लेखक परिचय

विनोद बंसल

विनोद बंसल

लेखक इंद्रप्रस्‍थ विश्‍व हिंदू परिषद् के प्रांत मीडिया प्रमुख हैं। कई पत्र-पत्रिकाओं एवं अंतर्जाल पर समसामयिक विषयों पर नियमित लेखन।

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-विनोद बंसल

आठ नवम्बर 2016 के आठ बजे की वह घडी भारतीय अर्थ व्यवस्था के शुद्धिकरण के लिए एक ऐतिहासिक पल के रूप में जानी जाएगी। 500 व 1000 रूपए के नोटों को चलन से बंद करने की अचानक घोषणा ने समस्त देश वासियों को हिला कर रख दिया. गत एक माह के अनुभव ने एक बात तो सिखा दि कि हम समस्त भरत वंशियों को अब नकदी के मोह से उबर कर ‘नकदी रहित व्यवहार(कैश लैस ट्रान्जेक्शन)’ का अभ्यास तुरंत प्रभाव से करना पडेगा, जो दुनियाभर के विकसित तथा विकासशील देश पहले से ही सफ़लता पूर्वक कर रहे हैं। दुसरे, अब तो सरकार ने इन नकदी रहित व्यवहारों पर विविध छूटों की घोषणा भी कर दी है जिनके तहत अब आप पेट्रोल पंप से 0.75%, रेल यात्रा पर 0.5%(10 लाख तक मुफ्त बीमा के साथ), रेल भोजन व अन्य सुविधाओं पर 10%, राष्ट्रीय राजमार्ग टोल पर 10%, बीमा भुगतानों पर 10% तक छूटों के साथ अनेक डिजिटल भुगतान जिन पर अभी तक व्यवहार शुक्ल (ट्रांजेक्शन टेक्स) लगा करते थे, में भी छूट की घोषणा की है. साथ ही देशवासियों (खासकर विद्यार्थियों/युवकों) से लेस कैस सोसाइटी बनाने हेतुwww.mhrd.gov.in/visaka पर उपलब्ध प्रजेंटेशन को पढ़ समझ समझा कर कम से कम 10 परिवारों को डिजिटल बनाने का आह्वान भी किया है.

कैसे करें बिना नकदी के भुगतान:

  इलैक्ट्रौनिक बटुआ(ई-वॉलेट) व बैंकिंग ऐप:

1-     अपने मोबाइल के प्ले-स्टोर से कोई भी इलैक्ट्रौनिक बटुआ(ई-वॉलेट) या बैंकिंग ऐप डाउनलोड कर इंस्टॉल करें।

2-     यदि ई-वॉलेट है तो उसमें अपने बैंक खाते से अपनी भुगतान जरूरतों का अनुमान कर कुछ पैसे स्थानांतरित (ट्रांस्फ़र) करें। और यदि बैंकिंग ऐप है तो उसे अपने सेविंग या चालू खाते से लिंक करें।

3-     बस अब क्या बचा? अब तो वॉलेट को क्लिक करो, जिस व्यक्ति को आपने भुगतान करना है ई-वॉलेट के द्वारा तो उसका मोबाइल नम्बर डालो, पैसे भरो और कन्फ़र्म करो। लो, एक संदेश आपके पास कि आपके खाते से पैसे निकल गए और दूसरा संदेश भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति के मोबाइल में कि उसके वॉलेट में उतने ही पैसे जमा हो गए, स्वत: ही पहुंच गया। वह भी बिना किसी चार्ज के।

4-     इसमें आपके वॉलेट से किए गए ट्रान्ज़ैक्शन पर अनेक प्रकार के केशबैक/फ़्री तथा अन्य सुविधाएं भी समय-समय पर मिलती रहती हैं।

5-     यही काम यदि बैंकिंग ऐप से करना हो तो आपको जिस व्यक्ति को भुगतान करना है, उसके बैंक खाते का नम्बर व आइएफ़एससी कोड सिर्फ़ एक बार लेकर उसे अपने ऐप में सुरक्षित(सेव) करना होता है। बस फ़िर क्या है ऐप में जाओ, व्यक्ति का नाम चुनो, जितना भुगतान करना है, पैसे भरो और कन्फ़र्मेशन को क्लिक करो। बस उसी तरह दोनों को सन्देश गया और भुगतान हो गया।

6-     भुगतान का तीसरा और अपेक्षाकृत पुराना तरीका है ‘प्लास्टिक मनी’, यानि, डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड के माध्यम से भुगतान। इस तकनीक में भुगतान करने वाले के पास प्लास्टिक का कोई डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड तथा प्राप्तकर्ता के पास कार्ड स्वैपिंग मशीन होना अनिवार्य है। डेबिट कार्ड तो हर बैंक अपने ग्राहक को खाता खोलते ही सबसे पहले दे ही देता है किन्तु क्रेडिट कार्ड अलग से बैंक में आवेदन करना पडता है। दुकानदार या प्राप्त कर्ता को मशीन तो लगभग 500 रुपए मासिक भुगतान पर अनेक बैंकिंग से जुडी संस्थाएं आसानी से दे देतीं हैं किन्तु ये कम्पनियां प्रत्येक ऐसे व्यवहार पर एक से दो प्रतिशत तक कमीशन काट कर दुकानदार या प्राप्तकर्ता के खाते में पैसा जमा करते हैं। भुगतान करने वाले को प्रत्येक आर्थिक लेनदेन के समय अपना कार्ड और उसका गोपनीय पासवर्ड याद रखना अनिवार्य है। कार्ड नम्बर व कोई भी पासवर्ड किसी के साथ कभी साझा नहीं करना चाहिए, वह चाहे कोई भी हो क्यों न हो।

ई-वॉलेट : पेटीएम, मोबीक्विक, फ़्रीचार्ज, औक्सीजन, ओलामनी, जीओमनी,                   एयर्टेल मनी, एम पैसा, पौकेट्स आदि

बेंकिंग एप : यूपीआई, एसबीआईबडी, पेजेप, चिलर इत्यादि,

 

ई शोपिंग : किसी भी प्रकार का घरेलू या व्यावसायिक सामान खरीदने हेतु ई-शोपिंग        यानि इंटरनेट के माध्यम से‘आदेश(आर्डर) व भुगतान(पेमेन्ट) एक साथ’ या‘भुगतान माल की प्राप्ति पर’, दोंनों विधियों का प्रयोग कर सकते हैं। इस प्रकार   के व्यवहार में अनेक प्रकार की छूट तथा सामान आपके घर पर आने पर भी यदि     पसंद न आये तो वापसी तक की सुविधा कई विक्रेता कम्पनियां देती हैं। इस हेतु     बिग बास्केट, ग़्राफ़र्स, नेचर बास्केट, जैसे ओनलाइन किराने तथा फ़ल-सब्जी के   स्टोर,अपोलो फ़ार्मेसी, मेडीलाइफ़, एम केमिस्ट, मेडीडार्ट, मेडीस्टार, नेट्मेड, बुकमेड, 1एमजी     जैसी अनेक ओन लाइन मेडीकल स्टोर के साथ साथ वेजीकार्ट, बिग बाजार, रिलाइंस   फ़्रेश, इजीडे, हाइपर्सिटी जैसे अनेक औफ़लाइन सुपर स्टोर व उनकी चैन उपलब्ध हैं।      यहां आप आसानी से किसी भी तरह से भुगतान कर सकते हैं।

सुविधा बिल पे : यह सुविधा अपने डेबिट या क्रेडिट कार्ड से जोड कर लगभग हर बैंक देता है जिसके माध्यम से हम हर रेग्यूलर मासिक, तिमाही, छमाही या वार्षिक विलों का भुगतान आसानी से कर सकते हैं। जैसे पानी, बिजली, टेलीफ़ोन, मोबाइल, बीमा, प्रोपर्टी टेक्स इत्यादि को बैंक कार्ड से मात्र एक वार लिंक कराकर जीवन भर उसके देरी से भुगतान या किसी भी प्रकार की भूल से होने वाली लेट फ़ीस से बच सकते हैं. खाते में भुगतान हेतु अपेक्षित राशि की समय पर व्यवस्था करना आपकी।

फ़ण्ड ट्रान्सफ़र : भुगतान के उपरोक्त साधनों के अलावा हम परम्परागत चेक पेमेन्ट, आरटीजीएस, एनईएफ़टी, फ़ंड ट्रान्सफ़र, आइएमपीएस इत्यादि साधनों का प्रयोग भी आज पहले से अधिक आसानी से किया जा सकता है। भुगतान में चेक देने से पूर्व उसे दो समानान्तर लाइनों द्वारा एकाउण्ट पेयी करना न भूलें जिससे पैसा सही खाते में जमा होना सुनिश्चित हो सके। आरटीजीएस, एनईएफ़टी तथा आइएमपीएस व्यवहार करते समय प्राप्तकर्ता के खाते का नाम, खाता संख्या, बैंक का नाम, उसका पता तथा आईएफ़एससी कोड भरते समय पूरी सावधानी बरतें जिससे पैसा समय पर सही खाते में पहुंच सके।

उपरोक्त सुविधाओं का लाभ उठाने हेतु एक स्मार्ट फ़ोन (जो लगभग दो हजार तक में आ जाता है) के साथ इन्टरनेट सुविधा(जो 500 रुपए मासिक में उपलब्ध है) की आवश्यकता है। हालांकि कुछ सुविधाएं इनके विना भी प्राप्त की जा सकती हैं।

आर्थिक व्यवहारों में नकदी का प्रयोग जितना कम होगा, काले धन का बाजार उतना ही मंदा होगा. आवश्यकता है बस एक छोटी सी सुविधा, सावधानी, संकल्प तथा मन के संयोजन की। फ़िर देखो भारत को पुन: विश्व गुरू बनने से कौन रोक सकता है।

One Response to “#नोटबंदी से भ्रष्टाचार मुक्त डिजिटल भारत की ओर”

  1. Himwant

    जो windfall gain की उम्मीद की जा रही थी, प्रचारित किया जा रहा था, उस पर मुझे शुरू से शंका था. बैंक मैनेजर, रेलवे कैशियर एवं पेट्रोल पंपो ने इस कदम की हवा निकालने में कोई कसर बांकी नही छोड़ा. अब सरकार को जनवरी के पहले हफ्ते में इस सवाल का सामना करना पड़ेगा की आखिर नोटबन्दी का औचित्य क्या था.

    कैश लेस से क्या लाभ होगा, जो टैक्स सिस्टम बहुत जटिल है सो और भी जटिल हो जाएगी. आज जो देश में काला धन है उसका एक बड़ा हिस्सा जटिल टैक्स प्रणाली की ही तो उपज है.

    नोट बन्दी का बड़ा लाभ मिल सकता था यदि लोग अपनी अघोषित आय को इस वर्ष का आय के रूप में दिखा कर टैक्स भरते. लेकिन आनन फानन में आयकर कानून में संसोधन कर इस पर ब्रेक लगा दिया गया है. यह ठीक नही है.

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