लेखक परिचय

डॉ. मधुसूदन

डॉ. मधुसूदन

मधुसूदनजी तकनीकी (Engineering) में एम.एस. तथा पी.एच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त् की है, भारतीय अमेरिकी शोधकर्ता के रूप में मशहूर है, हिन्दी के प्रखर पुरस्कर्ता: संस्कृत, हिन्दी, मराठी, गुजराती के अभ्यासी, अनेक संस्थाओं से जुडे हुए। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (अमरिका) आजीवन सदस्य हैं; वर्तमान में अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्‍था UNIVERSITY OF MASSACHUSETTS (युनिवर्सीटी ऑफ मॅसाच्युसेटस, निर्माण अभियांत्रिकी), में प्रोफेसर हैं।

Posted On by &filed under चुटकुले.


डॉ. मधुसूदन

(दो गुज्जु चुटकुले )
जो आज कल सुनाए जा रहे हैं।
अंत तक पढें।
चुटकुला एक
गुज्जु बाप:
बेटा देख, तेरे लिए, लडकी ढूंढी है। gujjuतुम्हें उससे विवाह करना होगा।
बेटा:
नहीं, मैं अपनी पसंद की लडकी से विवाह करूँगा।
बाप:
पर बेटा, सोच। यह लडकी बिल गेट्स की इकलौती पुत्री है।
बेटा:
ऐसा? तो तो फिर बात ही अलग है।
{दूसरे ही, दिन गुज्जु बाप, बिल गेटस से भेंट करता है।}
गुज्जु बाप:
बिल, एक बहुत अच्छा लडका है, तेरी पुत्री के लिए।

बिल गेट्स:
पर, मेरी बिटिया, अभी छोटी है। आयु ही क्या है उसकी ?
गुज्जु बाप:
पर, बिल यह लडका हाथ से निकल न जाए। वह “वर्ल्ड बॅन्क” का सहायक प्रबंधक है। सोच ले!

बिल गेट्स:
अच्छा ! तो तो फिर बात अलग बनती है।
{अंतमें गुज्जु बाप वर्ल्ड बॅंक के प्रधान प्रबंधक की भेंट करता है।}

गुज्जु बाप:
मैं एक होनहार युवक को जानता हूँ। जो आपकी बॅन्क को बहुत लाभ कराएगा। सहायक प्रबंधक पद पर उचित रहेगा।
प्रधान प्रबंधक:
पर मेरे पास आवश्यकता से अधिक सहायक प्रबंधक पहले से ही है।

गुज्जु बाप:
पर यह होनहार युवक बिल गेट्स का दामाद है।

प्रधान प्रबंधक:
अच्छा, अच्छा। तो तो फिर बात ही अलग है।

ऐसे चला करता है, गुज्जु का व्यापार!

{यह पुरानी कहानी है।अब एक नयी कहानी पढिए।}
(अंत तक पढें)

मोदी:
मैं, मेरे सपने का भारत बनाना चाहता हूँ।
भारतीय जनता:

“पर सिंगापूर जैसा विकास अच्छा रहेगा।”

मोदी: “पर विकास जापान जैसा होगा।”
जनता: तो, तो, फिर ठीक है।
अगले महीने: मोदी जापान दौरेपर।
मोदी:
मैं भारत को जापान की भाँति विकसित करना चाहता हूँ।
जापान:
पर जापान के आदर्श पर भारत विकास में बहुत वर्ष लगेंगे।
मोदी:
फिर से ठीक सोच लो ……नहीं तो मैं चीन जैसा विकास करूंगा।
जापान:
ठीक है, तो हम आपको ३४ बिलियन डॉलर उपलब्ध कराएंगे।

अगले महीने चीन मोदी से सम्पर्क करता है।

चीन:
हमने सुना है, कि, जापान की भाँति आप, भारत का विकास करना चाहते हैं। चीन की भाँति क्यों नहीं?

