लेखक परिचय

अनिल अनूप

अनिल अनूप

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार व ब्लॉगर हैं।

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अनिल अनूप
बहुत कम लोग जानते हैं कि बॉलीवुड में किस्मत आजमाने से पहले मेगास्टार अमिताभ बच्चन रेडियो उद्घोषक बनना चाहते थे और इसके लिए वह ‘ऑल इंडिया रेडियो’ के मुम्बई के स्टूडियो में ऑडिशन देने भी गए थे। प्रसिद्ध रेडियो उद्घोषक अमीन सयानी के पास तब अमिताभ से मिलने का समय नहीं था, क्योंकि अभिनेता ने वॉयस ऑडिशन के लिए पहले से समय नहीं लिया था। अमीन सयानी ने एक साक्षात्कार में कहा कि- “यह 1960 के दशक के आखिर में कभी हुआ था, जब मैं एक हफ्ते में 20 कार्यक्रम करता था। हर दिन मेरा अधिकतर समय साउंड स्टूडियो में गुजरता था, क्योंकि मैं रेडियो प्रोग्रामिंग की हर प्रक्रिया में शामिल रहता था। एक दिन अमिताभ बच्चन नाम का एक युवक बिना समय लिए वॉयस ऑडिशन देने आया। मेरे पास उस पतले-दुबले व्यक्ति के लिए बिल्कुल समय नहीं था। उसने इंतजार किया और लौट गया। इसके बाद भी वह कई बार आया, लेकिन मैं उससे नहीं मिल पाया और रिसेप्शनिस्ट के माध्यम से यह कहता रहा कि वह पहले समय ले, फिर आए।” अमीन सयानी को बाद में पता चला कि वह अमिताभ बच्चन थे, जो ऑडिशन के लिए उनके कार्यालय आया करते थे। जब सयानी ने ‘आनन्द’ फ़िल्म (1971) का एक ट्रॉयल शो देखा तो वह अमिताभ बच्चन के व्यक्तित्व और आवाज़ से प्रभावित हुए और तब उन्हें पता नहीं था कि वह अमिताभ ही थे, जो ऑडिशन के लिए आए थे। इस फ़िल्म में अमिताभ बच्चन के साथ राजेश खन्ना ने काम किया था।
अमीन सयानी बताते हैं कि “अमिताभ एक अवॉर्ड समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आए थे और उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए तीन बार ऑडिशन के लिए रेडियो स्टेशन जाने की बात कही और कहा कि उन्हें ऑडिशन में बैठने भी नहीं दिया गया। मैं सुनकर चौंक गया। बाद में जब मैंने उनका साक्षात्कार किया तो हमने इस पर लंबी चर्चा की और हंसे।” लेकिन इतना सब होने के बावजूद ‘पद्मश्री’ से सम्मानित रेडियो उद्घोषक सयानी का मानना है कि जो हुआ, वह अच्छे के लिए हुआ। वे मानते हैं कि “हालांकि आज मुझे इसे लेकर खेद भी होता है, लेकिन मुझे लगता है जो हुआ, वह हम दोनों के लिए अच्छा हुआ। मैं सड़क पर होता और उन्हें रेडियो पर इतना काम मिलता कि भारतीय सिनेमा अपने सबसे बड़े सितारे से वंचित रह जाता।”
अमीन सयानी को आवाज़ के जादूगर और रेडियो के इतिहास में पहले जॉकी के रूप में जाना जाता है। रेडियो जॉकी के रूप में वे विश्व के श्रेष्ठ जॉकी माने जाते हैं। ‘गीतमाला’ प्रोग्राम के जरिए सुनी गई अमीन सयानी की आवाज़ ‘बहनों और भाइयो’ आम लोगों को आज भी गुदगुदाती है। करीब 46 वर्ष तक रेडियो सीलोन के जरिए सयानी की प्रस्तुति और बाद में विविध भारती पर इसके प्रसारण को लोग आज भी याद करते हैं।
अमीन सयानी का जन्म ब्रिटिशकालीन भारत में 21 दिसम्बर, 1932 ई. को हुआ था। किसी ज़माने में ‘रेडियो का दूसरा नाम’ कहे जाने वाले अमीन सयानी आज भी उसी रुमानियत और जोश से भरे हैं। वही बोलने का अंदाज़, वही मीठी और अपनेपन वाली आवाज़।
अमीन सयानी का सफ़र इतना आसान नहीं था। कभी वे गायक बनना चाहते थे, लेकिन बाद में जाने-माने ब्रॉडकास्टर बन गए। वे मानते हैं कि अच्छी हिन्दी बोलने के लिए थोड़ा-सा उर्दू का ज्ञान ज़रूरी है।
अमीन सयानी रेडियो सिलोन पर 1952-1974 तक ‘बिनाका गीत माला’ के सफल और लोकप्रिय प्रस्तोता रहे।
आवाज़ के जादूगर और रेडियो के पहले जॉकी अमीन सयानी को फिक्की ने ‘लिविंग लीजेंड अवॉर्ड’ से सम्मानित किया है। इंडियन रेडियो इंडस्ट्री में बड़ा योगदान करने वालों को सम्मानित करने के लिए फिक्की ने ‘इंडियन रेडियो फोरम’ के साथ मिलकर इस अवॉर्ड की स्थापना की है। ‘गीतमाला’ प्रोग्राम के जरिए सुनी गई अमीन सयानी की आवाज ‘बहनों और भाइयो’ आमलोगों को आज भी गुदगुदाती है। ‘गीतमाला’ के अलावा अमीन सयानी ने करीब 54 हज़ार रेडियो प्रोग्राम प्रस्तुत किए।
अमीन सयानी को ‘पद्मश्री’ से भी सम्मानित किया जा चुका है।
प्रख्यात रेडियो प्रस्तोता और उद्घोषक अमीन सयानी का मानना है कि सस्ते, सहज सुलभ और खूबसूरत माध्यम के रूप में रेडियो हमेशा मौजूद रहने वाला है, यह कभी नहीं मरेगा। ऑल इंडिया रेडियो के चर्चित कार्यक्रम ‘बिनाका गीत माला’ के प्रस्तोता के रूप में पहचानी जानी वाली लोकप्रिय मखमली आवाज के मालिक अमीन कहते हैं कि आज म्यूजिक प्लेयर और आईपॉड जैसे डिजिटल उपकरणों के आ जाने के बाद भी रेडियो का अस्तित्व पहले की तरह कायम है, इसकी लोकप्रियता को कोई खतरा नहीं है।
रेडियो जगत के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए अमीन ने कहा मुझे नहीं लगता कि रेडियो के अस्तित्व को कभी भी खतरा होगा। एफआईसीसीआई-केपीएमजी मीडिया एंड एंटरटेंमेंट रिपोर्ट 2014 के मुताबिक 2016 में रेडियो सुनने वालों की संख्या में 12 से 14 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।

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