ओ मां! भारत मां!

ओ मां! मेरी मां! भारत मां!
तेरी कोख को ना भूल पाऊंगा,
तेरी गर्भ में जन्म ले आऊंगा,
ओ मां! मेरी मां! भारत मां!

कभी बेटा बनकर तन जाऊंगा,
कभी बेटी बन-ठनकर आऊंगा,
कभी बनूंगा तेरा पहरेदार!
ओ मां! मेरी मां! भारत मां!

कभी तुम्हारी धानी चुनरिया,
कभी तिरंगा बन लहराऊंगा,
कभी सीमा की कटीली झार!
ओ मां! मेरी मां! भारत मां!

कभी अमुवां डाल की कोयल,
कभी फसल खेत की बनकर,
हर जनम में मैं आऊंगा!
ओ मां! मेरी मां! भारत मां!

अंततः चिता की क्षार बनकर,
तेरी गंगा में मिल जाऊंगा!
फिर भी क्या मुक्ति पाऊंगा?
ओ मां! मेरी मां! भारत मां!
—विनय कुमार विनायक

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