निर्भीक-निड़र-बेबाक पत्रकार ‘रोहित सरदाना’ के यूं चले जाने पर विश्वास नहीं होता!

दीपक कुमार त्यागी

जिसने प्रथ्वी पर किसी भी रूप में जन्म लिया है, उसका एक दिन जाना तय है, यह सर्वशक्तिमान ईश्वर का बनाया हुआ नियम है, लेकिन कोई भी व्यक्ति अगर अपनी पारिवारिक व सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करके आयु के अंतिम पड़ाव पर दुनिया से चला जाता है तो उसके जाने की वेदना अधिक नहीं होती है। जिस तरह से अचानक शुक्रवार की सुबह भारतीय मीडिया जगत की नामचीन बड़ी हस्ती दिग्गज पत्रकार ‘रोहित सरदाना’ की नोएडा के अस्पताल में तबीयत खराब हुई और फिर अस्पताल से मीडिया जगत के लिए हैंड लाईन बनने वाली वज्रपात करने वाली बेहद दुखद खबर आयी की मेट्रो अस्पताल के डॉक्टर भारतीय पत्रकारिता जगत के दिग्गज ‘रोहित सरदाना’ को बचाने में कामयाब नहीं हो सकें। जब मैने इस दुखद खबर को देखा तो उसने मेरे दिलोदिमाग को झकझोर कर मुझे निशब्द करके रख दिया, मुझे अभी तक भी विश्वास नहीं हो पा रहा है कि कैसे हंसता बोलता बेबाक बेखौफ चेहरा दुनिया को एक ही पल में अलविदा कह कर चला गया। वैसे सर्वशक्तिमान विधाता के निर्णय के आगें किसी भी छोटे या बड़े व्यक्ति का कोई बस नहीं चलता है, वो ताकतवर से ताकतवर व्यक्ति को भी एक ही पल में बहुत बेबस लाचार बना देता है। ईश्वर का विधान ऐसा है कि हम सभी लोगों को अच्छी से अच्छी या विपरीत से विपरीत कैसी भी परिस्थितियों में भी ईश्वर के किये गये निर्णय मानना ही पढ़ता है, उसका निर्णय अंतिम व सर्वमान्य होता है। लेकिन फिर भी हम लोग एक इंसान है, जो व्यक्ति के व्यवहार रिश्ते-नातों आपसी संबंधों की मजबूत डोर की वजह से एक दूसरे से लगाव रखते हैं। ‘रोहित सरदाना’ का तो व्यवहार ही गजब था वो आपसी संबंधों को जीवन भर निभाने वाले एक बहुत बेहतरीन शख्सियत वाले व्यक्तित्व थे। उनसे जीवन में जब भी मुलाकात हुई उन्होंने हमेशा अपने व्यवहार से दिल जीतने का कार्य किया, जब भी उनसे बात होती थी वो हमेशा बेहद सकारात्मक रहते थे और उत्साहवर्धन करते थे। ऐसे व्यक्ति के यूं एक ही पल में दुनिया से चले जाने पर विश्वास नहीं होता है।

कोरोना की बीमारी से संक्रमित होने के बाद भी जिस तरह से ‘रोहित सरदाना’ लगातार महामारी से जूझ रहे लोगों के जीवन रक्षक बनकर उनके मददगार बन रहे थे, वह काबिलेतारीफ था। उनके इस मददगार व्यवहार ने रोहित को जीवन के अंतिम काल में आम लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया था। एक दिन पहले तक भी जिस तरह से ‘रोहित सरदाना’ अपने बेहद गंभीर संक्रमण की चिंता ना करके, संक्रमित लोगों के लिए ऑक्सीजन का बंदोबस्त करवा कर उनके जीवन के लिए साँसों का इंतजाम करवाने में बेहद व्यस्त थे, उसको भूलना असंभव है। वह अपना दुख-दर्द भूलकर लोगों की मदद करने में इतना अधिक सक्रिय थे कि लोगों का कोरोना का इलाज करवाने के लिए उनका अस्पताल में एडमिशन, साधारण बेड, ऑक्सीजन वाले बेड, आईसीयू, वेन्टीलेटर, दवाई, प्लाज़्मा व इंजेक्शन आदि तक की व्यवस्था करवाने के लिए लगातार सोशल मीडिया व अन्य विभिन्न सशक्त माध्यम से बेहद सक्रिय थे। ‘रोहित सरदाना’ भयंकर आपदाकाल में लोगों से लगातार एक दूसरे का सहयोग करने की अपील कर रहे थे। लेकिन किसी को नहीं पता था कि आपदा में लोगों की हिम्मत व हौसला बढ़ाकर, कोरोना से संक्रमित लोगों के लिए साँसों का इंतजाम करने वाले इस महायोद्धा के लिए ईश्वर ने साँस बहुत कम लिखी हैं, एक दिन बाद ही वह अपने भरेपूरे परिवार को हंसते-खेलता एक ही पल में रोता-बिलखता छोड़़कर दुनिया से यूं रूखसत हो जायेगें, यह दुखद स्थिति अविश्वसनीय है।

हरियाणा के कुरुक्षेत्र से आकर दिल्ली के शक्तिशाली राज दरबार में दखल रखने वाले ‘रोहित सरदाना’ ने बहुत कम समय में ही अपनी मेहनत योग्यता विशेष शैली और अपने प्रशंसकों के प्यार के बलबूते, भारतीय पत्रकारिता जगत में अपना विशेष बेहद महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया था। इलैक्ट्रोनिक मीडिया की दुनिया में ‘रोहित सरदाना’ अपना विशेष स्थान बनाकर ऐसी अमिट छाप छोड़कर गये हैं कि भविष्य में जिस तक पहुंचना पत्रकारों का बड़ा सपना होगा। वह देश के एक ऐसे मशहूर दिग्गज न्यूज एंकर थे जिसके नाम से ही ‘दंगल’ जैसा कार्यक्रम मशहूर था। ‘रोहित सरदाना’ अपने आप में टीवी जगत के सशक्त ब्रांड बन चुके थे, टीआरपी की दुनिया में उनके द्वारा किये जाने वाला कार्यक्रम की रैंकिंग बहुत जबरदस्त होती थी, अब स्थिति यह थी कि बड़े-बड़े न्यूज चैनल भी ‘रोहित सरदाना’ की शख्सियत के सामने बौने साबित होने लगे थे। देश के आम-जनमानस, भारतीय इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट मीडिया के क्षेत्र में उनकी छवि एक राष्ट्रवादी विचारधारा, हिन्दुत्ववादी सोच रखने वाले दिग्गज क्रांतिकारी पत्रकार की बन गयी थी। ‘रोहित’ टीवी पत्रकारिता में निर्भीकता के साथ वैचारिक क्रांति लाने के सूत्रधार थे। यही वजह है कि ‘रोहित सरदाना’ का अचानक यूं चले जाना सभी को अंचभित कर रहा है, किसी का भी मन आसानी से इस बात को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। वो अपने परिवार, मित्रों, शुभचिंतकों के साथ भारतीय टीवी पत्रकारिता के लिए उम्मीद की किरण थे। लेकिन उनके आकस्मिक निधन से परिवार, मित्र व शुभचिंतकों का सफर अब ठहर गया है। ‘रोहित सरदाना’ का निधन न केवल परिवार व उनके चाहने वालों के लिए व्यक्तिगत क्षति है, बल्कि भारतीय पत्रकारिता में एक देशहित की सोच रखने वाले लोगों के लिये गहरा धक्का है और अपूरणीय क्षति है। ‘रोहित सरदाना’ का निधन पत्रकारिता के क्षेत्र में एक युग की समाप्ति है।

‘रोहित सरदाना’ को भारतीय मीडिया जगत में बेहद बेबाक निर्भीक तरीके से अपनी बात रखने के लिए जाना जाता था, उनके जैसे स्पष्ट बोलने वाले बहुत कम लोग मीडिया जगत में बचे हैं। लंबे समय से वह टीवी मीडिया का बेहद चर्चित चेहरा रहे हैं, ‘रोहित सरदाना’ इन दिनों ‘आज तक’ न्यूज चैनल पर प्रसारित होने वाले बेहद चर्चित डिवेट शो ‘दंगल’ की एंकरिंग करते थे। उन्हें पत्रकारिता जगत के कई पुरस्कारों से भी नवाजा गया था और वर्ष 2018 में ही ‘रोहित सरदाना’ को बेहद प्रतिष्ठित ‘गणेश शंकर विद्यार्थी’ पुरस्कार से नवाजा गया था। कोरोना के क्रूर काल चक्र ने ‘रोहित सरदाना’ को भी हम लोगों से हमेशा के लिए छीन लिया है, यह अभी भी अविश्वसनीय, अकल्पनीय लगता है। सर्वशक्तिमान ईश्वर से प्रार्थना हैं कि वह ‘रोहित सरदाना’ को अपने श्री चरणों में स्थान दें और बेहद दुख की इस घड़ी को सहन करने की परिवार को शक्ति प्रदान करें।। ॐ शांति ॐ शांति ॐ शांति।।

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