मुंशी प्रेमचंद की कहानियों में देशभक्ति

लेखक परिचय :- मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई सन 1880 को बनारस के निकट लमही नामक गाँव में हुआ था। इनका मूल नाम धनपत राय था। इनके पिता का नाम अजायबराय माता का नाम आनंदी देवी था। प्रेम चंद जब महज आठ वर्ष के थे। तभी उनकी माता का स्वर्गवास हो गया। तत्पश्चात उनके पिता ने पुनर्विवाह कर लिया। प्रेमचंद का जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा।तथा इन्हें आरंभिक समय में भी आर्थिक समस्यायों का सामना करना पड़ा।उर्दू तथा हिंदी दोनों भाषाओं पर इनका समान अधिकार था।सन् 1919 में इनकी सर्प्रथम प्रमुख हिंदी उपन्यास “सेवा सदन” प्रकाशित हुई।

मुंशी प्रेमचंद के प्रमुख उपन्यास निम्नलिखित है:-

  • निर्मला
  • गबन
  • गोदान
  • सोजे वतन
  • सेवासदन
  • रंगभूमि इत्यादि प्रमुख है।

मुंशी प्रेमचंद की  कुछ प्रमुख कहानियाँ इस प्रकार है:-

  • बेटी का धन
  • सज्जनता का दंड
  • बड़े भाई साहब
  • पंच परमेश्वर
  • दुनियां का सबसे अनमोल रतन इत्यादि प्रमुख है।

कफ़न तथा गोदान इनकी अंतिम कृतियाँ है। तथा “मंगलसूत्र” जो की अपूर्ण है।

8 अक्टूबर 1936 को मुंशी प्रेमचंद का निधन हो गया।

विषय परिचय:-  सोजे वतन मुंशी प्रेमचंद की कहानी संग्रह है। जो कि देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत है। इस कहानी संग्रह में मुंशी प्रेमचंद ने देशप्रेम का वर्णन किया है। मुंशी प्रेमचंद की कहानी संग्रह “सोजेवतन” जो कि 1908 में प्रकाशित हुई थी।यह वह दौर था,जब हमारे देश के वीर सिपाही देश को स्वतंत्रता प्राप्त दिलाने के लिए मैदान में आजादी की जंग लड़ रहे थे।स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जब हमारे देश के वीर सिपाही मैदान में अंग्रेजो से लोहा ले रहे थे।उस वक्त मुंशी प्रेमचंद बंद कमरे में बैठकर कलम को अपना हथियार बनाकर “सोजे वतन” की रचना की।जो की देशभक्ति की भावना से परिपूर्ण है। और यह कहानियां लोगो में देशभक्ति की भावना को उजागर करती है।तथा अपने देश के वीर सिपाहियों तथा देशभक्तों के बलिदान को दर्शाती है।

देशभक्ति से आपूरित पात्र:- मुंशी प्रेमचंद की कहानी संग्रह “ सोजे वतन” में कुल पांच कहानियां है। जो की देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत दिखाई पड़ती है।

“सोजे वतन” की प्रथम कहानी “ दुनियां का सबसे अनमोल रतन” में इस कहानी में वीर सिपाही के वीरता और जज़्बे को दिखाया गया है।जिसने अंतिम क्षण तक अपने वतन की रक्षा करने के लिए जंग के मैदान में दुश्मनों से युद्ध करता रहा। और जब उसे ऐसा प्रतीत हुआ कि अब वह अपने वतन की रक्षा नहीं कर पा रहे है।उसके शरीर पर काफी जख्म के निशान पड़ गए है।और वह अपने देश के लिए कुछ करने में असमर्थ हो गए है।तब इस दिलेर राजपूत ने भारत माता की जय कहकर उसी धरती पर अपने प्राणों का त्याग कर दिया।

ऐसे ही “ शेख मखमूर” कहानी में “मसऊद” एक ऐसा सिपाही है।जो कि बड़ी बहादुरी से अपने मुल्क को आजाद कराने के लिए अपनी ऐड़ी चोटी का जोर लगाया और अपने मुल्क को स्वतंत्रता दिलायी,तथा लोगो के लिए प्रेरणा के पात्र बन गए और इसके साथ साथ लोगों में देश भक्ति की भावना जाग उठी।

