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    Homeसाहित्‍यकविताबन्द है दरवाजे,कभी तो खुलेंगे

    बन्द है दरवाजे,कभी तो खुलेंगे

    बन्द हैं दरवाजे,कभी तो खुलेंगे,
    कभी तो हम अपनो से मिलेंगे।
    उम्मीद रखो,अच्छा वक्त आयेगा,
    जो बिछड़े है,वे जल्दी ही मिलेंगे।।

    सूरज छिपता है,तो निकलता भी है,
    बीज बोते है,तो पौधा उगता भी है।
    उम्मीद पर है ये कायम दुनिया है सारी,
    सोता है इंसान तो कभी जागता भी है।।

    ख्तम होगा गम,खुशियां लौटकर आयेगी,
    कभी न कभी तो चेहरों पर मुस्कान आयेगी।
    फ़िक्र मत कर ये जलजला ख़तम हो जायेगा,
    खुशी की लहरे जिंदगी में जरूर आएगी।।

    रहता नहीं बख्त एक सा बदलता रहता,
    बुरा बख्त हमेशा ही याद आता रहता,
    आता है बुरा बख्त कुछ सिखा कर जाता,
    बख्त के साथ दुनिया का रुख बदल जाता।।

    जल्दी ही लौटेंगी जिंदगी में खुशियां,
    अपनो से मिलकर बाटेंगे ये खुशियां।
    अभी कुछ गमों का दौर है चल रहा,
    इम्तिहानों के बाद मिलेगी ये खुशियां।।

    आर के रस्तोगी

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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