पाकिस्तान का अमानवीय पक्ष

-अनिल अनूप

पुलवामा में सुरक्षा बलों पर हुए आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तान ने एक सोची-समझी नीति के तहत जो बयान दिया है वह पाकिस्तान की मैं न मानूं वाली नीति को तो जगजाहिर करता ही है साथ में उसके अमानवीय पक्ष को भी दर्शाता है।पुलवामा में सुरक्षा बलों पर आतंकी हमले की जिम्मेदारी लेने वाले संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सरगना पाकिस्तान में पाक सेना व सरकार का संरक्षण लेकर बैठा है, इसके बावजूद पाकिस्तान सबूत मांग रहा है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने राष्ट्र के नाम संदेश में भारत से कहा है कि यदि आपके पास ऐसी कोई खुफिया जानकारी है, जिसके आधार पर कार्रवाई की जा सकती है, तो वह हमें दीजिए। हम कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा हम यह बात समझते हैं कि भारत में इस साल चुनाव होने हैं और पाकिस्तान को दोषी ठहराकर लोगों के वोट हासिल करना आसान हो जाएगा। वहीं, बातचीत पर जोर देते हुए इमरान ने कहा, अफगानिस्तान मामले की तरह कश्मीर मामला भी वार्ता के जरिए सुलझेगा। बदले की कार्रवाई को लेकर आगाह करते हुए इमरान ने कहा, यदि भारत सोचता है कि वह पाकिस्तान पर हमला करेगा, तो हम केवल सोचेंगे नहीं, बल्कि जवाब देंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जंग शुरू करना तो इंसान के हाथ में है, खत्म करना इंसान के हाथ में नहीं। भारत के आरोपों पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा, क्या कोई मूर्ख होगा जो सऊदी युवराज जैसे महत्वपूर्ण व्यक्ति की यात्रा के समय इस तरह का विध्वंसक कृत्य करेगा। कश्मीर मामले पर इमरान ने कहा, कश्मीरी अब मौत से नहीं डरते। इसके पीछे कोई तो कारण होगा। क्या भारत में इस पर चर्चा नहीं होनी चाहिए? दुनिया में कौन सा कानून हर किसी को जज और जूरी बनने की इजाजत देता है? क्या भारत सेना के जरिए मामला सुलझाना चाहता है? इससे कभी सफलता नहीं मिली है।

इमरान द्वारा दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कै. अमरेन्द्र सिंह ने कहा क्या पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यह चाहते हैं कि भारत सैनिकों की लाशें वहां भेजे? उन्होंने कहा मसूद अ•ाहर पाकिस्तान में बैठा है और वहां से ही अपनी नापाक हरकतों को अंजाम देता है। हर कोई यह बात जानता है। पाकिस्तानी पीएम अपने सेना प्रमुख जनरल बाजवा से मिलकर भारतीय सैनिकों और मासूम लोगों की हत्याएं करवा रहा है। कैप्टन ने कहा हमने 26/11 के हमले के सबूत दिए, पाकिस्तान ने कुछ नहीं किया। राजासांसी में ग्रेनेड हमले में पाकिस्तान का हाथ सामने आया, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

भारत के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा पुलवामा कांड से संबंधित बयान को गुमराह करने वाला बताया। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा आतंकी हमले से अपना कोई संबंध नहीं होने की बात कहना पाकिस्तान का पुराना बहाना रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने जैश-ए-मोहम्मद और उस आतंकवादी के दावे को नजरअंदाज कर दिया जिसने इस जघन्य कृत्य को अंजाम दिया। यह स्थापित तथ्य है कि जैश-ए-मोहम्मद और उसका सरगना पाकिस्तान में है तथा उस पर कार्रवाई करने के लिए पाकिस्तान के पास पर्याप्त साक्ष्य हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम पाकिस्तान से मांग करते हैं कि वह अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करना बंद करे। विदेश मंत्रालय ने कहा यह व्यर्थ का बहाना है कि यदि भारत सबूत देगा, तो पाकिस्तान कार्रवाई करेगा। 26/11 आतंकी हमले में भी पाकिस्तान को सबूत सौंपे गए थे। पठानकोट वायुसेना अड्डे पर आतंकी हमले में भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। विदेश मंत्रालय ने कहा पाकिस्तान के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए कार्रवाई करने की गारंटी का उसका वादा खोखला है। मंत्रालय ने कहा कि ‘नये पाकिस्तान’ में वर्तमान सरकार के मंत्री हाफिज सईद जैसे आतंकवादियों के साथ मंच साझा करते हैं। इमरान खान की वार्ता की पेशकश पर मंत्रालय ने यह कहते हुए जवाब दिया कि भारत ने बार-बार कहा है कि वह आतंकवाद और हिंसा से मुक्त माहौल में समग्र द्विपक्षीय वार्ता को तैयार है। विदेश मंत्रालय ने कहा पाकिस्तान खुद को आतंकवाद से पीडि़त होने का दावा करता है, जो सच्चाई से कोसों दूर है।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि पाकिस्तान एक बार फिर अतीत की तरह अपने पाप को छिपाने का ही प्रयास कर रहा है। जिस तरह अतीत में पाकिस्तान की कही बात को किसी ने नहीं स्वीकार किया था। इस बार भी विश्व स्तर पर इमरान खान द्वारा कही बातों को विश्व गंभीरता से नहीं ले रहा। भारत के समर्थन में आ रहे देशों तथा उन द्वारा आतंकवाद विरुद्ध पारित प्रस्तावों से पाकिस्तान पर दबाव बढ़ गया है, इसलिए स्थिति को अपने हाथों से जाते देख वह संयुक्त राष्ट्र के द्वार गया है।

भारत ने न तो अतीत में अंतरराष्ट्रीय मान-मर्यादाओं की उल्लंघना की है और न ही अब करने जा रहा है। लेकिन अपनी सुरक्षा हेतु जो उसे करना चाहिए वह कर रहा है। भारत पाकिस्तान से राजनीतिक, आर्थिक, सैन्य दृष्टि से कहीं आगे निकल चुका है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशेष पहचान बनाने में भी सफल रहा है। पाकिस्तान भारत के बढ़ते कदमों और मजबूत होती स्थिति को देख नहीं पा रहा और इसी कारण भारत के विरोध में कुछ न कुछ करता आ रहा है।

भारत पाकिस्तान की हताश और निराशा को समझता रहा है और आज भी समझ रहा है, इसलिए वह परिपक्वता दिखाते हुए आतंकी घटनाओं को लेकर पाकिस्तान पर सैन्य बल का प्रयोग नहीं करने की नीति पर चला आ रहा है। लेकिन पुलवामा कांड को लेकर देश में जो आक्रोश देखने को मिला उसको देखते हुए निकट भविष्य में पाक को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए भारत तैयार है। पाकिस्तान वर्तमान तनाव को कम करना चाहता है तो उसे आतंकी संगठनों व आतंकी सरगनाओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। पाक अगर आतंकियों विरुद्ध ठोस कार्रवाई अब भी नहीं करता तो पाकिस्तान निकट भविष्य में एक असफल व आतंकी देश के रूप में ही विश्व स्तर पर पहचाना जाएगा।

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