लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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loveथोड़ी सी ख़ुशियां बांट लूं,
ग़म सिमट जायेंगे,
ओढ़लूँ उदासी तो,
क्या ग़म लौट जायेंगे।

सागर है तो उसमे,
तूफ़ान आयेंगे जायेंगे,
तूफ़ान से डर कर,
मछुवारे क्या घर बैठ जायेंगे।

फूलों से लदे पेड़ तो,
ख़ुश नज़र आयेंगे,
पतझड़ मे भी लेकिन,
वो मुसकुरायेंगे।

पूर्णिमा की रात हो तो,
चाँद खिलखिलाताहै,
अमावस की रात मे भी,
तारे टिमटिमायेगे।

अकेला ही सच की राह पर,
चल दिया अगर कोई,
राह सही और सच्ची हो तो,
काफ़िले बनते जायेगें

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