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    Homeसाहित्‍यकवितापरशुराम के वंशज हैं

    परशुराम के वंशज हैं

    हम भगवान परशुराम के वंशज हैं,
    जप तप पूजा पाठ करना जानते हैं,
    सनतान धर्म व संस्कृति की रक्षा के लिए,
    दुश्मनों को युद्ध में परास्त करना जानते हैं।

    हिम्मत व हौसले के दम पर युद्ध में हम,
    विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी,
    मानव व मानवता की रक्षा की खातिर,
    अद्वितीय वीरता से लड़ना जानते हैं।

    अन्याय होता है जब किसी पर भी,
    हम चुपचाप बैठकर तमाशबीन बनकर,
    मजबूरी का तमाशा देखने की जगह,
    उसके हक की लड़ाई को लड़ना जानते हैं।

    देश में न्याय का राज स्थापित करने के लिए,
    हम अपराधियों से लड़ना जानते हैं,
    सत्य की रक्षा के लिए हम त्यागी,
    दुनिया में किसी से भी भिड़ना जानते हैं।

    मेहनत करके शान से खाते हैं दो रोटी हम,
    देश का नव निर्माण व विकास के लिए,
    बिना रात दिन देखें करते हैं हम त्यागी,
    पूरी ईमानदारी से दिन-रात एक करके काम।

    भगवान परशुराम के दिखाएं मार्ग पर चलकर,
    शस्त्र व शास्त्रों की शिक्षा के साथ साथ,
    देश का नाम कैसे दुनिया में रोशन हो,
    उस पर अमल करना है हम त्यागियों का काम।

    कोई लाख बुरा चाहे ए दुनिया वालों हमारा,
    हम भगवान परशुराम के वंशज चिंता करते नहीं,
    बिना शोर मचाएं व दिखावे के बिना,
    हम सफलता पर लिखते हैं त्यागियों का नाम।

    रग-रग में कूट-कूट कर भरी हुई है,
    देशभक्ति हमारे लहू में ए दुनिया वालों,
    देश व समाज हित करने की यह शक्ति देते हैं,
    हमारे आराध्य सर्वशक्तिमान भगवान परशुराम।

    देश के अलग-अलग प्रांतों में रहते हैं,
    हम त्यागी लगाकर अलग-अलग उपनाम,
    देश समाज धर्म संस्कृति के हित के मार्ग पर चलकर,
    भगवान परशुराम के वंशज करते हैं दुनिया में नाम।

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