पाकिस्तान की “जनरल रानी”

अनिल अनूप

पाकिस्तान ने आजादी के बाद से ही दूसरे देशों पर निर्भर होना शुरू कर दिया था शायद इसीलिये वो अब तक भी अपने बलबूते पर खड़ा नहीं हो सका है. पाकिस्तान में हमेशा से ही नेतृत्व की कमी रही जिसके चलते वहां फौजी शासन भी लगा. फौजी शासन का दौर ही पाकिस्तान के लिये सबसे बुरा दौर था. उस दौर में पाकिस्तान में भ्रष्टाचार ने अपने कदम जमाये, सत्ता में काबिज़ लोगों ने निरंकुशता अपनाई जिसके चलते पूरा देश कई बार मार्शल लॉ में जीता था. इस दौर में एक महिला तेजी से उभरी जो ‘जनरल रानी’ के उपनाम से मशहूर हुई. इस महिला का नाम था अकलीम अख्तर.
जनरल रानी पाकिस्तान की उस दौर की सबसे शक्तिशाली महिला थी. वो एक वेश्यालय की मालकिन और फौजी जनरल तानाशाह याहया खान की बेहद करीबी दोस्त थी.उस दौर में उसे पाकिस्तान की सबसे पावरफुल महिला कहा जाता था. अकलीम का जन्म 1931 में पंजाब प्रांत के गुजरात में हुआ था. उसे जनरल याहया खान की रखैल कहा जाता था. वो याहया खान, पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो और मुस्तफा खार के लिये लड़कियों की डांस पार्टी का इंतजाम करती थी. ये भी कहा जाता है कि वो इनको लडकियां भी सप्लाय करती थी. आज हम आपको जनरल रानी की पूरी कहानी बताएंगे.अपने एक इंटरव्यू में जो कि उसने 2001 में दिया था में बताया कि अपने पति को कद्दावर लोगों के साथ देखकर उसे कुछ-कुछ होता था. वो खुद भी अच्छी पोजीशन पर जाना चाहती थी. लेकिन उसकी चाहत ऐसे पूरी नहीं हो सकती थी. अकलीम बचपन से ही दबंग किस्म की लड़की थी उसे मर्दजात की जूती बनना कभी पसंद नहीं था.
एक रोज़ अपने पति के साथ घूमने गयी अकलीम ने पति के नाराज़ होने के बाद बाजार में अपना बुर्का उतार फेंका. इसके बाद दोनों के बीच कभी सुलह नहीं हो पायी और कानूनी कारवाई के बाद दोनों ने तलाक़ ले लिया. इसके बाद उसकी मुलाक़ात याहया खान से हुई और दोनों के बीच रिश्ता बनने लगा.इसके बाद उसने पावरफुल लोगों से संबंध बनाने शुरू किये. वो रोज़ कराची, लाहौर और रावलपिंडी के नाइट क्लब जाती. वो ऐसे लोगों को लडकियां सप्लाय करने लगी जो अपनी बीवियों से तंग आ गये थे. वो ऐसे लोगों के लिए डांस पार्टी रखती और सुन्दर लड़कियों को चुनती जो पैसे की तंगी झेल रही हों.इसके बाद वह वेश्यावृत्ति के धंधे में उतर गई. वह सारा कामकाज रावलपिंडी के घर से देखती थी. वह अपने पति से सरकार में होने वाले कामकाज के बारे सुन चुकी थी. इस सबके बावजूद उसने महिला के तौर पर अपना आत्मसम्मान बनाए रखा. जनरल याहया खान से उसकी पहली मुलाकात खैरियां में पार्टी के दौरान हुई. उन्होंने बताया कि याहया खान से मिलने पर उन्होंने गुजरात आने का न्यौता दिया. बस यहीं से याहया और उनके बीच एक जादुई सा रिश्ता बन गया. दोनों के बीच गहरे रिश्ते होने के कारण लोग अकलीम को उनकी रखैल कहने लगे थे. इस नजदीकी के लिए उसे जनरल रानी के नाम से पुकारा जाने लगा.इसके बाद याहया खान ने पाकिस्तानी सरकार का तख्ता पलट दिया और मार्शल लॉ (1969-1971) लगा दिया. इसी दौर में जनरल रानी पाकिस्तान की सबसे ताकतवर महिला बन गयी. उसका दखल सरकार के कामकाज में भी था. अकलीम ने बताया कि याहया की सबसे बड़ी कमजोरी शराब, लड़कियां और वो खुद थी.याहया नूरजहां का दीवाना था. एक बार जनरल ने उनके बर्थडे पर सिंगर लाने की फरमाइश कर दी. तब जनरल रानी के कहने पर नूरजहां ने पार्टी में गाना गया और डांस भी किया. भले नूरजहां याहया के साथ रिश्ते से इनकार करें, लेकिन अकलीम जानती थी कि उनके रिश्ते किस तरह के थे.जनरल रानी ने पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो और मुस्तफा खार के बारे में भी चौंकाने वाले खुलासे किये. उन्होंने बताया था कि दोनों नेता उनके सामने भीख मांगते थे कि वे याहया खान से उनकी मुलाकात करवा दें. अकलीम कहती थीं कि जितनी पार्टीयां उन्होंने भुट्टो और खार के लिए दी थीं उतनी शायद जनरल याहया के लिए भी न दी हों. जुल्फिकार बेनजीर भुट्टो के पिता थे, जबकि पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार मुस्तफा खार की भतीजी हैं.1971 में चुनाव होने के बाद भुट्टो सत्ता में आए. उसके बाद जनरल रानी के दिन बदल गए. भुट्टो ने रानी को घर में ही नजरबंद करवा दिया. उनके सारे फोन कनेक्शन कटवा दिये गए. 1977 में जिया उल हक के तख्ता पलटने के बाद उन्हें आजाद कराया गया. लेकिन तब तक वह अपनी सारी जायदाद और रुतबा खो चुकी थी. कभी एक इशारे पर ट्रांसफर रुकवाने वाली, प्रमोशन करवाने वाली महिला के आखिरी दिन बड़ी ही मुफलिसी में बीते. 2002 में 70 साल की उम्र में ब्रेस्ट कैंसर से उनकी लाहौर में मौत हो गई.

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