प परम पिता परमेश्वर से प्रेरित

—विनय कुमार विनायक
प परम पिता परमेश्वर से प्रेरित,
प्राणियों के लिए प्रांजल अक्षर है!

प पिता,प्रपिता,पूर्वज परम्परा से,
पुत्र,पुत्री,पौत्र, प्रपौत्र का सफर है!

प पुनीत,पवित्र, प्रेम,प्रीति प्रखर,
परमात्मा से प्रस्फुटित प्यार है!

प पद, पैसा, प्रतिष्ठा प्राप्त कर,
प्रशंसा पाने से पाप का प्रचार है!

प से पति-पत्नी के मिलने पर,
परमेश्वर की सृष्टि का प्रसार है!

प से पाप, पुण्य के मिलने पर,
प्राणियों के कर्म का पारावार है!

प से प्रकृति, प्रवृत्ति मिले अगर,
पति-पत्नी में प्यार ही प्यार है!

प से प्राणी पुण्यात्मा बन कर,
प्रकृति से प्रेम करे वो ईश्वर है!

प ही परमपिता परमेश्वर होकर,
प्राणियों के पुण्य का विस्तार है!

प पवित्र प्रभाव में प्रवृत होकर,
प्राणी ज्ञानी होने का व्यापार है!

परम प्रज्ञावान प से बने अक्षर,
प अक्षर परमात्मा की पुकार है!
—विनय कुमार विनायक

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