More
    Homeसाहित्‍यकविताबुढ़ापे का दर्द

    बुढ़ापे का दर्द


    आज अपने ही घर से,बे घर हो गए।
    जो कभी अपने थे,वे पराए हो गए।।

    अपना घर होते हुए,वृद्धाश्रम चले गए।
    कोई नही पूछता,वे वृद्ध कहां चले गए।।

    जो जिगर के टुकड़े थे,वे दुश्मन हो गए।
    पता नही वे आज ऐसे क्यों हो गए।।

    हम मजबूत थे,आज मजबूर हो गए।
    कभी असरदार थे,आज बेअसर हो गए।।

    सुनता नही कोई हमारी सब बहरे हो गए।
    जुबान होते हुए हमारे,पर हम गूंगे हो गए।।

    हवा ऐसी कौन सी चली,सब बेदर्द हो गए।
    जिनके हम हमदर्द थे,आज वे बेदर्द हो गए।।

    ये सबकी बीती नही,अपनी बीती लिख गए।
    भावना में बहकर,रस्तोगी सच्चाई लिख गए।।

    आर के रस्तोगी

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    * Copy This Password *

    * Type Or Paste Password Here *

    12,299 Spam Comments Blocked so far by Spam Free Wordpress

    Captcha verification failed!
    CAPTCHA user score failed. Please contact us!

    Must Read