अब बढ़ाना होगा टेस्टिंग का दायरा

(लिमटी खरे)

देश में कोरोना कोविड 19 वायरस के संक्रमित मरीजों का आंकड़ा बढ़ रहा है, पर यह आंकड़ा बहुत ज्यादा तेज गति से नहीं बढ़ रहा है। दुनिया भर में कोविड 19 से संक्रमित लोगों का आंकड़ा दस लाख के पार चला गया है। लगभग 53 हजार से ज्यादा लोग दम भी तोड़ चुके हैं।

दुनिया के चौधरी माने जाने वाले अमेरिका में दो लाख से ज्यादा लोग इसके संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं, यहां पांच हजार से ज्यादा लोगों की मौत भी हो चुकी है। जर्मनी, इटली में हालात बहुत खराब हैं। इटली की ही अगर बात की जाए तो वहां लगभग सवा लाख मामले सामने आए हैं जिसमें चौदह हजार से ज्यादा लोग काल कलवित हो चुके हैं।

भारत के लोग जिस तरह से सोशल डिस्टेंसिंग अर्थात सामाजिक दूरी का पालन कर रहे हैं उसके कारण यहां स्थितियां काफी हद तक नियंत्रण में मानी जा सकती हैं। भारत सीमित साधनों के साथ इस जंग को जिस तरह से लड़ रहा है उसकी तारीफ विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा भी की गई है।

डब्लूएचओ के एक प्रतिनिधि डॉ. डेविड नवारो ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा लॉक डाऊन की घोषणा को सही समय पर उठाया गया कदम निरूपित किया है। उनका कहना यह था कि ज्यादातर यूरोपीय देशों में सरकारों के द्वारा इससे निपटने सोशल डिस्टेंसिंग के मामले में टालमटोल की जाती रही। भारत के द्वारा समय रहते ही इस कदम को उठा लिया गया जो राहत की बात है।

यह समय मिलकर लड़ने का है। सभी को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन पूरी ईमानदारी से करने की जरूरत है। टोटल लॉक डाऊन पर सियासत बंद होना चाहिए। प्रधानमंत्री के खिलाफ अगर सियासी दलों को कुछ कहना है, सरकार के द्वारा पहले कर लिया जाता, पहले उपाय क्यों नहीं किए गए, जैसे जुमलों के लिए यह माकूल वक्त नहीं है। अभी तो जो हो रहा है उसका सभी समर्थन और सम्मान करें, यह आज की जरूरत है।

इस पूरे मामले में एक बात जरूरी उभरकर सामने आ रही है, वह यह कि लॉक डाऊन से इस वायरस के संक्रमण के फैलने की रफ्तार तो घटा दी गई है पर अभी जंग समाप्त नहीं हुई है। इसके लिए अभी अन्य तरीकों पर विचार करने और उन्हें अपनाने की महती जरूरत है।

इस मामले में हमें जर्मनी की राह पकड़ना होगा, जहां सिर्फ कोरोना के लक्षण वाले मरीजों का ही परीक्षण किया जा रहा है। भारत में टेस्टिंग किट पर्याप्त मात्रा में शायद नहीं है। इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करना होगा। अभी जितने लोगों के टेस्ट हुए हैं, पर पर्याप्त नहीं माना जा सकता है। इसकी गति बढ़ाना होगा, ताकि संक्रमित मरीज को अन्य लोगों के संपर्क में आने से रोका जा सके।

इस बीमारी के संक्रमण से यह बात साफ हो गई है कि केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय कितना जरूरी होता है। राज्यों में पैदल चलकर आने वाले मजदूरों एवं अन्य लोगों पर नजर रखने की महती जरूरत है। जैसे ही कोई जिले की सीमा में प्रवेश करे उसे वहीं की किसी शाला को क्वारंटाईन सेंटर बनाकर रखा जाए। इसके बाद जब वह निर्धारित अवधि पूरी कर ले तो ही उसे उसके गंतव्य तक भेजने की व्यवस्था की जाए।

आप अपने घरों में रहें, घरों से बाहर न निकलें, सोशल डिस्टेंसिंग अर्थात सामाजिक दूरी को बरकरार रखें, शासन, प्रशासन के द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का कड़ाई से पालन करते हुए घर पर ही रहें।

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