तीसरी लहर के भयावह रूप को न्यौता देती लापरवाही

चिंता बढ़ाते कोरोना के टूटते नियम

  • योगेश कुमार गोयल
    दुनियाभर में लाखों लोगों की जान ले चुकी कोरोना महामारी से जंग जीतने में इजरायल स्वयं को कोविड मुक्त घोषित करने वाला दुनिया का पहला ऐसा देश बन चुका है, जहां 70 फीसदी से ज्यादा आबादी का वैक्सीनेशन किए जाने के बाद सरकार द्वारा फेस मास्क लगाने के अनिवार्य नियम को हटा दिया गया है। इसके अलावा केवल दो सप्ताह में ही 90 फीसदी से भी ज्यादा व्यस्क आबादी का वैक्सीनेशन करने वाला भूटान, कड़े निर्णयों की बदौलत न्यूजीलैंड, ज्यादातर आबादी का वैक्सीनेशन होने के कारण चीन तथा पूर्ण रूप से वैक्सीनेशन होने के पश्चात् अमेरिका में भी कई जगह मास्क फ्री हो गई हैं। अमेरिका में तो सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन द्वारा घोषणा भी की जा चुकी है कि जो लोग पूरी तरह से कोविड वैक्सीन लगवा चुके हैं, उन्हें अब अकेले चलते समय, दौड़ते, लंबी पैदल यात्रा या बाइक चलाते समय बाहर मास्क पहनने की आवश्यकता नहीं है।
    भारत में अभी करीब एक अरब लोग वैक्सीनेशन से बचे हैं, अब तक करीब 25 करोड़ लोगों को पहली खुराक मिली है जबकि 5 करोड़ के कुछ ज्यादा लोगों को ही दोनों खुराक। वैक्सीन की उपलब्धता में कमी के कारण धीमी गति से हो रहे वैक्सीनेशन से चलते अभी उपरोक्त देशों की भांति कोरोना महामारी से लड़ाई में जीत की घोषणा करने में भारत को लंबा समय लगेगा। ऐसे में समझदारी इसी में है कि कोरोना महामारी से अपनी और अपने परिजनों की सुरक्षा के लिए तमाम एहतियाती कदम उठाए जाएं। भले ही अब दूसरी लहर का प्रकोप बेहद कम हो गया है लेकिन जिस प्रकार कोरोना की दूसरी लहर ने भारत में कहर बरपाया और अगले कुछ महीनों में तीसरी लहर का आना भी तय माना जा रहा है, ऐसे में कोरोना से मौतों को रोकने के लिए स्वास्थ्य ढ़ांचे को तीसरी लहर से निपटने के लिए तैयार करने के साथ-साथ लोगों को भी कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए सचेत रहना होगा। जगह-जगह लॉकडाउन खुलते ही बाजारों में उमड़ती भारी भीड़ तथा हर कहीं कोरोना प्रोटोकॉल के टूटते नियमों को देखते हुए कोरोना की अगली लहर को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने तो इसका स्वतः संज्ञान लेते हुए इन हालातों पर गहरी चिंता जताते हुए कहा भी है कि अगर ऐसे ही सब चलता रहा तो कोरोना की तीसरी लहर को बढ़ावा मिलेगा और फिर भगवान ही हमें बचा पाएगा।
    केन्द्र सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन के अनुसार भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण की इतनी भीषण और लंबी दूसरी लहर की तीव्रता का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सका था। उनके मुताबिक ऐसी दूसरी लहर प्रायः पहले की तुलना में छोटी होती है और ऐसी ही दूसरी लहर की उम्मीद थी लेकिन कई छोटी-छोटी चीजों ने मिलकर इसे बड़ा बना दिया। दरअसल हमने परिस्थितियों को काफी हल्के में लिया, जिससे वायरस को फैलने का मौका मिल गया। कोरोना की पहली लहर के बाद जैसे ही बचाव के कदमों में ढि़लाई बरती गई, संक्रमण फिर से फैलना शुरू हुआ, जो दूसरी खतरनाक लहर के रूप में सामने आया। जब तक हम नई इम्युनिटी तक पहुंचते, तब तक कई लोगों में नए म्यूटेंट का संक्रमण फैल गया। अब केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्धन कह रहे हैं कि पहली लहर के बाद हमने जो ढ़ील दी, वही गलती हमसे फिर न हो जाए। प्रधानमंत्री ने भी हाल ही में लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा है कि खतरा अभी टला नहीं है क्योंकि कोरोना वायरस अभी देश में मौजूद है और इसके रूप बदलने की संभावना बनी हुई है, इसलिए तमाम सावधानियां बरतें। दूसरी लहर ने देश में बहुत कहर बरपाया है, अनेक परिवारों ने इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकाई है और हैरानी की बात है कि लोग इसे इतनी आसानी से भूलकर फिर से पुरानी गलतियों को दोहराते हुए कोरोना की तीसरी लहर के भयावह रूप को न्यौता देते प्रतीत हो रहे हैं।
    कोरोना की तीसरी लहर को लेकर सामने आ रही नई चेतावनियों के बाद तो माथे पर चिंता की लकीरें खिंचना स्वाभाविक ही है। दरअसल जहां अभी तक लगभग सभी विशेषज्ञों का मानना था कि तीसरी लहर करीब तीन महीने बाद आ सकती है लेकिन दूसरी लहर का भीषण प्रकोप देखने के बाद भी अधिकांश लोग जिस प्रकार फिर से पूरी तरह से लापरवाह और बेफिक्र होकर कोरोना से बचाव के तमाम नियम-कायदे भूल गए हैं, प्रशासन की नाक तले मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग की खुलकर धज्जियां उड़ रही हैं, ऐसे में विशेषज्ञों द्वारा अब कहा जाने लगा है कि अगर लापरवाही का यही आलम रहा तो कोरोना की तीसरी लहर अगले 6 से 8 सप्ताह में ही आ सकती है। के विजय राघवन तो पहले ही कह चुके है कि कोरोना की तीसरी लहर का आना तय है, जिसे रोक नहीं सकते। उनका कहना है कि चूंकि सार्स-सीओवी2 और उत्परिवर्तित हो रहा है, इसलिए कोरोना की नई लहरों के लिए तैयार रहना चाहिए।
    देश में कोरोना की दूसरी लहर की तीव्रता के प्रमुख कारणों में कोरोना के नए-नए वेरिएंट्स की प्रमुख भूमिका देखी गई। दरअसल वायरस लगातार अपना रूप बदलता रहता है। हाल ही में ब्राजील के साओ पाउलो प्रांत में कोरोना वायरस के 19 स्वरूपों की पहचान हुई है। मूल रूप से भारत में खोजा गया और हमारे यहां पिछले दिनों कहर बरपा चुका कोरोना का डेल्टा वेरिएंट दुनिया के 80 देशों में फैल चुका है और इन दिनों इंगलैंड में कहर बरपा रहा है, जहां पिछले 11 दिनों में ही इसके मामले दोगुने हो गए हैं। अब कोरोना के नए स्वरूप ‘डेल्टा प्लस’ की भी भारत में मौजूदगी दर्ज की जा रही है, जिसे आने वाले दिनों में बड़े खतरे के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी लहर का प्रकोप थमने और प्रतिबंधों में ढ़ील के बाद कई राज्यों में मिले कोरोना के इस नए वेरिएंट के कुछ मामले सामने आने के बाद तीसरी लहर से बचने के लिए कोरोना के नियमों का सख्ती से पालन कराना बेहद जरूरी हो गया है। दरअसल वायरस जिस तेजी से अपना स्वरूप बदल रहा है और इसके लगातार नए-नए वेरिएंट्स सामने आ रहे हैं, ऐसे बदलावों के कारण इसके इंसानी कोशिकाओं को संक्रमित करने तथा तेजी से संक्रमण फैलाने की क्षमता काफी बढ़ गई है।
    कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर के अंतर्गत मौजूदा वायरस के मुकाबले हजार गुना तेजी से फैलने वाले कोविड के नए-नए स्ट्रेन के मौजूद होने की आशंका जताई जा रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल यह कह पाना संभव नहीं है कि तीसरी लहर के दौरान कोरोना वायरस के कितने और किस-किस प्रकार के म्यूटेंट हमारे सामने होंगे लेकिन साथ ही उनका यह भी कहना है कि वायरस के भले ही कैसे भी रूप हों, संक्रमण के उसके तरीकों में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। बदलते वायरस के प्रति भी प्रतिक्रिया वही है कि हमें कोविड उचित व्यवहार का पालन करने की आवश्यकता है, जैसे कि मास्क लगाना, सोशल डिस्टेंसिंग रखना, स्वच्छता बनाए रखना, कोई अनावश्यक मुलाकात नहीं करना। दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की अबाधित आपूर्ति और आवश्यक दवाईयों की कालाबाजारी सबसे बड़ा संकट बनकर सामने आया, इसलिए तीसरी लहर से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए दवाओं तथा ऑक्सीजन जैसी आवश्यक वस्तु के उत्पादन और उनकी अबाधित आपूर्ति की व्यवस्था करने के अलावा हमारे तंत्र को समय रहते अन्य सुविधाओं के लिए भी पूरी मुस्तैदी के साथ काम करना होगा। तीसरी लहर आने की पुष्टि होने के बाद बहुत जरूरी है कि सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार की सलाह का उपयुक्त इस्तेमाल करते हुए हम स्वयं को और देश के समूचे तंत्र को उस लहर से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार करें ताकि हमें दूसरी लहर जैसा बड़ा खामियाजा न भुगतना पड़े।

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