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प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

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-रीता विश्वकर्मा-
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‘अच्छे दिन आने वाले हैं व अबकी बार मोदी सरकार’ के जोशीले नारे व भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के नाम से शुरू हुआ भाजपा का चुनावी अभियान नरेन्द्र मोदी के नाम पर ही 12 मई को खत्म हो रहा है। इसका आगाज तो बहुत अच्छा रहा, लेकिन अंजाम खुदा जाने की तर्ज पर 16 मई 2014 (मतगणना) का ढलता सूरज भी गवाही दे देगा। भारत वर्ष के चुनावी इतिहास में 16वीं लोकसभा का यह चुनाव ऐसा रहा जिसमें देश ही नहीं पूरे विश्व में चर्चा के केन्द्र में सिर्फ मोदी ही मोदी रहे। सत्ताधारी दल हो या फिर अन्य विपक्षी पार्टियां या फिर खुद भाजपा तथा आम मतदाता हर किसी की जुबान पर 16वीं लोकसभा के चुनाव में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी ही रहे। आचार संहिता लागू होने के पूर्व भाजपा के लगे इक्का दुक्का होंर्डिग्स को छोड़ दें तो हर होर्डिंग्स, पेास्टर, बिल्ले, बैनर, टोपी में सिर्फ और सिर्फ नरेन्द्र मोदी की ही विशालकाल तस्वीर नजर आयी। लगभग सभी लोकसभा क्षेत्रों में मोदी लहर ने स्थानीय समस्याओं को न केवल हासिये पर ला दिया बल्कि जाति-पात की जकड़न को पूरी तरह से कमजोर कर दिया। कमोवेश सभी संसदीय क्षेत्रों में भगवा ब्रिगेड का पूरा अभियान अगर अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के नाम पर ही चलाया गया तो विपक्षी पार्टियों से लेकर चुनावी समर में उतरे अन्य दलों के प्रत्याशियों तथा आजाद उम्मीदवारों व आम मतदाताओं की जुबां पर सिर्फ और सिर्फ नरेन्द्र मोदी का ही नाम छाया रहा। कोई जीत के लिए मोदी नाम का मंत्र जप रहा था तो कोई भाजपा को घेरने के लिए मोदी को कोस रहा था। लेकिन मोदी का नाम तो बरबस सभी की जुबां से निकल रहा था। हर बाजारों, नुक्कडो़, चौराहों, चौपालों, खेत खलिहानों, गांव-गलियों में चल रही बहस में नरेन्द्र मोदी ही मुद्दा बने रहे। तात्पर्य यह कि घर-घर मोदी हर-हर मोदी की आवाजें ही सुनाई देती रही। देश व्यापी मोदी लहर के चलते हवा का रूख पूरी तरह मुड़ा हुआ है।

तितरफा चल रहे हवा के बवंडर के मध्य रूख क्या करवट लेगा यह तो 16 मई ही गवाही करेगा। लेकिन चुनाव प्रचार समाप्त होने व मतदान तक चर्चा का केन्द्र नरेन्द्र मोदी ही बने हैं। उत्तर प्रदेश की बात की जाए तो बसपा सुप्रीमों सुश्री मायावती से लेकर सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह यादव, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व कांग्रेस, पीसपार्टी एवं अन्य सियासी पार्टियों के नेता मोदी टीम को केन्द्रित रखकर ही सारा चुनावी अभियान चलाते रहे। भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में चुनावी सभाओं को सम्बोधित करने आये भाजपा व अन्य समर्थक पार्टियों के दिग्गज एवं स्टार प्रचारक नरेन्द्र मोदी नाम की ही माला जपते रहे। चुनाव प्रचार के अन्तिम छड़ों में तकरीबन सभी संसदीय क्षेत्रों में खुद नरेन्द्र मोदी ने थ्रीडी एवं चुनावी जनसभा के जरिये अपनी मौजूदगी का एहसास कराया। तो रही सही कसर भी पूरी हो गयी जातीयता की बेड़ियां टूट गयीं, मतदाता जाति-पात के भेदभाव से बाहर निकल सोचने-समझने एवं कुछ कर गुजरने को मजबूर हो गये। संसदीय क्षेत्रों के भाजपा प्रत्याशी गण खुद को शुरू से ही नरेन्द्र मोदी का दूत बताते ही रहे। प्रत्याशियों ने खुद के बजाय नरेन्द्र मोदी के नाम पर ही अपना पूरा चुनावी अभियान चलाया। इन चर्चाओं से किसको क्या हासिल होगा, यह 16 मई का ढलता सूरज साफ बता देगा। अब इन्तजार है तो 16 मई का जब ईवीएम में कैद मतदाताओं के मतों की गणना होगी और प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला।

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