नेतागिरी : रील लाईफ और रियल लाईफ में है जमीन आसमान का अंतर

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रील लाईफ से रियल लाईफ की नेतागिरी में आए तो सितारे, पर सफल नहीं हो पाए!

लिमटी खरे

रील लाईफ अर्थात फिल्मों का जीवन, इसमें लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचने वाले अदाकारों ने सियासत में रियल लाईफ में भी हाथ आजमाए हैं, पर रूपहले पर्दे के अदाकार इसमें सफल नहीं हो पाए। सफलता का पैमाना सुनील दत्त को माना जा सकता है। वे सबसे ज्यादा समय तक सांसद रहे हैं। उनके बाद नंबर आता है विनोद खन्ना का। आज हम आपको सियासी सफर तय करने वाले अभिनेताओं के बारे में बताते हैं।

सबसे पहले बात की जाए सुनील दत्त की। सुनी दत्त को वालीवुड में बहुत ही शालीन और बेहतर दिखने वाला अदाकार माना जाता था। सुनील दत्त ने अनेक हिट फिल्म भी दी हैं। सुनील दत्त का राजनीति में रूझान बढ़ा। उन्होंने 1984 में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की और वे लगातार पांच बार सांसद भी रहे। इतना ही नहीं सुनील दत्त 2004 से 2005 तक केंद्र में खेल एवं युवक कल्याण विभाग के मंत्री भी रहे हैं।

इसके बाद विनोद खन्ना आते हैं। विनोद खन्ना अपने जमाने के माने हुए अभिनेता माने जाते थे। उनका रूझान भाजपा की ओर रहा। उन्होंने 1997 में भाजपा की सदस्यता ली और वे 1998 से 2009 और 2014 से 2018 तक पंजाब के गुरूदासपुर से लोकसभा सांसद रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कैबनेट में वे पर्यटन मंत्री और विदेश मंत्री भी रहे हैं।

सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने मित्र राजीव गांधी के कारण सियासत की ओर रूख किया पर उन्हें सियासत रास नहीं आई। अमिताभ्ज्ञ बच्चन 1984 में इलहाबाद (वर्तमान प्रयागराज) से सांसद रहे, पर महज 03 साल बाद ही उन्होंने सांसद पद से त्यागपत्र दे दिया था।

70 के दशक के सुपर स्टार राजेश खन्ना भी सियासी सफर तय कर चुके हैं। उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ली और 1992 में वे लोकसभा से दिल्ली से चुनाव लड़ने उतरे। वे विजयी भी हुए, पर महज 05 साल के कार्यकाल को पूरा करने के बाद उन्होंने सियासी बियावान को अलविदा कह दिया था।

वालीवुड के बेजोड़ अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा की बात की जाए तो उन्होंने 1992 में भाजपा की सदस्यता ली। उन्होंने राजेश खन्ना के सामने चुनाव लड़ा पर वे महज 25 हजार वोट से चुनाव में पराजित हो गए थे। इसके बाद 2009 में शत्रुघ्न सिन्हा ने बिहार के पटना साहिब से किस्मत आजमाई और परचम लहराया। 2014 में एक बार फिर वे विजयी हुई। इन्हें अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया था।

बात अगर ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी की हो तो हेमा मालिनी को भी काफी हद तक सफल राजनीतिज्ञ माना जा सकता है। हेमा मालिनी ने 2004 में भाजपा की सदस्यता ली। इस दौरान उनके द्वारा विनोद खन्ना के लिए चुनाव प्रचार किया। हेमा मालिनी ने 2014 में उत्तर प्रदेश के मथुरा से किस्मत आजमाई और वे विजयी हुईं। इसके बाद 2019 में भी वे मथुरा से ही भारी बहुमतों से विजयी हुईं।

दक्षिण भारत से मुंबई आकर किस्म आजामाने वाली जया प्रदा की अगर बात की जाए तो जया प्रदा ने सियासी सफर 1994 में तेलगू देशम पार्टी से आरंभ किया था। इसके बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थामा। वे 2004 से 2014 तक उत्तर प्रदेश के रामपुर से सांसद रहीं। इसके बाद समाजवादी पार्टी का दामन छोड़कर जयाप्रदा ने भाजपा की सदस्यता ले ली थी।

राज बब्बर की अगर बात करें तो राज बब्बर का सियासी सफर भी सफल माना जा सकता है। 1989 में वे जनता दल की बैसाखी के जरिए राजनीतिक वीथिकाओं में आए और कुछ समय बाद वे जनता दल को छोड़कर समाजवादी हो गए। इसके बाद राज बब्बर ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। राज बब्बर 03 बार लोकसभा तो 02 बार राज्य सभा के सदस्य रह चुके हैं।

बिग बी यानी अमिताभ बच्चन की अर्धांग्नी जया बच्चन भी सियासी सफर में सफल मानी जा सकती हैं। जया बच्चन ने अपनी शुरूआत 2004 में समाजवादी पार्टी से की। वे 2004 से 2006, 2006 से 2010 और 2012 के बाद 2018 में राज्य सभा के जरिए संसद की सीढ़ियां चढ़ने में सफल हो पाईं।

छोटे पर्दे की अदाकारा स्मृति ईरानी की किस्मत वालीवुड में भी उम्दा रही और सियासत में भी। स्मृति ईरानी ने 2003 में सियासत में कदम रखा। वे राज्य सभा सांसद रहीं किन्तु 2019 में उस वक्त सबसे सफल मानीं गईं जब उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज राहुल गांधी को 2019 में धूल चटाकर अमेठी से सांसद बनीं। वे केंद्र में मंत्री हैं।

इसके अलावा परेश रावल 2014 में अहमदाबाद से, गोविंदा 2004 में मुंबई से, सनी देओल 2019 में गुरदासपुर से सांसद बने तो किरण खेर 2014 एवं 2019 में लोकसभा सांसद बनीं।

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