‘तोता-रटंत’ राहुल के निरर्थक बोल

-पवन कुमार अरविंद

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी ने देशभक्त संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना प्रतिबंधित और कुख्यात आतंकी संगठन सिमी से करके अपने नासमझी और अपरिपक्वता का ठोस परिचय दिया है। अभी तक उनकी नासमझी व अपरिपक्वता को लेकर देश की जनता में कुछ संदेह था, लेकिन श्री गांधी ने इस प्रकार का बयान देकर उस संदेह को भी दूर कर दिया है।

हालांकि, 40 वर्षीय श्री गांधी ऐसा बचकाना बयान देंगे, यह किसी ने भी नहीं सोचा था। इसलिए उनका बयान हैरत में डालने वाला है। वह देश के लिए एक महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। केवल सांसद हैं इसलिए नहीं, बल्कि इसलिए भी, क्योंकि वह ऐसे खानदान का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसने पंडित नेहरू सहित इस देश को तीन-तीन प्रधानमंत्री दिए हैं। इसलिए राहुल महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। संसदीय लोकतंत्र में ऐसे बयान को किसी भी सूरत में मर्यादापूर्ण नहीं कहा जा सकता है। यह हर स्थिति में लोकतंत्र की गरिमा को तार-तार करने वाला है।

अब प्रश्न यह उठता है कि जो व्यक्ति आतंकी संगठन और सामाजिक संगठन में अंतर न समझ पाता हो, उस व्यक्ति को भविष्य में यदि कभी देश का नेतृत्व करने का मौका मिले, तो वह देश की बागडोर ठीक से संभाल सकेगा, इस बारे में लोगों को सदैव संदेह बना रहेगा। ध्यातव्य है कि राहुल ने मध्य प्रदेश के त्रि-दिवसीय प्रवास के दौरान कहा था कि कांग्रेस के कार्यकर्ता सिमी और आरएसएस से दूर रहें, क्योंकि ये दोनों संगठन कट्टरवाद के समर्थक हैं और दोनों की विचारधार में कोई खास फर्क नहीं है।

राहुल ने टिप्पणी तो कर दी लेकिन उनको शायद ही आरएसएस का इतिहास पता हो। वह आरएसएस के संस्थापक का ही ठीक से पूरा नाम नहीं बता सकते। हालांकि, वह आरएसएस को कितना जानते हैं यह बताने के लिए उनका बयान ही काफी है। राहुल के इस प्रकार के ऊल-जुलूल बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि उनको इस देश के इतिहास-भूगोल की भी कोई जानकारी नहीं है। राहुल की विशेषता अब केवल स्वर्गीय श्री राजीव गांधी का बेटा होना भर ही रह गया है।

राहुल को यह जानना चाहिए कि सिमी पर भाजपा नीत राजग सरकार ने प्रतिबंध लगाया था। उसके बाद उनकी कांग्रेस नीत यूपीए सरकार ने उस प्रतिबंध को आगे बढ़ा दिया। क्योंकि वह खूंखार आतंकी संगठन है और देश में हुए कई आतंकी विस्फोटों में उसका हाथ है। सिमी पर अमेरिका ने भी प्रतिबंध लगा रखा है। राहुल की नजर में आरएसएस यदि सिमी जैसा संगठन है तो उनको अपनी कांग्रेस नीत यूपीए सरकार से उस पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहना चाहिए। यदि आरएसएस सचमुच में सिमी के समान है, तो उनकी सरकार ने आरएसएस पर बिना प्रतिबंध लगाए क्यों छोड़ रखा है, यह सोचने वाली बात है ?

दरअसल, राहुल को स्वयं नहीं पता होता है कि वह क्या बोल रहे हैं। वह हमेशा लिखा हुआ भाषण पढ़ते हैं और भाषण में जो कुछ भी लिखा होता है, उसी को वह पढ़ डालते हैं।

हालांकि, राहुल गांधी के बयान से आरएसएस की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ने वाला। हां, इतना अवश्य है कि राहुल ऐसा बोलकर स्वयं ‘हल्के’ पड़ गए हैं। क्योंकि इस देश की जनता किसी भी राजनेता या श्रेष्ठ व्यक्तित्व से सदैव मर्यादित व संयमित व्यवहार तथा भाषा की अपेक्षा करती है।

