लेखक परिचय

मृत्युंजय दीक्षित

मृत्युंजय दीक्षित

स्वतंत्र लेखक व् टिप्पणीकार लखनऊ,उप्र

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mangoमृत्युंजय दीक्षित

 

ऋतुओं के देश भारत की विशेषता है कि यहां पर हर ऋतु के अनुकूल फल प्रकृति उपलब्ध कराती है। गर्मी में आवश्यकता के अनुरूप रसीले फलों की प्रचुरता रहती है।इन्हीं रसीले फलों के बीच सजता है फलों का राजा रसीला आम। आम “आम” और ”खास“ सभी का फल है।

आम का वैज्ञानिक नाम मैंजीफेरा इण्डिका एल है। आम की गणना भारत के प्राचीनतम फलों में की जाती है। इस बात का पर्याप्त प्रमाण मिलता है कि आम के विषय में लोगों को छः हजार वर्ष से इसकी उपजाई जाने वाली प्रजातियों के विषय में जानकारी थी।

भारत में आम का महत्व केवल एक स्वादिष्ट एवं स्वास्थ्यवर्धक फल के रूप में ही नहीं किया जाता अपितु प्राचीनकाल से ही आम का वृक्ष भारतीय संस्कृति, धर्म,सौन्दर्य, शैक्षिक एवं आर्थिक जीवन से जुड़ा रहा है। धार्मिक ग्रंथों में आम ब्रहम का रूपांतर माना जाता है। आम की पत्तियां धार्मिक कामों,पुण्य और सरस्वती एवं शिव की पूजा अर्चना और सूखी टहनियां हवन की पवित्र अग्नि को प्रज्जवलित करने के लिए प्रयोग में लायी जाती हैं।वाल्मीकि रामायण, रामचरित मानस,महाकवि कालिदास द्वारा विरचितमेघदूत आदि अनेक धार्मिक ग्रंथो में कई स्थानों पर इसका उल्लेख मिलता है।आम के प्रदत्त महत्व का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्राचीन कलात्मक कृतियों अजंता- एलोरा की गुफाओं औरबौद्धस्तम्भों में चित्रकारी में महत्व दिया गया है।

मध्यकालीन युग में भी आम की लोकप्रियता का उल्लेख मिलता है। मुगल बादशाह अकबर ने बिहार के दरभंगा में आम का एक बाग लगवाया था जिसमें एक लाख वृक्ष लगाये गये थे। वह एक लाख बागा के नाम से अभी भी जाना जाता है। आइने अकबरी नामक ग्रंथ में आम की किस्मों तथा उनके गुणों का विस्तृत वर्णन मिलता है।

आम की खेती लगभग पूरे भारत में की जाती है।उत्तर प्रदेश आम का सर्वाधिक उत्पादक प्रान्त है। भारत में सभी फलों के अन्तर्गत क्षेत्रफल का लगभग ४२ प्रतिषत योगदान आम का ही है ।उप्र का मलिहाबाद क्षेत्र आम के लिए विख्यात है। यहां से आम विदेशों के लिए भेजे जाते हैं । यह आम अमेरिका से दुबई तक जाते हैं। भारत में आम की लगभग एक हजार से भी अधिक किस्में उपजाई जाती हैं। परन्तु उप्र मेंं वर्तमान में उपजाई जाने वाली कुछ मुख्य किस्में बम्बई, लंगड़ा, गौरजीत,ब्राइड ऑफ राशा,दशहरी, सफेदा, लखनऊ सफेदा, सफेदा जौहरी(मलिहाबाद),हुस्न आरा रातौल(मध्यऋतु ) , समर बहिष्त, चौसा फजरी, तैमूरिया सहित कई प्रकार की किस्में हैं। आम की फसल में बनारसी लंगड़े की कहानी तो कुछ और ही है।

आम स्वादिष्टहोंने के साथ- साथ पौष्टिक गुणो से भी भरपूर होता है। कच्चे आम में विटामिन- सी का बाहुल्य होता है तथा पके फल में विटामिन ए प्रचुर मात्रा में होता है। आम केल्सियम,फास्फोरस,लोहा, खनिज लवणोंका एक अच्छा स्रोत है।

फल प्रसंस्करण द्वारा कच्चे तथा पक्के दोनों ही आमों को फसल के बाद खाने के लिए संरक्षित किया जाता है। कच्चे आम को सुखाकर आमचूर, पना, खटाई, अचार, मुरब्बा आदि बनाया जाता है । कच्चे आम की फांकों को नमक की सहायता से संरक्षित करके न केवल देश में प्रयोग किया जाता है वरन् विदेशों तक को निर्यात किया जाता है।

पके फलों को खने के अलावा डिब्बों में फांकों व गूदों के रूप में कैंनिंग करके जूस, नेक्टर, स्कवैश, जैम, चटनी, अमावट, सिरका, वाइन आदि बनाने में किया जाता है। आम का फल स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद माना गया है।उप्र के आम की लोकप्रियता को देखते हुए गोमती नगर स्थित पर्यटन भवन में दो दिवसीय आम की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी में आम की लगभग ५०० किसमों का प्रदर्शन किया गया। उक्त आम प्रदर्शनी को लेकर केवल आम उत्पादकों में ही गजब का उत्साह नहीं देखा गया अपितु जनसामान्य में भी आमों के प्रति जानकारी पाने की उत्सुकता थी। गर्मियों में आम का ही भोजन और नाश्ता तक किया जाता है। मेहमानों को मैगोंजूस पिलाकर उन्हें तरोताजा किया जाता है । लखनऊ की मलिहाबाद पट्टी का आम विदेशों तक में जा रहा है। आज रूस और चीन तक आम जा रहा है।

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