मोदी:
पर मैं जापान को, वचन दे चुका हूँ।

चीन:
पर आपको, केवल ३४ बिलियन डालर, मिले हैं। हम आपको १०० (सौ) बिलियन डॉलर उपलब्ध कराएंगे।

मोदी:
अच्छा, ऐसा है, तो बात अलग है।
अगले महीने अमरिका मोदी से सम्पर्क करता है।

अमरिका:
देखिए, आप भारत का विकास चीन या जापान की भाँति नहीं कर सकते।

मोदी:
पर मैं ने भारत का विकास करनेका वचन दे दिया है।
अमरिका:
ठीक है; आप भारतका विकास अमरीका जैसा करें…………हम आपको ५०० बिलियन डालर देंगे।
मोदी:
अच्छा! ऐसा? तो ठीक है।

ऐसे होता है , गुज्जु व्यापार।

सारे भारतीयों को समर्पित।

19 Responses to “बुद्धु नहीं है गुज्जु”

  1. आर. सिंह

    आर. सिंह

    डाक्टर साहिब, चुटकुले तो अच्छे हैं,पर सामान्य भाषा में इस तरीके की गिनती ब्लफोलोजी में की जाती है.

    Reply
    • डॉ. मधुसूदन

      डॉ. मधुसूदन

      आ. सिंह साहब, नमस्कार और दीपावली की शुभकामनाएँ।

      (१) आज की टिप्पणी में,आप की बात पर मेरा प्रश्न।
      प्रश्न: क्या ब्लफ्फोलॉजी और चुटकुले में सच्चाई की दृष्टि से विशेष अंतर है?
      ब्लफ़्फ़ोलॉजी कहीं ” हरदेव बाहरी के “अंग्रेज़ी से हिन्दी” के शब्दकोश” में भी नहीं मिलता।अन्य शब्दकोशों में भी नहीं मिला।
      (२) चुटकुला हिन्दी और गुजराती दोनो में चलता है।
      और ब्लफ्फोलॉजी शायद “हिंग्लिश” का शब्द है?हिन्दी में क्या है?

      (३)पर, ब्लफ मिलता है। उसका प्रयोग पत्ते खेलने में किया जाने का अर्थ बताया गया है।गुजराती में “धाप” मराठी में “थाप” है।
      (४) अच्छा फिर बिहारी सज्जनों की बात को,आप चुटकुला के नाम से उल्लेख करते हैं। पर गुजराती का ब्लफ्फॉलोजी? ऐसा दोहरा माप दण्ड क्यों?

      (५)मेरे लिए बिहारी क्या और गुजराती क्या, सारे भारतीय समान है।
      चुटकुला गुजरातियों द्वारा अन्य भारतियों में फैलाया गया,इसी कारण बताया था।

      मधुसूदन

      Reply
      • आर. सिंह

        आर. सिंह

        डाक्टर साहिब,
        नमस्कर.
        बहुत बहुत धन्यबाद. आपको और आपके परिवार को दिवाली की ढेर सारी शुभ कामनाएं.
        एक भूल तो अवश्य हो गयी है.आपके दोनों चुटकुलों के लिए मेरी टिप्पणी अलग अलग होनी चाहिए थी. पहले को मैं चुटकुलों की श्रेणी में मानता हूँ,पर चूँकि दूसरा चुटकुला,प्रधान मंत्री के गंभीर कूटनीतिक प्रयास को हल्का कर देता है,इसलिए वह मुझे चुटकुले के रूप में मान्य नहीं है.हो सकता है कि मेरी मान्यता गलत हो,पर मैं इसे ठीक समझता हूँ.ब्लफोलॉजी को ज्यादा से ज्यादा हिंगलिश कहा जा सकता है और यह किसी डिक्सनरी या शब्दकोष में नहीं मिलेगा. हिंदी में इसकी सबसे अच्छी व्याख्या एक पुरानी हिंदी फिल्म ब्लफ़ मास्टर में है,जिसमे सम्मी कपूर और शायरा बानू मुख्य भूमिका में थे.
        मैंने ऊपर जो सपषीकरण दिया है,उससे यह साफ़ हो गया होगा कि किसी भी चुटकुले को मैं चुटकुला ही मानता हूँ,चाहे वह बिहारियों के बारे में हो या गुजरातियों के बारे में..
        मैं एक भारतीय हूँ और यही समझा जाने में प्रसन्न हूँ. चूँकि जन्म बिहार में हुआ है ,अतः जन्म से बिहारी भी हूँ ही.पर बिहार भी तो अभी तक भारतवर्ष का ही अंग है.

