कुमार कृष्णन
21 जून को नीट की परीक्षा दोबारा ली गई और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी इस बात का श्रेय ले सकती है कि इस बार पेपर लीक नहीं हुए लेकिन बिहार में परीक्षा में नीट-यूजी पुनर्परीक्षा में कथित अनियमिततायें पूरी प्रणाली पर सवाल खड़े करती है। पुनर्परीक्षा के दौरान भी कई केंद्रों में अव्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही देखने को मिली। नीट 2026 की पुनर्परीक्षा से ठीक एक दिन पहले राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की बड़ी लापरवाही सामने आई। ओडिशा की अभ्यर्थी संजना संजीबनी को उसके गृह राज्य के बजाय करीब 1500 किलोमीटर दूर उत्तराखंड के देहरादून में परीक्षा केंद्र आवंटित कर दिया गया। मामला अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद एनटीए ने संशोधित प्रवेश पत्र जारी कर परीक्षा केंद्र देहरादून से बदलकर भुवनेश्वर कर दिया। आजादी के इतने सालों में शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई किस्म के प्रयोग हुए, कई पद्धतियां अपनाई गईं, लेकिन राजनेताओं ने शिक्षा और परीक्षा की खामियों पर कभी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा करना जरूरी नहीं समझा।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 17 जून 2026 को राजस्थान के कोटा से “छात्रों की गूंज” नामक देशव्यापी शिक्षा सुधार आंदोलन की शुरुआत की। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य नीट-यूजी परीक्षा पेपर लीक, परीक्षाओं में धांधली, और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव जैसे मुद्दों के खिलाफ आवाज उठाना है।
मोदी सरकार यह दावा कर सकती है कि धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा लिए बिना उसने फिर से पेपर करवाए और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा जैसा अहम मुद्दा बनाते हुए वायुसेना को प्रश्नपत्र पहुंचाने के काम में लगाया गया। शायद ही दुनिया के किसी और देश ने ऐसा दृश्य देखा हो, जो भारत में देखा गया कि वायुसेना के जहाजों में परीक्षा प्रश्नपत्र आए और पुलिस वाले कड़ी सुरक्षा में उन्हें केंद्रों तक ले गए। इसे जो लोग मोदी सरकार के प्रशासन की सख्ती और कड़े फैसले लेने की क्षमता समझ रहे हैं, वे एक बार यह भी सोचें कि पेपर लीक करवाने वाला माफिया कितना ताकतवर है जिससे निपटने के लिए वायुसेना को मैदान में उतारना पड़ा।
इस बात पर भी विचार कर लेना चाहिए कि आखिर ऐसे आपराधिक तत्वों की ताकत किस तरह इतनी बढ़ गई। क्या सरकार और तमाम जांच एजेंसियों का इतना भी इकबाल बाकी नहीं रहा है कि वे सड़क मार्ग से प्रश्नपत्र ले जा सकें या फिर अब यह पेपर लीक माफिया को चुनौती है कि हिम्मत है तो हवा में पेपर चुरा कर दिखाओ। खैर नीट का पेपर दोबारा हो गया और इसमें जो बच्चे बैठ पाए, अब उनका भविष्य क्या होगा, यह परिणाम आने पर पता चलेगा लेकिन 3 मई को परीक्षा में जितने बच्चे बैठे थे, उनमें से कई बच्चे इस बार परीक्षा नहीं दे पाए। पुनर्परीक्षा के दौरान कई ऐसी तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जहां जरा सी देर होने पर बच्चों को परीक्षा केंद्र के भीतर नहीं जाने दिया गया।
इन सबके बीच बिहार के लख्खीसराय में पुलिस ने बिहार में नीट-यूजी पुनर्परीक्षा में कथित रूप से अनियमितताओं का प्रयास करने के आरोप में कम से कम 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। परीक्षा केंद्रों में कार्यरत 18 लोगों को बायोमेट्रिक सत्यापन मानकों का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया जबकि अन्य अधिकांश लोग प्रतिरूपणकर्ता यानी इम्पर्सोनेटर थे जिन्होंने वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा लिखने का प्रयास किया। मई के प्रारंभ में आयोजित मूल स्नातक चिकित्सा प्रवेश परीक्षा को प्रश्नपत्र लीक होने के व्यापक आरोपों के बीच रद्द किए जाने के बाद, राज्यभर में रविवार (21 जून, 2026) को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पुनर्परीक्षा आयोजित की गई।
अपर पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) सुधांशु कुमार के अनुसार बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली से जुड़े 18 कर्मचारियों को सत्यापन प्रक्रिया से समझौता कर डमी अभ्यर्थियों और बिचौलियों के साथ कथित मिलीभगत करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। नीट-यूजी पुनर्परीक्षा में लखीसराय में पकड़ी गई धांधली में सॉल्वर गिरोह से जुड़े मेडिकल छात्रों और बायोमीट्रिक कर्मियों की मिलीभगत सामने आई है।
