्रिय मित्र,
      दीपक जी,
      आपका लेख उस समय किसी कारण से रह गया था।
      अब आपके उस गज़ल को पब्लिस कर दिया गया है। वह लेख 03-Aug मोर्निग 09:00AM पर उपलब्ध होगा। http://www.pravakta.com/?p=2806
      अब आपकी सारी रचना http://www.pravakta.com/?author=3774 इस लींक से देखी जा सकेगी आपके परिचय के साथ।

      सधन्यवाद
      संजीव सिन्हा

      Reply

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