        Reply
  2. डॉ. मधुसूदन

    डॉ. मधुसूदन

    हा…हा…हा…हा! वाह! शिवेन्द्र जी, आपका चुटकुला मेरे लिए नया है।

    मुकुल जी, इंसान जी, डॉ. टी. के. रॉय साहब, सुरेंद्रनाथ तिवारी जी, इत्यादि मित्रों की टिप्पणी भी प्रेरक है।

    सभी को धन्यवाद और दीपावली अभिनन्दन एवं शुभेच्छाएँ।

    गुज्जु ओं पर दोनों प्रकार के पर्याप्त चुटकुले होते हैं।

    कुछ प्रंशसात्मक कुछ निंदात्मक। कुछ “व्याजस्तुति” और कुछ “व्याजनिन्दा” के अलंकार में ठीक बैठेंगे।

    मैंने दो चुटकुले “व्याजस्तुति वाले आलेखित किए।

    शिवेंद्र जी ने भी व्याजस्तुति वाला ही, बहुत अच्छा आलेखा।

    कभी व्याज निन्दा वाले भी बताऊंगा।

    Reply
    • शिवेंद्र मोहन सिंह

      बहुत बहुत शुक्रिया डाक्टर साहब , आप स्वस्थ रहें, देश सेवारत रहें यही हमारी दीपावली की और भाई दूज की शुभकामनाएं हैं।

      सादर

      शिवेंद्र मोहन सिंह

      Reply
  3. शिवेंद्र मोहन सिंह

    आपने बात छेड़ी है तो मैं इसे आगे बढ़ा रहा हूँ, २००९ में मेरे मित्र ने ये मेल भेजी थी और वर्तमान लेख के लिए इससे उम्दा
    टिप्पणी नहीं हो सकती ………………….

    Bill Gates organized an enormous session to recruit a new Chairman for
    Microsoft Europe.

    5000 candidates assembled in a large room. One candidate is Kantibhai Shah.

    Bill Gates: Thank you for coming. Those who do not know JAVA may leave.

    2000 people leave the room.

    Kantibhai says to himself, ‘I do not know JAVA but I have nothing to lose if I stay. I’ll give it a try’

    Bill Gates: Candidates who never had experience of managing more than 100 people may leave.

    2000 people leave the room.

    Kantibhai says to himself ‘ I never managed anybody by myself but I have nothing to lose if I stay.
    What can happen to me?’ So he stays.

    Bill Gates: Candidates who do not have management diplomas may leave.

    500 people leave the room.

    Kantibhai says to himself, ‘I left school at 15 but what have I got to lose?’ So he stays in the room.

    Lastly, Bill Gates asked the candidates who do not speak Serbo – Croat to leave.

    498 people leave the room.

    Kantibhai says to himself, ‘ I do not speak one word of Serbo – Croat, but what do I have to lose?’

    So he stays and finds himself with one other candidate.Everyone else has gone.

    Bill Gates joined them and said ‘Apparently you are the only two candidates who speak Serbo – Croat, so I’d now like to hear you have a conversation together in that language.’

    Calmly, Kantibhai turns to the other candidate and says `kem chho’

    The other candidate answers ‘ek dam majama’


    सादर,
    शिवेंद्र मोहन सिंह

    Reply
    • आर. सिंह

      आर. सिंह

      शिवेंद्र सिंह जी,आपने इस चुटकुले में थोड़ा फेर बदल कर दिया है.ऐसे यह चुटकुला दो बिहारियों के बारे में फेश बुक और अन्य शोशल मीडिया पर पहले से मौजूद है.

      Reply
      • शिवेंद्र मोहन सिंह

        महराज मैंने पहले ही लिखा है की २००९ में मेरे दोस्त ने ये मेल पास भेजी थी, बोलिए तो मैं मेल आपको भी फारवर्ड कर दूँ। इसका बिहारी वर्जन (भोजपुरी ) और बुंदेलखंडी वर्जन भी मुझे पढ़ने को मिला है, व्हाट्स अप पे। काट छांट मैंने नहीं की है बल्कि अब इसमें कांट छांट कर दिया गया है। मैंने ज्यों का त्यों कॉपी पेस्ट किया है मेल से।

        दीपावली व भाई दूज की आपको शुभकामनाएं।

        सादर,
        शिवेंद्र मोहन सिंह

        Reply
  4. मुकुल शुक्ल

    गुज्जू तो हमेशा से ही बिजनेस माइंडेड रहा है … और मोदी तो सरकार भी कॉर्पोरेट स्टाइल मे चला रहे है … ऐसे मे ये चुटकुला एक दम सटीक है …

    Reply
  5. इंसान

    वाह भाई मधुसूदन जी क्या चुटकुला प्रस्तुत किया है| आपका हास्यास्पद चरित्र देखते मैं भी बूझूं कि अमरीका में सालों बिता कर भारत के नागरिक शायद अब आप नहीं होंगे, कर दाता भी आप वहीं के होंगे, इस लिये 10-12 लोगों को रिसर्च करवाते, डालर कमाते क्योंकर प्रवक्ता.कॉम पर हिंदी अथवा हिन्दू राष्ट्र के बखेड़े में पड़ आप अपना मानसिक संतुलन रख पाते होंगे! हँसते हँसाते विघ्नकारी स्थितियों में अपनी लेखनी द्वारा हमें मार्गदर्शन देते रहिये| धन्यवाद|

    Reply
    • डॉ. मधुसूदन

      डॉ. मधुसूदन

      आ. इंसान जी, धन्यवाद। प्रामाणिकता से—

      (१) ये चुटकुले यहाँ सुनाए जा रहे हैं; ये मैं ने प्रारंभ में कहा है। इनका श्रेय मेरा नहीं है।

      (२) अन्य रचनाएं,जैसे, कुकुर मुत्ते की कविता, नरेंदरवा हराओ इत्यादि मेरी अपनी हैं।

      (३)इससे आगे का उत्तर अप्रत्यक्ष आत्मश्लाघा (?) होगा।

      Reply
    • डॉ. मधुसूदन

      मधुसूदन

      “जब तक तुम्हारे लाखों बंधु, भूखी नंगी अवस्था में रहने के लिए विवश और अज्ञान में डूबे हैं, मैं प्रत्येक भारतीय को, कृतघ्न और राष्ट्रद्रोही मानता हूँ, जो अपने उन बंधुओं की बलि चढाकर आगे बढता है, पर उनका न्यूनतम ऋण भी चुकाने से बचता फिरता है।”—विवेकानन्द जी

      स्वामी जी के ये विचार किस भारतीय को प्रेरित नहीं करेंगे?
      यह न्यूनातिन्यूनतम ऋण ही मेरा देय है।

      Reply
      • आर. सिंह

        आर. सिंह

        मैं भी तो यही कहता हूँ कि भारत एक अशिक्षित और बीमार राष्ट्र है और इसीलिये गरीब भी है. जब तक हमलोग शिक्षा पद्धति में आमूल परिवर्तन कर गुणवत्ता युक्त शिक्षा सर्व सुलभ नहीं कराएंगे तब तक भारतीय अशिक्षित ही रहेंगे.उसी तरह जब तक हम उच्च कोटि कि चिकित्सा सर्व सुलभ नहीं कराएंगे,तब तक एक आम भारतीय को न बिमारी से छुटकारा मिलेगा और न गरीबी से.

        Reply
        • इंसान

          जब तक हम लोग शिक्षा… जब तक हम उच्च कोटि की चिकित्सा… आप कहते तो हैं परन्तु रमश भाई, हम हैं कौन? मैंने पहले भी कहा था, प्रभु, आप तो सदैव ऊपर अन्तरिक्ष से झांकते भारतवासियों का निरीक्षण करते प्रतीत होते हैं! भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एवं राष्ट्र के अन्य प्रमुख महाविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के सहस्रों स्नातकों द्वारा अंग्रेजी भाषा में शिक्षा प्राप्त कर उनका विदेशों में प्रस्थान हो चुका है| अब सोचिये कि यदि ऐसा क्रम चलता रहा तो भारतीय क्योंकर अशिक्षित नहीं रहेंगे और भारतीय को बीमारी से क्योंकर छुटकारा नहीं मिलेगा? और जो स्नातक भारत में रह जाते हैं तो उन में अधिकांश शासकीय कागज़दाब बने अब तक सरकारी कुर्सियां संभाले हुए हैं| शेष भ्रष्टाचार व अनैतिकता के वातावरण में जैसे तैसे जीवन निर्वाह कर रहे हैं| मैं पूछता हूँ कि तथाकथित स्वतंत्रता के उपरान्त यदि कुशल नेतृत्व के अधीन शिक्षा दीक्षा जापान और चीन की भांति किसी लोकप्रिय भारतीय भाषा में दी जाती तो क्या प्रवासी भारतीय विदेश न जा भारत के विकास में अपना योगदान न दे पाते? जब आज नेतृत्वहीन घोर अंधकार में राजनैतिक क्षितिज पर राष्ट्रवादी नरेन्द्र मोदी उजागर हुए हैं तो “हम” संशयी मन आँखें चुरा रहे, विरोध कर रहे है और देश को फिर से अंधकार में ढकेल रहे हैं| क्या हम भारतवासी हैं? हम हैं कौन?

          Reply
  6. T.K.Roy

    चुटकुले समयोपगी है । मोदीजी की गुज्जु बुद्धि काम आयेगी, भारत लिये ।

    Reply
  7. डॉ. मधुसूदन

    ડૉ. મધુસૂદન

    ઇ મૈલ સે મિલા શ્રી. સુરેંદ્રનાથ તિવારી કા નિમ્ન સંદેશ.–મધુસૂદન ગુજ્જુ.

    ha…ha…ha..haa

    Sundar Madhu bhai….

    ab pataa chalaa…Bihari kyon budhhu kahe jaate hain…..

    agar Bihari hota to kahataa……

    “Are…ye…samajhata kya hai apne aapko, Bill Gates hoga to

    apne ghar ka……hamaaraa beta bhi agle saal IFS kar

    jaayegaa…. fir Bilwaa ko hindustan men ghusane hi naahin

    dengen….”

    saadar

    Surendra Nath Tiwari

    Reply
    • शिवेंद्र मोहन सिंह

      कदाचित तिवारी बाबा ठीक ही बोल रहे हैं। व्यापारी के बजाए नौकरशाह बनना ठेठ बिहारी मानसिकता है।

      सादर

      शिवेन्द्र मोहन सिंह

      Reply
      • डॉ. मधुसूदन

        डॉ.मधुसूदन

        मैंने बहुत बार अनुभव किया है।
        कि जो बार बार अपने मत को ही येन केन प्रकारेण उलटा सीधा तर्क देकर सही प्रमाणित करने के लिए उत्कट और आतुर होते हैं; वें हीन ग्रंथि से ग्रस्त होते हैं।

        यह मानस शास्त्रीय सच भी माना जाता है।
        जो हीन ग्रंथिसे पीडित होता है, वही डींग हाँकता है।
        किसी प्रदेश से कितना लागू होता है; नहीं जानता।
        मुझे तो लालू और नीतिश भी इसी ढाँचे में ढले दिखते है।
        धन्यवाद।

        Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *