नाज़ है हिंद पर

भारत भूषण

नाज़ है हिंद पर
साज़ लोकतंत्र है
ये चित्र चंचला बहुत
धरा का प्रतिबिम्ब है

नील नभ नई किरण
आशा सी भोर ये
शक्ति सी भर रही
कुछ कह रही सुनो इसे

खेत है हरा भरा
हरियाली चहुंओर है
उम्मीद से भरी बंधी
ऐसे राजा का देश है

बालिका इतरा रहीं
लेगी जन्म शान से
बदल रहा नर यहां
चलें हम भी मान से

स्वच्छ में प्रभु बसे
कहा था पुस्तकों ने ये
युगपुरूष आया है वो
झंकृत किया है वो

हिंद के नाम पर
त्याग का देव है
प्रधान सेवक है वो
लिख रहा इतिहास है

Leave a Reply

%d bloggers like this: