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    Homeसाहित्‍यकविताआप तो गुलाब है,कभी बबूल न बनिए।

    आप तो गुलाब है,कभी बबूल न बनिए।

    आप तो गुलाब है,कभी बबूल न बनिए।
    दुनिया में आप,कभी बे असूल न बनिए।।

    अच्छा रास्ता,सभी को दिखाओ तुम।
    किसी के रास्ते का,तुम सूल न बनिए।।

    निमटा लो हर बात को ,तुम ख़ुद ही।
    किसी बात के लिए,तुम तूल न बनिए।।

    रक्खे याद तुम्हे,ये दुनिया अब सारी।
    किसी के लिए भी,तुम भूल न बनिए।।

    रोको किसी को मत,जो कही भी जा रहे।
    करो उनकी मदद तुम,उनकी धूल न बनिए।।

    कांटो के साथ कांटे बनो,उन्हे उखड़ दो।
    रस्तोगी कहता है,उनके लिए फूल न बनिए।।

    आर के रस्तोगी

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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