इस्लाम मजहब का उद्भव

—विनय कुमार विनायक
ईस्वी सन् पाँच सौ सत्तर में जन्मे
इस्लाम के जन्मदाता,
हजरत मुहम्मद नाम उनका
घर अरब का मक्का!

उनकी जाति कुरैशी थी अशिक्षित,
अंधविश्वासी, मूर्ति पूजक कबिलाई
काबा के चौकोर प्रस्तर पूजन में
निहित थी उनकी भलाई!

हज़रत मुहम्मद थे एक युग द्रष्टा,
अपनी जाति-धर्म का सुधारकर्ता!

उन्होंने ‘ला इलाह इल्लल्लाह’
‘एको ब्रह्म दूजा नास्ति’ जैसा
एक ईश्वर के सिवा कोई नहीं दूजा कहकर
प्रतिबंधित किया बहुदेव-प्रकृति-मूर्ति पूजा!

क्षुब्ध हुए मक्का वासी हजरत मुहम्मद को
मिली गृह छोड़ने की सजा
सोलह जुलाई छः सौ बाईस ईस्वी में
हजरत मुहम्मद ने हिजरत यानि प्रस्थान किया
मक्का छोड़ मदीना में शरण लिया!

पैगम्बर थे क्रांतिवादी सिद्ध किया
उन्होंने अपनी सुधारवादी नीति
उम्र में बड़ी विधवा महिला से करके शादी!

हज़रत मुहम्मद अशिक्षित किन्तु ध्यानी थे
उन्हें ध्यान के दौरान देवदूत जेब्रील से मिला
ईश्वरीय ज्ञान का पता, कहलाने लगे तबसे
अल्लाह के प्रतिनिधि नबी रसूल अलबत्ता!

अल्लाह के रसूल/पैगम्बर/नबी ने बताया
इस्लाम के पाँच उसूल-
पहला; एक अल्लाह के सिवा कोई नहीं दूजा
और वे हजरत मुहम्मद अल्लाह के पैगम्बर!
(ला इलाह इल्लअल्लाह मुहम्मद उर रसूल अल्लाह)

दूसरा; मुस्लिम समाज पढ़ें नमाज रोज पाँच प्रहर!
तीसरा; निर्धन को जकात दो,चौथा; रमजान में रखो रोजा
पांचवां; हज करने जाओ वहाँ जहाँ पैगम्बर का घर!

इस्लाम का ताना बाना पारसी, यहूदी, बौद्ध,
हिन्दू,ईसाई दर्शन से मिलकर बना
और हज़रत मुहम्मद बने अंतिम पैगम्बर
उनके पूर्व अन्यान्य परम्परा वश बहुत हुए पैगम्बर
जिन्हें मुस्लिम करते पैगम्बर सा आदर!

इस्लाम के पूर्व सूत्र सूफी मत में प्रसिद्ध है
एक कहावत- ‘सूफी मत का आदम में बीज वपन,
नूह में अंकुर, इब्राहीम में कली, यहूदी मूसा में विकास,
मसीह (ईसाई धर्म प्रवर्तक) में परिपाक तथा
हजरत मुहम्मद(इस्लाम प्रवर्तक) में मधुर फलागम’

अरब के शामी जाति का सूफीमत यहूदी,
ईसाई, बौद्ध, सनातन धर्म से चलकर
परम्परागत नव इस्लाम की बनी विरासत
इसलिए वैचारिक अंतर के बावजूद
मुसलमान करते यहूदी पैगंबरों के आदर!

ईसा को ईश्वर पुत्र नहीं मानकर भी
ईसाई विश्वास-‘मृत्यु के बाद जीवन’
तथा ‘कयामत के दिन’ की बात
मुस्लिम करते तहेदिल से स्वीकार!

इस्लाम धर्मग्रंथ कुरान में संकलित
ईश्वर प्रेरित जेब्रील प्रदत्त
हज़रत मुहम्मद की बात
हदीस में पैगम्बर मुहम्मद के उपदेश
और सुन्नत में उनकी जीवन चर्या
जीवन पर्यंत सारी वाक्यात!

धर्म और मजहब सारे के सारे है अच्छे सभी,
सभी धर्म प्रवर्तक हैं ईश्वर के प्रतिनिधि नबी,
आत्मा ही क्रमशः महात्मा परमात्मा बन जाती,
देहधारी आत्मा परमात्मा में विकसित हो सकती!

हजरत मुहम्मद के पूर्ववर्ती नूह यानि मनु,
अब्राहम यानि ब्रह्म,राम, कृष्ण,बुद्ध,जिन,
मूसा,ईसा सबके सब प्रतिनिधि हैं ईश्वर के ही!

यहूदी यानि यदुदी प्राचीन चन्द्रकुल के
यदुवंशी क्षत्रिय हैं यहूदी धर्मावलंबी जाति,
सनातन धर्म से ही हुआ यहूदी धर्म विकसित!

यहूदी धर्म से ईसाई, इस्लाम का हुआ प्रवर्तन,
यहूदी, ईसाई, इस्लाम के मूल पुरुष हैं अब्राहम,
अब्राहम हीं हैं हिन्दू धर्म का सृष्टि कर्ता ब्रह्मा
कोई धर्म प्रवर्तक एक दूसरे के होते नहीं विरोधी,
सब हैं पूर्वापर सम्बन्धी मनु पुत्र मानव जाति!

हर धर्म के अनुयाई हैं आपस में भाई-भाई,
हर धर्म के अनुयाई बीच नहीं है कोई खाई,
मानव मात्र सभी एक है, नहीं कोई रुसवाई!

हमें ग्रहण करना चाहिए हर धर्म की अच्छाई,
कोई धर्म ऐसा नही जिसमें निहित नहीं सच्चाई,
सर्व धर्म को मानने में निहित मानव की भलाई!
—विनय कुमार विनायक

1 thought on “इस्लाम मजहब का उद्भव

  1. “हमें ग्रहण करना चाहिए हर धर्म की अच्छाई,
    कोई धर्म ऐसा नही जिसमें निहित नहीं सच्चाई,
    सर्व धर्म को मानने में निहित मानव की भलाई!”
    बहुत सुन्दर!

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