लेखक परिचय

अनुज अग्रवाल

अनुज अग्रवाल

लेखक वर्तमान में अध्ययन रत है और समाचार पत्रों में पत्र लेखन का शौक रखते हैं |

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pk लोग PK देख आये हैं | मल्टीप्लेक्स में 300 रुपये खर्च कर कह रहे हैं कि हाय रे आमिर ने महादेव का अपमान कर दिया | हिन्दू धर्म की ऐसे बुराई की वैसे बुराई की | हम एसी फिल्म का विरोध करते हैं | अरे भाई विरोध उसे कहते हैं जिसमे सामने वाले को भी पता चले कि हाँ उसका विरोध हो रहा है | फ़िल्म हिट करा के भी कभी विरोध दर्ज किया जाता है क्या ? ये तो उल्टा एसी फिल्म को बढ़ावा देना हुआ |

वैसे भी इससे पहले सत्यमेव जयते नहीं देखा था क्या ? सिर्फ और सिर्फ हिन्दू समाज की कुरीतियों को उजागर करना | समाज में व्याप्त कुरीतियों और अन्धविश्वास बहाने हिन्दू धर्म को कोसना | PK तो उसका अगला चरण मात्र है | अल्तकैया जोरों पर है | अब यदि सही तरीके से विरोध न किया गया तो ये हमेशा की तरह और जोर पकड़ेगा |

ऐसे कितने लोग हैं जिन्होंने मियां आमिर से पूछा कि साहब इमराना पर एपिसोड कब बनाओगे ? सर जी शाहबानो पर कब जुबान खोलोगे ? चार शादियाँ 20 बच्चो पर कब बोलोगे ? तलाक तलाक तलाक कह सधवा को जीते जी विधवा बनाने वाले शरिया पर कब बोलोगे ? औरत की इज्जत से खेलने वाले हलाला पर कब बोलोगे ? स्त्रियों के बराबरी के अधिकार बुर्के के अंधकार पर कब बोलोगे साहब ? कभी इन सब का नंबर भी आएगा क्या ?

 

अब चूंकि PK का विरोध हो रहा है तो कथित सेक्युलरिस्ट लोग भी सामने आने लगे हैं | वामपंथी भाई भी अपनी दुकाने सजाने लगे हैं | सभी लोगो को अचानक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की चिंता सताने लगी है | वही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जो तस्लीमा नसरीन की बात आने पर बंगाल के बाजार में सरेराह नीलाम होती है | वही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जो सलमान रुश्दी के कार्यक्रम पर हिन्द महासागर में डूब जाती है | वो तभी सामने आती है जब हिन्दू देवी- देवताओ के अश्लील चित्र बनाने पर पर विरोध प्रदर्शन होता है | जब वेंडी की बकवास पर कोर्ट से प्रतिबन्ध लगता है |

हमेशा याद रखो लोग हमेशा दूसरे के फटे में टांग अडाते हैं | कभी कोई अपना फटा पजामा नहीं निहारता | इसीलिए अब ये निश्चित कर लो कि आगामी पीढ़ी को भगवान् आशुतोष की कौन सी छवि से परिचित कराना चाहते हो ? वो तीसरे नेत्र वाली जो संसार की समस्त बुराइयों को भस्म करने की क्षमता रखती है या वो टॉयलेट में छिपने वाली जो मियां आमिर की फिल्म में हाल ही में गड़ी गयी है ? अगर त्रिनेत्र वाली छवि ही अक्षुण्ण रखना चाहते हो तो संगठित हो जाओ | एक होकर रहो | विरोध करने का सही तरीका सीखो | अन्यथा सिनेमा हॉल में बैठकर ताली बजाओ | और खुद के इतिहास बनने की प्रतीक्षा करो |

अनुज अग्रवाल

8 Responses to “PK का संदेश”

  1. shirish dave

    हिन्दु धर्म के सोफ्ट टार्जेट है. एक फैशन भी है कि हिन्दु प्रणालीयों पर प्रहार करो.

    शिवजी के पात्रको अपमानित करनेका जो प्रसंग है उसमें जो संदेश देना चाहते है वह क्या है?

    टोईलेटका सीन बतानेसे क्या ज्यादा सिद्ध हो सकता है.

    अगर एक व्यक्ति मुस्लिम है तो उसको समझना चहिये कि वह एक मुस्लिमको रेप्रेझेन्ट करता है. उसको अपने

    धर्मकी सहस्रोगुनी बुराईयोंको उजागर करनी चाहिये.

    अगर शिवके उपर लोग दूध चढाते है तो वे किसके पैसे से चढाते है?

    वह उसको एफोर्ड कर सकता है या नहीं?

    उसका कोई कंपल्झन होता है?

