लेखक परिचय

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

‘नेटजाल.कॉम‘ के संपादकीय निदेशक, लगभग दर्जनभर प्रमुख अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन तथा भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष।

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imageबलिया ने नरेंद्र मोदी की छवि ही बदल दी। अब तक लोग यह मान रहे थे कि मोदी की सरकार देश के बड़े पूंजीपतियों की सेवा कर रही है। उसे न तो देश के मध्य-वर्ग की परवाह है और न ही गरीबों की लेकिन बलिया में मोदी ने गरीब परिवारों को रसोई गैस की टंकियां मुफ्त देने की घोषणा करके करोड़ों दिलों को छू लिया है। अगले तीन साल में पांच करोड़ गरीब परिवारों को ये टंकियां मिल सकेंगी। गैस की टंकिया देते समय मोदी ने अपनी मां की जो कहानी सुनाई, उसने पत्थर दिल लोगों के दिल को भी पिघला दिया होगा।

उन्होंने बताया कि वे जिस कमरे में अपनी मां के साथ रहते थे, उसमें खिड़कियां नहीं थीं। जब चूल्हा जलता था तो कमरे में इतना धुंआ भर जाता था कि मां का चेहरा भी नहीं दिखता था। अब देश के करोड़ों गरीब परिवारों का इस तरह के चूल्हों से पिंड छूटेगा। सचमुच मोदी का दिल खुशी से भर गया होगा कि जो आदमी एक वक्त अपनी मां को चूल्हे से छुटकारा नहीं दिला सका, वह आज करोड़ों माताओं-बहनों को इस जिल्लत से मुक्त कर रहा है।

मोदी के इस कार्य को चुनावी पैंतरा कह देना उचित नहीं होगा। उ.प्र. के चुनाव में इस पहल का फायदा भाजपा को जरुर मिलेगा लेकिन यह पुण्य-कार्य है, राजनीतिक पैंतरा नहीं है। यदि यह सिर्फ पैंतरा होता तो देश के एक करोड़ दस लाख लोग अपनी गैस की एक टंकी पर मिलने वाली लगभग 150 रुपए की रियायत क्यों छोड़ देते? आज देश में नेताओं की इज्जत पैंदे में बैठी हुई है। उनके कहने से कोई डेढ़ सौ रु. क्या, डेढ़-पैसे का भी त्याग नहीं करेगा लेकिन इतने लोगों ने मोदी की आवाज को क्यों सुना? इसीलिए कि वह शुद्ध सेवा, शुद्ध करुणा, शुद्ध परमार्थ की आवाज़ थी।

लेकिन असली और बड़ा प्रश्न यह है कि इस विराट जन-समर्थन से मोदी कुछ सीखना चाहेंगे या नहीं? इसका पहला सबक तो यही है कि यह जन-समर्थन उन्हें नौकरशाहों की कृपा से नहीं मिला है और न ही उनकी पार्टी के 11 करोड़ सदस्यों का इसमें कोई योगदान है। वे सब अपनी-अपनी गोटियां बिठाने में मशगूल हैं। यह समर्थन प्रधानमंत्री को भी नहीं मिला है। प्रधानमंत्री तो कई आए और गए। यह समर्थन किसी कानून की वजह से भी नहीं मिला है। यह मिला है, जनता से सीधा संवाद कायम करने से! जनता से जो सीधा संवाद कायम कर सके, वही नेता है। पिछले दो साल में लगभग दर्जन भर अभियान शुरु किए गए लेकिन वे सब टीवी के पर्दों पर या अखबारों के पन्नों पर चिपक कर रह गए। जैसे मोदी ने गैस-टंकी पर सरकारी रियायत त्यागने की अपील की, वैसे ही वे शराब बंदी, स्वभाषा प्रयोग, घूसबंदी, पानी बचाओ आदि मुद्दों पर भी जनता से सीधी अपील करें और उसका प्रभाव देखें। प्रधानमंत्री तो वे हैं ही, वे देश के नेता भी बनते चले जाएंगे।

2 Responses to “मोदी का यह काम शुद्ध परमार्थ”

  1. Bipin kumar sinha

    Modiji ne jab subsidy chhodne ka ahvahan kiya tha to bharosa nahi aya tha .meri ma bhi lakdi jala kar khana pakati thi. Unke dhairya ki priiksha hoti thi. Kasht ka to hisab nahi. Modiji ke ahvahan ne prerit kiya aur maine pichhle sal July me subsidy mana kar diya tha. Ydyapi mai ek retired steel karmi hoon lekin meri avshykta bhi itni nahi hai ki mujhe subsidy mile. Mai kisi ke kaam aya yah bat mujhe shukoon deti hai. Modiji to nimmit the yah karya to parmatma ne karaya.

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    • इंसान

      अपनी टिप्पणी का रोमन शैली में लिप्यंतरण करते विपिन कुमार सिन्हा जी से मेरा अनुरोध है कि वे हिंदी को देवनागरी लिपि में ही लिखें| मैं ऐसे लेखों और टिप्पणियों को कदापि नहीं पढ़ता| आप अपने परिपक्व और संजीदा विचारों से मुझे क्यों वंचित रखना चाहते हैं? धन्यवाद|

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