कहानी “ मेरा वतन” में एक विदेश से वापस आये हुए प्रवासी का अपने देश के प्रति प्रेम को दर्शाया गया है। वह अपनी पुरानी यादों को ताज़ा करते हुए अपने वतन के बारे में सोचने लगते है।इतने वर्षों विदेश में रहने के बावजूद इन्हें अपने देश से अत्यधिक लगाव होता है। इस कहानी से इस बात का साक्षात् प्रमाण मिलता है कि व्यक्ति चाहे कितने ही वर्ष विदेश में रहे,लेकिन जब वो अपने वतन लौटता है। तो उसका अपने देश के प्रति प्रेम ज्यो का त्यों ही होता है।

कहानी “ सांसारिक प्रेम और देश प्रेम” में मैजिनी एक सच्चा देश प्रेमी है।जो की अपने देश प्रेम के लिए अपने सांसारिक प्रेम का त्याग करता है।मैग्डलीन जो की अत्यंत रूपवती स्त्री है।जो की उसे अत्यधिक प्रेम करती है। मैग्डलीन को चाहने वाले बहुत होते है किंतु वह केवल मैजिनी से ही प्रेम करती है। वो किसी और के साथ अपने जीवन के सपने भी नहीं देख सकती है।वह मैजिनी का इंतज़ार करती है।जबकि मैजिनी उसके प्रेम को स्वीकारना नहीं चाहता है क्योंकि वो देशप्रेमी है और अपना जीवन देश को समर्पित करना चाहता है।

कहानी दुनियां का सबसे अनमोल रतन एक ऐसे आशिक़ की कहानी है।जो कि अपनी प्रेमिका का प्रेम पाने के लिए तड़प रहा होता है।दिलफ़िगार एक सच्चा प्रेमी है,वह दिलफरेब से सच्चा प्रेम करता है।परंतु दिलफरेब उससे कहती है कि अगर तुम मुझसे सच्चा प्रेम करते हो तो मुझे दुनियां की सबसे अनमोल चीज़ लाकर दो। तभी मैं तुम्हे अपने प्रेमी के रूप में स्वीकार करुँगी। दिलफ़िगार सबसे अनमोल चीज़ की तलाश में निकल पड़ता है। भटकते हुए वह काफी दूर चला जाता है। सहसा उसकी नज़र एक काले चोर पर पड़ती है।जिसको फांसी की सजा सुनाई गयी होती है।  काफी भारी भीड़ वहाँ पर मौजूद थीं, जो उस काले चोर को देख रही थी। तभी वह चोर फाँसी से उतरा और एक मासूम से लड़के को गले लगा लिया है। और वो काला चोर जिसने ना जाने कितनी लाशें देखीं थी। उसके आँखों से एक आंसू टपक पड़ा,दिलफ़िगार को लगा कि यही दुनियां की सबसे अनमोल चीज़ है।किंतु दिलफरेब ने इसको सबसे अनमोल चीज़ मानने से इनकार कर दिया। फिर जब वह दुबारा निकल पड़ता है,उसी अनमोल चीज़ को तलाशने में तो दिलफ़िगार देखता है। कि एक जीवित महिला चिता पर बैठी हुई है और उसकी गोंद में उसके  मृत पति का सिर रखा हुआ। और अपने पति के साथ वह भी उसी अग्नि में जलकर राख हो गयी।दिलफ़िगार को लगा कि इससे कीमती वस्तु और कुछ नहीं हो सकता। दो सच्चे प्रेमियों ने एक साथ अपने जीवन का त्याग किया। वह उस चिता की राख को लेकर दिलफरेब के पास जा पहुँचा।लेकिन फिर से दिलफरेब ने इसे दुनियां की सबसे अनमोल चीज़  मानने से इनकार कर दिया। दिलफ़िगार थक कर हार जाता है। और वह सोचता है कि अब अपने प्राण त्यागने के अलावा उसके पास और कोई दूसरा रास्ता नहीं है। वह एक पहाड़ पर कूदने के लिए चढ़ जा पहुँचा। तभी उसे एक बुजुर्ग व्यक्ति ने आकर कहा तू क्यूँ ये बुज़दिलों वाली हरकते कर रहा है।मर्द बन हिम्मत मत हार, तुम हिंदुस्तान जाओ। वही तुम्हारा कल्याण होगा।यह सुनकर दिलफ़िगार पहाड़ से उतरा और हिंदुस्तान की तरफ चल पड़ा। और जब दिलफ़िगार पाक की धरती पर पहुँचा। तब वह देखता है कि वहाँ पर कई लाशें पड़ी हुई है।सहसा उसकी नज़र एक सिपाही पर पड़ी जो अधमरा पड़ा था।उसके बदन से लहू बह रहा था।और जब दिलफ़िगार ने उसके रक्तस्त्राव को रोकने के लिए उसपर एक कपडे का टुकड़ा रख दिया तो उस सिपाही ने कहा कि मैं नहीं जीना चाहता हूँ। मेरे लहू का आखरी कतरा मेरे वतन के लिए है।और यही कहकर वह अपने प्राण त्याग देता है। दिलफ़िगार उसी रक्त को ले जाकर दिलफरेब के समक्ष प्रस्तुत कर कहता है कि यही सबसे अनमोल रतन है।एक देश देशभक्त के लहू का आखरी कतरा अपने मुल्क के लिए न्योछावर कर दिया।दिल फरेब खुश हुई और उसे अपने प्रेमी के रूप में स्वीकार कर लिया।