    उसकी कोई स्पर्धा होती है?

    अगर इससे दूधका व्यय होता है तो क्या गायको खानेसे क्या होता है? उससे दूधका व्यय कम होता है?

    कतल खानोंको जो रीयायत मिलती है, उससे किसका पैसा जाता है? और किसको फायदा होता है?

    ऐसे कई सारे प्रश्न उपस्थित होते है जो ज्यादा ही प्रभावकारी है.

    प्राथमिकताकी प्रज्ञा सेलीब्रीटी बननेसे नही आ जाती.

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  2. आर. सिंह

    आर. सिंह

    मेरे पूरे परिवार ने एक साथ पी.के देखा. पूरा परिवार यानि मैं,मेरी धर्मपत्नी,पुत्र। पुत्र बधु एवं सात वर्षीय पौत्र.. सभी को अपने अपने कारणों से फिल्म पसंद आई.किसी को ऐसा नहीं लगा कि फिल्म में जो दिखलाया गया है,वह अतिश्योक्ति है. सभी धर्मो के पाखंड पर कम या ज्यादा चोट किया गया है. क्या हिन्दू धर्म पर जो चोट की गयी है,वह गलत है?अगर गलत नहीं है ,तो इससे क्या अंतर पड़ता है कि चोट करने वाला कौन है? हम दूसरों को नीचा दिखाने का प्रयत्न करने के बदले अपने को सुधार क्यों नहीं लेते ?नए नए भगवानों के नित्य नए कारनामे सामने आ रहे हैं ,ऐसा क्यों है?
    अमीर खान अगर मुस्लिम नहीं होता ,तब भी क्या आपलोग यही कहते? रोग का इलाज कीजिये,सर्जन को फांसी देने की कोशिश मत कीजिए.

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    • अनुज अग्रवाल

      आदरणीय आर सिंह जी,
      मैंने अपने पुरे लेख में ये कहीं नहीं कहा है कि पाखण्ड का विरोध करना गलत है । लेकिन पाखण्ड के नाम पर जो हिन्दू धर्म को कोसने का कुत्सित प्रयास किया है उसका मैंने जरूर विरोध् किया है । समाज में व्याप्त बुराइयों के लिए धर्म जिम्मेवार नहीं है । पाखण्ड किसी धार्मिक किताब में नहीं लिखा है । ये वस्तुत: सामाजिक बुराइयां हैं जो समाज से आई हैं । हमें हर हाल में इनका विरोध करना चाहिए । पर इसके बहाने हिन्दू धर्म को कोसने के हर प्रयास का भी विरोध करना चाहिए |
      सादर _/\_

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      • आर. सिंह

        आर. सिंह

        इसी क्रम में डाक्टर मीणा का भी एक आलेख आया है,आपलोग उसे भी पढ़िए.

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      • Durga Shanker Nagda

        Priya Anuj ji: नमश्कार

        लोग धर्म को जानते ही कहाँ है। इन तथा कथित धर्मो को लेकर आपसी बेरभाव रखते हैं। Unity is not possible until all people think that they are humans first then anything else may that be Hindu Muslim Sikh, etc

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  3. Dr. Arvind Kumar Singh

    फिल्म ‘‘ पीके ’’ देखी। पंसद आयी। हिन्दु धर्म के अन्धविश्वासो पर करारी चोट है, व्यंग एवं मनोरंजन के माध्यम से। आशा है आने वाले वक्त में हिन्दु अन्धविश्वासो से भी अधिक जकडे हुये मुस्लीम अन्धविश्वासेा पर चोट करती हुयी आमिर की कोई अन्य फिल्म हमें देखने को मिलेगी। अगर ऐसा नही होगा तो हम मान लेगे मात्र पैसा कमाने के लिये एक कलाकार ने राग नम्बर डायल किया था। सच और कला के बीच यह एक बेईमान गठबन्धन था। चोट करनी है तो कबीर की तरह करो, जिसने हिन्दू मुसलमान पर बराबर की चोट की थी। ईश्वर के सन्दर्भ में यदि कुछ बताने का ठेका किसी अन्य के पास नही तो फिर आमिर के पास कैसे? यह स्व अनुभूति की चीज है। सारी जिन्दगी दूसरो को ढूढने वाला यदि नहीं ढूढ पाता हे तो सिर्फ अपने आप को। जिस दिन अपने को ढूढ लेगा उस दिन किसी और की आवश्यकता नहीं।
    आपका
    अरविन्द

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    • अनुज अग्रवाल

      आपने सही कहा है डॉ साहब । _/\_

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    • Durga Shanker Nagda

      Great, dear Arvind ji.

      जब हम अपने को जान लेते हैं तो ये सारे धर्म एक मानव धर्म ही हो जाता है।

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