राजनीति त्याग कर राष्ट्रनीति का करना होगा पालन, आंदोलनजीवियों से सावधान रहने की है जरूरत :: नरेन्द्र मोदी

भगवत कौशिक।नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर राज्यसभा में जमकर बोले।राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव से बोलना शुरू किया और किसान आंदोलन के डीएनए तक बोले।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि हमें ये तय करना होगा कि हम समस्या का हिस्सा बनेंगे या समाधान का माध्यम। उन्होंने कहा कि राजनीति और राष्ट्रनीति में हमें किसी एक को चुनना होगा। पीएम मोदी बोले कि सदन में किसान आंदोलन की भरपूर चर्चा हुई, जो भी बताया गया वो आंदोलन को लेकर बताया गया लेकिन मूल बात पर चर्चा नहीं हुई।

पीएम मोदी ने संसद से देश को FDI “फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट” की नई परिभाषा बताई, जो किसान आंदोलन के संदर्भ में निकल कर सामने आया है।एफडीआई को आसान भाषा में कहें तो प्रत्यक्ष विदेशी निवेश। मतलब कि विदेश की कोई कंपनी भारत की किसी कंपनी में सीधे पैसा लगा दे। पीएम मोदी वाला एफडीआई भी विदेशी है, लेकिन इसका संबंध पैसे के निवेश से नहीं बल्कि विचारों के निवेश से है।

संसद में पीएम मोदी ने कहा कि देश को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की जरूरत है। मगर नया FDI जो आया है, उससे बचने की जरूरत है। हिंदी में इसका तर्जुमा करें तो इसका मतलब होता है विदेशी विनाशकारी विचारधारा। पीएम मोदी ने FDI की नई व्याख्या किसान आंदोलन के संदर्भ में की है।आपको बता दें कि पिछले दिनों किसान आंदोलन को लेकर कुछ विदेशी हस्तियों नें अपने विचार सोशल मीडिया पर साझा किए थे। इनमें पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग, अमेरिकी पॉप स्टार रिहाना और पोर्न स्टार मिया खलीफा समेत कई हस्तियां शामिल थीं। जिसके बाद से सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया और कई भारतीय हस्तियां उनके खिलाफ मैदान में उतर गईं थीं। पीएम मोदी ने सोमवार को संसद में किसी का जिक्र किए बिना ही FDI की नई व्याख्या से सभी पर निशाना साध दिया।

एमएसपी है,एमएसपी था और एमएसपी रहेंगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब लाल बहादुर शास्त्री जी को जब कृषि सुधारों को करना पड़ा, तब भी उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। लेकिन वो पीछे नहीं हटे थे। तब लेफ्ट वाले कांग्रेस को अमेरिका का एजेंट बताते थे, आज मुझे ही वो गाली दे रहे हैं। पीएम ने कहा कि कोई भी कानून आया हो, कुछ वक्त के बाद सुधार होते ही हैं। पीएम मोदी ने अपील करते हुए कहा कि आंदोलनकारियों को समझाते हुए हमें आगे बढ़ना होगा, गालियों को मेरे खाते में जाने दो लेकिन सुधारों को होने दो। पीएम मोदी ने कहा कि बुजुर्ग आंदोलन में बैठे हैं, उन्हें घर जाना चाहिए। आंदोलन खत्म करें और चर्चा आगे चलती रहे।किसानों के साथ लगातार बात की जा रही है। पीएम मोदी ने किसानों को भरोसा दिलाया कि MSP है, था और रहेगा। मंडियों को मजबूत किया जा रहा है. जिन 80 करोड़ लोगों को सस्तों में राशन दिया जाता है, वो भी जारी रहेगा। किसानों की आय बढ़ाने के लिए दूसरे उपाय पर बल दिया जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि अगर अब देर कर देंगे, तो किसानों को अंधकार की तरफ धकेल देंगे।

पीएम किसान सम्मान निधि योजना से किसानों को मिली मदद- मोदी

पीएम मोदी ने कहा, ‘’जब हम कर्जमाफी करते हैं तो छोटा किसान उससे वंचित रहता है, उसके नसीब में कुछ नहीं आता है। पहले की फसल बीमा योजना भी छोटे किसानों को नसीब ही नहीं होती थी। यूरिया के लिए भी छोटे किसानों को रात-रात भर लाइन में खड़े रहना पड़ता था, उस पर डंडे चलते थे.’’। उन्होंने कहा, ‘’पीएम किसान सम्मान निधि योजना से सीधे किसान के खाते में मदद पहुंच रही है।10 करोड़ ऐसे किसान परिवार हैं जिनको इसका लाभ मिल गया।अब तक 1 लाख 15 हजार करोड़ रुपये उनके खाते में भेजे गये हैं. इसमें अधिकतर छोटे किसान हैं.’’।

आंदोलनजीवियों से बचकर रहे

पीएम मोदी ने कहा कि कुछ बुद्धिजीवी होते हैं, लेकिन कुछ लोग आंदोलनजीवी हो गए हैं, देश में कुछ भी हो वो वहां पहुंच जाते हैं।कभी पर्दे के पीछे और कभी फ्रंट पर, ऐसे लोगों को पहचानकर हमें इनसे बचना होगा।ये लोग खुद आंदोलन नहीं चला सकते हैं, लेकिन किसी का आंदोलन चल रहा हो तो वहां पहुंच जाते हैं। ये आंदोलनजीवी ही परजीवी हैं, जो हर जगह मिलते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि एक नया FDI मैदान में आया है, जो Foreign destructive ideology से देश को बचाने की जरूरत है। पीएम मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत किसी सरकार नहीं बल्कि देश का आंदोलन है।

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