प्रेमचंद की कहानी “शेख मखमूर” में मसऊद एक वीर जांबाज सिपाही है।जो अपने मुल्क की रक्षा करने के लिए निरंतर प्रयास करता रहता है।मसऊद अपने पिता शाहे बामुराद से विरासत में मिली ताज को संजोये रखना चाहता है।यह वह मुल्क है,जिसपर शाह किश्वरकुशा की हुकूमत चल रही थी।जो कि उसने युद्ध में पराजित कर शाहे बामुरादे से छीन लिया था।अपनी मृत्यु से पहले शाहे बामुरादे अपने मुल्क का ये ताज अपने पुत्र मसऊद को देकर इस दुनियां से अलविदा कह जाते है।मसऊद बहुत ही वीर सिपाही होता है।जो कि एक शूरवीर की तरह मैदान में दुश्मनों से लोहा लेता है।जब मसऊद से उसे विरासत में मिली तलवार छीन ली जाती है।तब वह शेख मखमूर बनकर अपने दुश्मनों की खबर लेता है।तथा अवसर मिलने पर उनपर हमला कर देता है और उन्हें युद्ध में पराजित कर देता है।जिससे मसऊद अपने साम्राज्य को प्राप्त कर लेता है,तथा लोगो में उसकी जयजयकार होने लगती है।तथा मसऊद के द्वारा अपना साम्रज्य प्राप्त करते ही उनकी माँ रिन्दा स्वर्गसिधार लेती है।ऐसे प्रतीत होता है,मानो वे अपने पुत्र के सिर पर ताज देखने की अंतिम आरज़ू लिए जी रही थी।

कहानी “यही मेरा वतन है” में एक महाशय जो कि विदेश में निवास करने के लिए चले जाते है।किंतु जब वो लंबे अरसे के बाद वापस अपने वतन लौटकर आते है।तब उन्हें सब कुछ बदलाबदला नज़र आता है। वो अपने वतन को खोजते हुए यहाँघूमते है।और हर उस जगह पर जाते है। जहाँ से उनकी यादें जुडी होती है।तथा वहाँ जाकर वो अपनी यादों को ताज़ा करते है।और अपनी पुरानी दुनियां में खो जाते है।उन्हें अपनी ज़िन्दगी के सारे दृश्य एकएक करके उनके सामने आती रही और जैसे कुछ क्षणों बाद ओझल हो गयी।किंतु उन्हें यह अपना प्यारा भारत नहीं लगता,जब वे घुमते हुए जाते है और वो एक आदमी से कहते है कि मैं एक मुसाफिर हूँ और मुझे रहने के लिए स्थान चाहिए। वो शख्स उन्हें आगे जाने के लिए कहता है। ऐसे ही सभी लोग आगे बढ़ने की सलाह देते है।पाँचवा शख्स उनके हाथ में एक मुट्ठी चना थमा देता है। यह देखकर उनकी आँखों में अश्रु आ जाते है।वो कहते है कि यह मेरा भारत नहीं है जहाँ पर अतिथियों का आदर सत्कार किया जाता है। वे अपने वतन में ही अपनी आखिरी सांस लेना चाहते है। और अंत में वो गंगा के किनारे अपनी एल झोपडी बनाकर वही रहने लगते है।वो अपनी हड्डियां सिर्फ गंगाजी को समर्पित करना चाहते है।बच्चो और पत्नी के बारबार बुलाने पर भी दुबारा वे विदेश नहीं गए।

कहानी “सांसारिक प्रेम और देश प्रेम” में एक देशभक्त मैजिनी का उल्लेख किया गया है।जो की एक सच्चा देश प्रेमी होता है।और वो अपने देश के प्रति खुद को समर्पित कर देता है।मैग्डलीन जो की एक अत्यंत खूबसूरत महिला है।जो उससे सच्ची मोहब्बत करती है।लेकिन मैजिनी उसके प्रेम के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करता,वो चाहता है कि मैग्डलीन किसी और से विवाह करके उसके साथ अत्यंत सुखी होकर अपना जीवन व्यतीत करे।किंतु मैग्डलीन ठहरी सच्ची मोहब्बत करने वाली,मैजिनी के लाख मना करने के बावजूद मैजिनी के प्रति उसका प्रेम कम नहीं होता है।वह हमेशा उसे ऐसे ही प्यार करती।मैजिनी ने बहुत कोशिश की।ताकि मैग्डलीन के दिल में मैजिनी के लिए प्यार कम हो जाए।किंतु ऐसा संभव ना हो सका। मैग्डलीन के दिल में उसके लिए मोहब्बत और भी गहरी होती गयी।अंत में जब मैजिनी की मृत्यु हो गयी तब वह मैजिनी के नाम से आश्रम बनवाया और गरीबो की सेवा करने लगी।लगभग तीन वर्षों के बाद मैग्डलीन की भी मृत्यु हो गयी।मैजिनी ने देश प्रेम की खातिर अपनी मोहब्बत को स्वीकार नहीं किया।अपने देश प्रेम के लिए सांसारिक प्रेम का त्याग कर दिया।

      समकालीन परिस्थितियों में सोजे वतन का महत्व -: स्वतंत्रता आंदोलन के समय लोगों को इकठ्ठा करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य हुआ करता था। जरूरत थी लोगों में क्रांति लाने की। लोगों में देश प्रेम की भावना को जगाने की। मुन्शी प्रेमचंद की कहानियों में जो देशभक्ति की भावना दिखाई पड़ती है। वह उस समय लोगों में क्रांति लाने का कार्य किया। परिणाम स्वरूप लोग आजादी की लड़ाई में शामिल होने लगे। अपने मुल्क को आज़ाद कराने के लिए अपने तन मन से प्रयत्न करने लगे।  “सोजे वतन” ने ना जाने कितने लोगों में इस प्रकार की क्रांति लायी की लोग उनकी कहानियों को पढ़ने के पश्चात वे लोग प्रेरित हुये तथा अपने राष्ट्र को अंग्रेजो की गुलामी से मुक्त कराने के लिए जंग के मैदान में कूद पड़े। स्वतंत्रता पाने की होड़ में ना जाने हमारे देश ने कितने वीर जवानो को खोया। लेकिन इसी क्रांति ने, इसी जोश और जज़्बे ने हमारे राष्ट्र को अंग्रेजो की गुलामी से मुक्त करवाया। “सोजे वतन” की कहानियां जैसे “दुनिया का सबसे अनमोल रत्न”, मेरा वतन, शेख मखमूर, संसारिक प्रेम और देश प्रेम लोगों में राष्ट्रभक्ति की भावना को जगाती है। तथा उन्हें प्रेरित करती है कि वे अपने राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान दे।