लखीसराय पुलिस ने मेडिकल कॉलेजों के छात्रों को सॉल्वर बनाकर बैठाने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। लखीसराय पुलिस के अनुसार, पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड भगवान महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज पावापुरी, नालंदा का एमबीबीएस चतुर्थ वर्ष का छात्र रविशंकर उर्फ सम्राट बताया जा रहा है जो फरार है। जांच में पता चला कि रविशंकर उर्फ सम्राट ने बायोमीट्रिक टेंडर प्राप्तकर्ता प्रमोद कुमार यादव से सांठगांठ कर पहले बायोमीट्रिक व्यवस्था को अपने प्रभाव में लिया। इसके बाद वैशाली निवासी और पटना मेडिकल कॉलेज के चतुर्थ वर्ष के छात्र मयंक कश्यप को बायोमीट्रिक कर्मी अंकित कुमार की पहचान पर ड्यूटी में लगाया गया। इसी नेटवर्क के माध्यम से फर्जी परीक्षार्थियों को बिना प्रभावी सत्यापन के परीक्षा केंद्रों के अंदर प्रवेश दिलाया गया। हसनपुर और केआरके हाई स्कूल केंद्र पर एक-एक तथा केंद्रीय विद्यालय केंद्र पर सात मेडिकल छात्रों को प्रवेश दिलाया गया था।
सभी को गिरफ्तार कर पूछताछ जारी है। वहीं मूल परीक्षार्थी संजीत कुमार, पिता विनोद कुमार, निवासी खपुरा, थाना नगरनौसा, जिला नालंदा को भी गिरफ्तार किया है। इसके अलावा सॉल्वर को साथ लेकर आए दो सहयोगी मेडिकल छात्रों को परीक्षा केंद्र के बाहर पकड़ा गया।लखीसराय में पकड़े गए सॉल्वर का जुड़ाव आठ राज्यों से है। इनमें बिहार के अलावा मध्यप्रदेश, ओडिशा, नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बंगाल, राजस्थान और झारखंड के मेडिकल छात्र शामिल हैं। गिरफ्तार सॉल्वरों में मंतोष कुमार (शंकरपुर, मधेपुरा) न्यू जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज के चतुर्थ वर्ष का छात्र है।
विवेक कुमार (हरचंदा, कांटी, मुजफ्फरपुर) एएनएमएम मेडिकल कॉलेज के चतुर्थ वर्ष का छात्र है। हिमांशु कुमार (पथरा, सुपौल)- मध्यप्रदेश के सतना के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के प्रथम वर्ष का छात्र है।
सौरभ झा (राजनगर, मधुबनी) एम्स रायबरेली के चतुर्थ वर्ष का छात्र है। पूनम कुमारी (बरमसिया, गिरिडीह) बीएचयू की बीएससी नर्सिंग की छात्रा है। अमन अग्रवाल (हौज खास, नई दिल्ली)- यूनिवर्सिटी कॉलेज आफ मेडिकल साइंस, दिल्ली का एमबीबीएस इंटर्न है।
रौशन कुमार (बिशनपुर, लौकहा, मधुबनी) एनएमसीएच पटना के बी. फार्मा चतुर्थ वर्ष का छात्र है। चंचल कुमारी (शेरभुका, पलामू)- गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कॉलेज ओडिशा की छात्रा है।वहीं जितेंद्र कुमार (सवाई माधोपुर, राजस्थान) एनएमसीएच पटना का छात्र है। इस मामले में पकड़े गए स्कालरों के दो सहयोगी अर्पित सिंह (यादव नगर, भगवानपुर, मुजफ्फरपुर) एएनएमसीएच गया के एमबीबीएस चतुर्थ वर्ष का छात्र जबकि रंजीत कुमार (खपुरा, नगरनौसा, नालंदा)लखीसराय के जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार एवं एसपी प्रेरणा कुमार के अनुसार,प्रारंभिक पूछताछ में प्रति अभ्यर्थी 10 से 12 लाख रुपये तक की डील की बात सामने आई है। पुलिस अब गिरोह के आर्थिक लेन-देन, अन्य राज्यों में फैले संपर्कों और परीक्षा माफिया से संभावित रिश्तों की जांच कर रही है। परीक्षा से ठीक पहले जिला प्रशासन को गुप्त सूचना मिली कि कुछ केंद्रों पर मूल अभ्यर्थियों के स्थान पर मेडिकल के छात्र बैठाए जाने वाले हैं। इसके बाद विशेष टीम गठित कर तीन परीक्षा केंद्रों उच्च विद्यालय हसनपुर, केआरके उच्च विद्यालय और केंद्रीय विद्यालय में सघन जांच शुरू की गई। मामले का पहला तार हसनपुर केंद्र से जुड़ा। यहां परीक्षा शुरू होने से पहले एक संदिग्ध परीक्षार्थी को पकड़ा गया। पूछताछ में उसने अपना नाम मंतोष कुमार, पिता- शंभू यादव, निवासी- शंकरपुर, जिला- मधेपुरा बताया। वह न्यू जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज का चतुर्थ वर्ष का छात्र है और संजीत कुमार की जगह परीक्षा देने पहुंचा था। मंतोष के उद्भेदन के बाद अन्य केंद्रों पर छापेमारी में सॉल्वर गिरोह का पूरा नेटवर्क सामने आ गया। पुलिस अब इस गिरोह के तार कई राज्यों तक खंगाल रही है।
इतना तो तय है कि लाखों छात्रों के भविष्य को दांव पर लगाने और परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने में नीट की अक्षमता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगे हैं।
पहली बार मुख्य परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र लीक होने, टेलीग्राम पर पेपर सर्कुलेट होने और ‘सॉल्वर गैंग’ (डमी परीक्षार्थियों) के सक्रिय होने के मामले सामने आए।बार-बार परीक्षा केंद्रों की यात्रा करने, लॉजिस्टिक्स और कोचिंग से जुड़े अतिरिक्त खर्चों के कारण मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ा है।
कुमार कृष्णन