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    Homeसाहित्‍यकविताप परम पिता परमेश्वर से प्रेरित

    प परम पिता परमेश्वर से प्रेरित

    —विनय कुमार विनायक
    प परम पिता परमेश्वर से प्रेरित,
    प्राणियों के लिए प्रांजल अक्षर है!

    प पिता,प्रपिता,पूर्वज परम्परा से,
    पुत्र,पुत्री,पौत्र, प्रपौत्र का सफर है!

    प पुनीत,पवित्र, प्रेम,प्रीति प्रखर,
    परमात्मा से प्रस्फुटित प्यार है!

    प पद, पैसा, प्रतिष्ठा प्राप्त कर,
    प्रशंसा पाने से पाप का प्रचार है!

    प से पति-पत्नी के मिलने पर,
    परमेश्वर की सृष्टि का प्रसार है!

    प से पाप, पुण्य के मिलने पर,
    प्राणियों के कर्म का पारावार है!

    प से प्रकृति, प्रवृत्ति मिले अगर,
    पति-पत्नी में प्यार ही प्यार है!

    प से प्राणी पुण्यात्मा बन कर,
    प्रकृति से प्रेम करे वो ईश्वर है!

    प ही परमपिता परमेश्वर होकर,
    प्राणियों के पुण्य का विस्तार है!

    प पवित्र प्रभाव में प्रवृत होकर,
    प्राणी ज्ञानी होने का व्यापार है!

    परम प्रज्ञावान प से बने अक्षर,
    प अक्षर परमात्मा की पुकार है!
    —विनय कुमार विनायक

    विनय कुमार'विनायक'
    विनय कुमार'विनायक'
    बी. एस्सी. (जीव विज्ञान),एम.ए.(हिन्दी), केन्द्रीय अनुवाद ब्युरो से प्रशिक्षित अनुवादक, हिन्दी में व्याख्याता पात्रता प्रमाण पत्र प्राप्त, पत्र-पत्रिकाओं में कविता लेखन, मिथकीय सांस्कृतिक साहित्य में विशेष रुचि।

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