कहा जाता है कि आदमी का बड़प्पन जीवन के किसी भी स्थिति, परिस्थित और मनःस्थिति में धैर्य व धीरज बनाए रखते हुए मर्यादापूर्ण आचरण व व्यवहार करने में होता है। लेकिन सामान्य स्थितियों में ही धैर्य खोकर विक्षिप्तावस्था में आ जाना और ऊल-जुलूल बातें करना, यह मनुष्य के व्यक्तित्व के एक वास्तविक पहलू को ही दर्शाता है। ऐसे व्यक्ति से देश के लिए और देशहित में किसी बड़े काम की उम्मीद नहीं की जा सकती।

2 thoughts on “‘तोता-रटंत’ राहुल के निरर्थक बोल

  1. दुबे जी आप चिंतित न हो जिसको कांग्रेस का जरा भी मोह होगो वह निहायत दर्जे का दरबारी और चापलूस होगा ऐसे लोग आर.एस.एस. में एक मिनट नहीं रह सकते क्योकि यहाँ कमी कुर्सी के लिए अपनी इज्जत मर्यादा और स्वाभिमान वालो को लिया ही नहीं जाता और नाही वे मॉल बनाने वाले इधर रुख करते है.उनका वैसे ही कांग्रेस स्वाभाविक स्थान है.जो जनता देख भी रही है कि महँ त्यागिनी संयासिनिक अपने बेवकूफ लडके को प्रधानमंत्री बनवाने के लिए किसी स्तर तक जा सकती है यहाँ तक कि देश की संप्रभुता और सुराचा की किम अत पर भी ऐसी स्वार्थी महिला को त्यागी वही कहेगा जो या तो परले दर्जे का मुर्ख होगा या इतनी हीन भावना से ग्रसित होगा कि आज भी अपने को विदेशियो का गुलाम समझाता होगा.रहा सवाल नुओजवानो का तो वह तो उनकी नाक के नीचे दिल्ली विश्व विद्यालय के चुनाव में दिखाई दिया जहा कांग्रेस अपने सालो के इतिहास के सबसे निचले पावदान पर पहुच गयी सभी देख रहे है कि राहुल की कृपा से जो युवक मंत्री बने है उनमे से ६ उसी पुब्लिक स्कूल के विद्यर्थी रहे है जहा के राहुल गाँधी.तो कृपया अपने पेट के दर्द का इलाज कराये बाकि देश के युवक बहुत समझदार है और उनका ८०% हिस्सा देहातो में रहता है जो उपेक्चा लाचारी और बेरोजगारी की मर झेल रहा है. जनता का और देश का नेत्रित्यव करने के लिए उसकी समस्यों,और देशी विदेशी नीतिओ की समझ और जनता के हर मोर्चे पर आगे आ करसमस्यों से मुठभेड़ करना चाहिए ऐसा सिनेमा में चल सकता है कि आज सम समस्या महगाई,भ्रष्टाचार,अलगाववाद ,चेत्रियता जैसे बम्बई में राज ठाकरे द्वारा पुर्वियो की पिटाई सब पर khamosi kyo? yah sawa arab के ardhshichit देश में नही चल सकता सुराचा ghera tod कर train में safar dalito के ghar bhajan kya जनता इतनी मुर्ख है कि ऐसे natak khub samajhati है.सिनेमा में ऐसे ही hota है.राहुल गाँधी भी salm an khan और shahrukha की tarah project कर रहे है.

  2. पवन जी ,

    कोई शह दे रहा हो तब उसकी चाल को नज़रंदाज़ करना मात को दावत देना कहलाता है .

    यह कोई बचकाना या फिर इतिहास से अनजान व्यक्ति का वक्तव्य नहीं था जनाब . राहुल गांधी का चेहरा देख कर निर्णय न लें.

    कांग्रेस को युवा कार्यकर्ताओं की सख्त जरूरत है . मध्य प्रदेश वह इसीलिये गए थे . इस बयान का उद्देश्य था कि युवा वर्ग यह समझे कि यदि उसने जोश में आकर जीवन में एक बार भी संघ या सिमी से जुड़ने की ‘गलती’ कर दी तो उसके लिए कांग्रेस के दरवाज़े हमेशा के लिए बंद हो जायेंगे . यानि कि ऐसे युवा को दल बदल का भी मौक़ा नहीं मिलेगा .

    अब समझिये कि इस बयान का क्या मतलब है ? इस बयान के बाद जो लोग अनिर्णय की स्थिति में हैं वह निर्णय स्थगित रखेंगें या फिर कांग्रेस में जायेंगे . इसलिए इस बयान की काट ढूँढिये . नाराजगी और निंदा से कोई लाभ नहीं है …

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