 परिणाम-:”सोजे वतन” लोगों में जब क्रांति लाने लगी। लोगों ने अपने देश को अंग्रेजो की गुलामी से मुक्त कराने का निर्णय ले लिया और इसी जंग के मैदान में ना जाने कितने वीर सिपाहियों ने अपने प्राणों को देश के लिए न्यौछावर कर दिया। परिणामस्वरुप जब अंग्रेजो को इस बात का पता चला तो वे अत्यंत क्रोधित हुए तथा “सोजे वतन” की लगभग पाँच सौ प्रतियां जला दी गयी। और “सोजे वतन” कहानी संग्रह अंग्रेजो द्वारा ज़ब्त कर ली गयी। ताकि लोगों में राष्ट्र चेतना उत्पन्न ना हो। उन्हें अपनी राज गद्दी पर खतरा महसूस होने लगा। फलस्वरूप इस क्रांति को रोकने के लिए अंग्रेजो ने मुन्शी प्रेमचन्द की “सोजे वतन” को ज़ब्त कर लिया। उनकी प्रिंटिंग प्रेस पर रोक लगा दी गयी। लेकिन “सोजे वतन” अपना कार्य बखूबी कर चुकी थी। जिन लोगों में क्रांति आयी, उन लोगों ने देश के कोने-कोने तक लोगों में अपनी आजादी की लड़ाई की खबर पहुंचाई। लोगों को प्रेरित किया ताकि वे अपने राष्ट्र को गुलामी से मुक्त कराने के लिए एकत्रित हो। और मैदान में जंग लड़े। ताकि हमारे राष्ट्र को अंग्रेजो की गुलामी की जंजीरों से मुक्ति मिले। हमारे देश के लोग खुली हवा में साँस ले सके तथा स्वाधीनता से अपना जीवन यापन कर सके। अतः “सोजे वतन” ने स्वतंत्रता आंदोलन में लोगों में क्रांति लाने में अपनी अहम भूमिका निभाई।

-निष्कर्ष:-:”सोजे वतन” राष्ट्र प्रेम से ओत-प्रोत दिखाई पड़ती है। इसकी पांचो कहानियाँ पाठकों को विमुग्ध कर देती है।यदि कोई ऐसा व्यक्ति भी हो,जो देश के प्रति अपने दायित्व को नहीं समझता। और यदि ऐसा व्यक्ति “सोजे वतन” को पढ़ ले। तो बेशक वह अपने देश से अत्यंत प्रेम करने लगेगा तथा अपने राष्ट्र की रक्षा के लिए निरंतर प्रयत्न करेगा। “यही मेरा वतन है।” कहानी लोगों में देश प्रेम की भावना को उजागर करती है। व्यक्ति  चाहे कितने ही लंबे अर्सो से विदेश रहे।लेकिन जब वह लौटकर वतन आता है। तो उसे अपना राष्ट्र अति सुंदर लगता है उसे विदेश में रहने के बावजूद ने अपने मुल्क से वैसे ही प्रेम करता है। जैसे कि विदेश जाने से पूर्व किया करता है।

     मुंशी प्रेमचंद ने तलवार उठाने की बजाय अपनी कलम को उठाकर अंग्रेजो से लोहा लिया। उनकी राजगद्दी को हिला डाला। जिसके कारण अंग्रेजो को भारी नुकसान हुआ और परिणामस्वरुप हमारे राष्ट्र को अंग्रेजो की गुलामी से मुक्ति मिल गयी।

                                   संदर्भ ग्रन्थ:- सोजे वतन(प्रेमचन्द) प्रकाशन संस्थान नईदिल्ली

Leave a Reply

%d bloggers like this: