लेखक परिचय

डॉ. कुलदीप चन्‍द अग्निहोत्री

डॉ. कुलदीप चन्‍द अग्निहोत्री

यायावर प्रकृति के डॉ. अग्निहोत्री अनेक देशों की यात्रा कर चुके हैं। उनकी लगभग 15 पुस्‍तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। पेशे से शिक्षक, कर्म से समाजसेवी और उपक्रम से पत्रकार अग्निहोत्रीजी हिमाचल प्रदेश विश्‍वविद्यालय में निदेशक भी रहे। आपातकाल में जेल में रहे। भारत-तिब्‍बत सहयोग मंच के राष्‍ट्रीय संयोजक के नाते तिब्‍बत समस्‍या का गंभीर अध्‍ययन। कुछ समय तक हिंदी दैनिक जनसत्‍ता से भी जुडे रहे। संप्रति देश की प्रसिद्ध संवाद समिति हिंदुस्‍थान समाचार से जुडे हुए हैं।

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इस्लाम_signराहुल गाँधी कांग्रेस के महासचिव हैं। लेकिन उनका यह परिचय अधूरा है। फिलहाल वे उस परिवार के एक मात्र पुरूष उत्तराधिकारी हैं जो इस देश की सत्ता के सूत्र संभाले हुए है। इसलिए उनकी प्रत्येक घोषणा को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। पिछले दिनों वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में गए थे। इस विश्वविद्यालय की महत्ता इसलिए भी बढ़ गई है कि सरकार इस को मॉडल मान कर इसकी शाखाएं देश भर में स्थापित कर रही है। और इस काम के लिए करोड़ों रूपये के बजट का हिसाब-किताब लगाया जा रहा है। देश के विभाजन में, उसके सैधान्तिक पक्ष को पुष्ट करने में, इस विश्वविद्यालय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राहुल गांधी इसी विश्वविद्यालय में मुसलमानों की नई पीढ़ी के साथ देश के भविष्य पर चिन्तन कर रहे थे। वहाँ उन्होंने यह घोषणा की कि इस देश का प्रधानमंत्री मुसलमान भी बन सकता है। उनकी यह घोषणा कांग्रेस के भविष्य की रणनीति का संकेत भी देती है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इससे पहले ही यह घोषणा कर चुके हैं कि इस देश के संसाधनों पर पहला हक मुसलमानों का है।

इससे पहले प्रधानमंत्री अफगानिस्तान में जाकर बाबर की कब्र पर सिजदा भी कर आये हैं। राहुल गांधी की यह घोषणा और मनमोहन सिंह का संसाधनों पर हक के बारे में बयान कांग्रेस की भविष्य की दिशा तय करने का संकेत देता है। अपनी इस योजना को सिरे चढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार ने दो आयोगों की नियुक्ति भी की थी। इनमें से एक था राजेन्द्र सच्चर आयोग और दूसरा था न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्रा आयोग। सच्चर आयोग ने अपने दिये हुए काम को बखूबी अंजाम दिया। उसने सिफारिशें की कि मुसलमानों को मजहब के आधार पर सरकारी नौकरियों में आरक्षण दिया जाना चाहिए। सच्चर तो अपनी सीमा से भी आगे निकल गये थे उन्होंने भारतीय सेना तक में मुसलमानों की गिनती प्रारम्भ कर दी थी और सेना से जवाब तलब करना शुरू कर दिया था, कि वहां कितने मुसलमान है? यह तो भला हो सेनाध्यक्षों का कि उन्होंने सच्चर को आगे बढ़ने से रोकते हुए कहा कि भारतीय सेना में भारतीय सैनिक हैं मुसलमान या किसी अन्य मजहब से उनकी पहचान नहीं होती। लेकिन सच्चर को तो सरकार ने भारतीय पहचान छोड़कर मुसलमान की मजहबी पहचान पुख्ता करने का काम दिया हुआ था।

उसके बाद इसी योजना को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने रंगनाथन मिश्रा आयोग की स्थापना की। कुछ लोगों को ऐसा लगता था कि अनुसूचित जाति के अधिकांश लोग मतांतरण के माध्यम से इसी लिए मुसलमान या इसाई नहीं बन पाते क्योंकि इस्लाम या चर्च की शरण में चले जाने के बाद उनको संविधान द्वारा मिला आरक्षण समाप्त हो जाता है। संविधान यह मान कर चलता है कि जाति प्रथा हिन्दू समाज का अंग है। इस्लाम अथवा इसाईयत में जाति विभाजन अथवा जाति प्रथा नहीं है। मतांतरण को प्रोत्साहित करने वाले मुल्ला अथवा पादरी भी अनुसूचित जाति के लोगों को यही कह कर आकर्षित करते हैं कि जब तक आप हिन्दू समाज में रहोगे तब तक जाति विभाजन से दबे रहोगे। इसलिए जाति से मुक्ति पाने के लिए इस्लाम अथवा चर्च की शरण में आ जाओ। अब मुल्लाओं और पादरियों को यह लगता है कि जब तक हिन्दू समाज में अनुसूचित जाति के लोगों को आरक्षण मिलता रहेगा तब तक वे मुसलमान या इसाई नहीं बनेंगे। इसलिए उन्होंने सरकार से प्रार्थना की कि मुसलमान अथवा इसाई बने मतांतरित लोगों को भी जाति के आधार पर आरक्षण दिया जाना चाहिए। परन्तु उनके दुर्भाग्य से न्यायपालिका ने उसमें अड़ंगा लगा दिया। उस अड़ंगे को दूर करने के लिए भारत सरकार ने रंगनाथमिश्रा आयोग की स्थापना की। इस आयोग ने अपने दिये हुए कार्य को पूरा करते हुए यह सिफारिश कर दी है कि मतांतरित लोगों को भी, जो मुसलमान अथवा इसाई हो गये हैं, जाति के आधार पर आरक्षण दिया जाना चाहिए। सरकार इस आयोग की सिफारिशों को भी लागू करने की दिशा में तत्पर दिखाई दे रही है। लेकिन इस देश को मुस्लिम बनाना या उसे मुसलमानों के हाथों सौंप देने का अभियान अनेक पक्षिय है। एक तरफ कानूनी और संवैधानिक दावपेच हैं तो दूसरी तरफ धरातल पर तेजी से हो रहा कार्य है।

लव-जेहाद उनमे से एक पक्ष है। केरल उच्च न्यायलय ने संकेत दिया है कि केरल में पिछले कुछ वर्षों में तीन हजार से लेकर चार हजार हिन्दू लड़कियों को प्रेम-जाल में फांस कर इस्लाम में मतांतरित किया गया है। लेकिन इस बड़े अभियान में यदि एक पक्ष लव-जिहाद है तो दूसरा पक्ष आतंकवाद है। इस्लामी आतंकवाद ने इस देश के अनेक हिस्सों में अपनी जड़े जमा ली हैं इसी के बलबूते उसने कश्मीर प्रांत से हिन्दुओं का सफाया कर दिया है। असम और बंगाल के अनेक जिले बंग्लादेशियों को अवैध गुसपैठ से मुस्लिम बहुल हो चुके हैं। न्यायपालिका की बार-बार की फटकार के बावजूद केन्द्र सरकार की रूची वोट बैंक को देखते हुए इन अवैध बंग्लादेशियों को भारत से निकालने की कम है उन्हें प्रश्रय देने की ज्यादा।

अब रही-सही कसर लिब्राहन आयोग ने पूरी कर दी है। श्री मनमोहन सिंह लिब्राहन ने अपनी रपट में मुस्लिम समाज को धिक्कारा है। कि जब विवादित ढांचे को गिराने की तैयारियां हो रही थी तो मुस्लिम समाज क्या कर रहा था? लिब्राहन का कहना है कि मुसलमानों के संगठनों ने अपने कर्तव्य को पूरा नहीं किया। लिब्राहन के इन निष्कर्शों का क्या छिपा हुआ अर्थ है? क्या वे मुस्लिम समाज को लड़ने के लिए ललकार रहे हैं? क्या यह एक नए गृह युद्व के संकेत हैं? विभाजन से पूर्व मुस्लिम लीग जो भूमिका निभा रही थी क्या उसी में फिर से उतर आने के लिए मुसलमानों को ललकारा जा रहा है? यह पश्न गहरी जांच-पड़ताल की आशा रखते हैं। राहुल गाँधी के मुस्लिम प्रधानमंत्री के बयान को इसी पृष्ठ भूमि में जांचना परखना होगा। 1947 से पूर्व मुहम्मद अली जिन्ना और ब्रिटिश सरकार एक स्वर में कह रही थी कि भारत वर्ष में मुसलमानों के साथ अन्याय हो रहा है। जिन्ना ने प्रतिकार रूप में उसका रास्ता अलग देश के रूप में चुना। दुर्भाग्य से 21 वीं शताब्दी में भी कांग्रेस सरकार और अलगाववादी मुस्लिम संगठन वही भाषा बोल रहे हैं। क्या यह एक नये विभाजन की तैयारी है या फिर इस देश को ही मुस्लिम देश बनाने की एक और साजिश?

23 Responses to “भारत को मुस्लिम देश बनाने की तैयारी / डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री”

  1. Sandeep K. Upadhyay

    अगर ये राजनेता युही अपनी राजनैतिक रोटी सकने के लिए, हिंदुवो को उपेक्षित करते रहे तो , भविष्य में इस देश को खंडित होने से कोई नहीं बचा सकता, इसके पहले भारत का टुकडा जिन्ना के कारन हुआ था, और अब दूसरा टुकड़ा, सत्ता के लोलुप नेताओ के कारन होगा, जो जाती-पाती का सहारा लेकर हमेशा इसी जुगत में रहते है की किसी भी तरह कुर्शी बनी रहे, ये एक गन्दी मानसिकता का परिचय है जिसमे पुरे देश के अखंडता पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है.

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  2. Balveer Sahu

    जातिवाद तो कब का ख़त्म हो गया है. आज उसकी आड़ को ले के उसे हिन्दुओं को कब तक बदनाम करोगे. जाती व्यवस्था बहुत सोचसमझ कर निर्मित की गयी थी. ताकि समाज मैं अव्यवस्था न फैले, लेकिन मुस्लिमो और ईसाईयों ने इसी का फायेदा उठाया. और आदिवासी एवं दलितों का धर्मांतरण करके उनको मुस्लिम बनाया आज दलितों को बराबर का हक़ है.वो अब सम्मानित जीवन जी रहे हैं, अब दलितों को धर्मान्तरण नहीं कर पा रहे तो लड़कियों को प्यार मैं फसा कर धर्म परिवर्तन कर रहे हैं ..ये ही सबसे ज्यादा चिंता की बात है. हमें अपने समाजों की बैठकों मैं इस बात पर गंभीर चिंतन की जरूरत है. ऐसे परिवारों को सहयोग करें जिनके घर मैं कई बच्चियां हैं ताकि उनको कोई उनकी मजबूरी का फायेदा उठाकर प्यार के जाल मैं फासकर धर्म परिवर्तन न करा सके. अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहित करें, ताकि जिन समाजों मैं लड़के लड़कियों के चयन का क्षेत्र बढ सके. हमें बहुत सोच समझकर धर्मातरण वाले मुद्दे को जड़ से ख़त्म करने का प्रयास करने मैं जुट जाना चाहिए आज से ही. दृढ निश्चय करें की पैसा कमाने के अलावा हर दिन २ घंटे धार्मिक कामों मैं खर्च करेंगे तो ही समाज की रक्षा हो पायेगी.

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  3. अहतशाम त्यागी

    क्यू नहीं बनना चाहिए भारत मुस्लिम देश?
    हिंदुस्तान किसी के बाप की जागीर नहीं है
    और हाँ में आपको बताता चलूँ मेरा नाम “अहतशाम त्यागी है” (यानी conwartid मुस्लिम )
    हाँ कुछ नालायक लोग हिंदुस्तान को सिर्फ हिन्दुओं की संपत्ति समझते हैं लेकिन क्या वो बता सकते हैं भारत के लिए उन्होंने क्या किया?
    ऐसे ही जालिम लोगों की वजह से हिंदुस्तान का बंटवारा हुआ और आज भी ऐसे ही कमज़र्फ लोगों की घटिया हरकतों को वजह से हिंदुस्तान अपनी हालत पर आंसू बहा रहा है
    में पूछना चाहूँगा उन देश के गद्दारों से जो हिंदुस्तान में रहकर उसे अपनी संपत्ति समझकर उसे दीमक की तरह खोकला कर रहे हैं की वो हिंदुस्तान को कहाँ से लाये थे जो हिंदुस्तान उनका है
    हिंदुस्तान हर उस आदमी का है जो हिंदुस्तान में पैदा हुआ
    और हाँ कुलदीप जी आपने सब लिखा मगर अफ़सोस ——- मगर मेल गाव के हिन्दू आतंकवादियों का जिक्र आपने नहीं क्या? तरस आता है आपकी हालत पर!

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  4. Jeet Bhargava

    साहेब, बनाने नहीं जा रहा है बल्कि इस्लामी देश बन चुका है. और इसका सारा श्रेय वोट बैंक के लालची कोग्रेस्सियो, कम्युनिस्टो, मायावतियों, मुलायामो, पास्वानो और शरद पंवारो को जाता है. सेकुलरवाद की अफीम खाकर सोये मूर्ख हिन्दुओं के लिए तो दुनिया में अब बस एक ही जगह बची है-हिंद महासागर.

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  5. padu

    ऐसे लोगो को तो टट्टी खिला देनी चाहिए

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  6. ANAND

    अगर देखें तो ये पता चल जाता है की दुनियामे जितने ही कट्टर धर्मांध देश है वो देश धर्मके लिए कट्टरता न अपनाने वाले देश से
    पिछड़े हुए और हर मामले में पीछे है ! कट्टरता के साथ वहां गरीबी ,गंदगी , बेरोजगारी , मारकाट , जरुरतसे ज्यादा आबादी
    पाएंगे ! आधुनिक दुनियासे हटने के वजह और बेबुनियादी बातों पर अंध विश्वास की वजह उनका पिछड़ापन बरक़रार है !
    ये लोग धर्मके आगे नहीं सोचते ! लोगोंको रोजगार , बच्चोंको आधुनिक शिक्षा का आभाव , लोगोंको पेटभर खाना नहीं मिल रहा
    लेकिन धर्मके ठेकेदारोंको इस बातोंसे कोई लेना देना नहीं होता ! सिर्फ धर्मकी अंधी सोच , और अंधे कानून लोगोंपर थोपकर अनपढ़ के
    साथ कुछ पढ़े लिखे भी इस दलदल में फंसे हुए है ! ये बातें सभी धर्मपर लागु है ! गाँव -खेड़े में अभीतक जाती-धर्म के ढोल बजते है
    निचली जाती के लोगोंको मारा जाता है ,कुचला जाता है ! नीच जाती वाले उच्च जाती वाले के कुंवे से पानी नहीं भरते !
    क्यों हम अभीतक एक निचली जातिके इन्सान को दुसरे ग्रह का प्राणी मान रहे है ?? इन्सान -इन्सान में फुट सिर्फ इस धर्म और जात-पात के वजह से है !
    हम अभीभी धर्म के जालसे आजाद नहीं हुए है ! लगता है और हजार साल लगेंगे हमको इंसानियत अपनाने के लिए !
    दुनियामे सबसे बड़ी दुखद घटना हुई है तो वो है ,= दुनियामे धर्मो का जन्म !!

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  7. VIKAS

    सच बताएं तो आज के आधुनिक युगमे लोगोंको किसी धर्मकी नहीं तो सिर्फ इंसानियत की जरुरत है जो धर्म -पंथ -जात -पात
    भूलकर सिर्फ इन्सान को माने ! इश्वर -भगवान-अल्लाह -गोड सभी बातें सिर्फ इन्सानकी सोच है ! सच नहीं ! अगर भगवान का
    अस्तित्व होता तो अपने ही धर्मके लोग बच्चे -औरतें को मार नहीं देते ! दुनियामे कोई संकट नहीं आता ! दुनियामे इतनी बेईमानी
    होती है फिर भगवान क्या करता है ? मुसीबत से अगर भगवान बचाता है ! तो फिर सवाल ये आता है की , मुसिबतमे डालता कौन है ??
    सिर्फ धर्म और पुराने विचार हजारो साल पुरानी परंपरा अपनाने से क्या फायदा ? क्योंकि स्वर्ग-नरक का कोई अस्तित्व है ,न कोई अभीतक
    साबित किया है ? फिरभी धर्मके ठेकेदार लोगोंको जिस मंजिल का पता नहीं उसका रास्ता बता रहे है !!
    आधुनिक विद्न्यान से हम बिमारियोंसे ,मुसिबतोसे बच रहे है ! हमें आराम की हर सुविधा ये नए विकास की देन है !
    नए बिमारियोंसे जैसे स्वेन फ्लू , इन्फ्लुन्ज़ा , जैसे अनगिनत बिमारियोंसे वैद्न्यानिक ही बचायेंगे !! न कोई धर्मके पंडित ना कोई
    धर्मके महात्मा ! हम इस धर्मकी दल दल से बाहर निकालेंगे तो ही विकास होगा नहीं तो आने वाला समय और नया साएन्स हमें
    कुचलकर आगे निकल जायेगा ! इसलिए समयके साथ चलो और पुराणी हजारो सालकी भ्रामक बातें भूल जावो !!

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  8. M.A.Qasmi

    और में aap ko यह और badlaun की भारत में इस्लाम भी tezi से फेल रहा he

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  9. laxman chanel

    Desh ki jo vartman Sthti hai vaha to thik hai Lekin Aane Vale
    10 se 20 Saal me desh ki Sthti Vigad Sakti hai Bharat ka padosi rajya se yuddh Ho sakta hai, yuddh ke Liye Chin, pakistan, Afganistan or Aatangvadi or Adhiktar muslim Desh , sab saath ho jayenge Or Es Sthti me india ka Saath koi desh nahi dega, America Iska Bharbur Bhayada Udhayega,Isaliye india K Neta, Pm, rajnetick parti Sab rajneeti Chodhkar Desh K hit ke Baare me Sochana Chahiye

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  10. Ajai

    Bahut hi Bevkoof type ka insaan nahi janvar type ka lekakh hai, jo Aman ka nahi Ladai ka dost hai

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  11. भारतीय नागरिक

    सत्य ही लिखा है. लेकिन हिन्दू तो सोये हुये हैं, गुलामी के माहिर. फिर गुलाम बनेंगे और रोयेंगे. अब तो आजादी भी नहीं मिल सकती. क्योंकि अब पढ़े लिखे बहुत हो गये हैं. उस समय पढ़े लिखे कम थे, निरक्षर थे लेकिन हिन्दू अधिक थे, इसलिये आजाद हो गये मुस्लिमों से भी और अंग्रेजों से भी. लेकिन अब जो गुलामी को ओर खुद पढ़े लिखे हिन्दू बढ़ रहे हैं उसके लिये क्या किया जाये. यही कहूंगा कि हमारे खून में रची बसी है गुलामी.

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  12. h.c.pandey

    first educate the hindu public on the ground reality vis a vis their actual social position in context of their respective population invarious political parties who are grinding their own axe on the name of religion and reserevations. etc. Unless a rational approach is adopted by the enlightened leaders , nothing will practical will come up.

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  13. MANAV

    दुनियामे जब से धर्मोका उदय हुवा है तबसे इन्सान इन्सान का दुश्मन बना हुवा है ! जात-पात ने इन्सान को अलग किया है ! और
    पिछले हजारो सालोका इतिहास देखे तो मालूम पड़ेगा की धर्मकी लड़ाई में जितना खून बहा है उतना किसी महायुद्ध में भी नहीं बहा है !
    फिरभी हम धर्म की तरफदारी क्यों करें ? धर्मसे सिर्फ दुसरे धर्मके लिए नफ़रत ही भरी है ! चाहे हमारे धर्म ग्रन्थ के भाईचारे के या
    शांति के अछे विचार हो लेकिन उसे पढ़कर इन्सान नहीं बदला है ! दुसरे धर्म में ही नहीं अपने धर्मके मासूम लोगोंको आतंकवादी
    जैसे ठन्डे खून वाले जानवर बेहरहमी से मार रहे है ! जिस धर्म में इतनी इबादत होती है ,उसी धर्म के लोगोंमे शांति नहीं है ,आपसमे
    प्यार मोहब्बत नहीं है ! शिया सुन्नी ,महाजोर ,पठान ,देवबंद , ऐसे अनगिनत गुट है और उनमे आपसमे नहीं बनती ! हिन्दू भी
    कम नहीं है ! सालोसे उच्च जाती के लोग निचली जाती के लोगोंको दबाते आ रहे है , उन्हें परशान करते आये है ! आज भी
    गावोंमे निचली जाती के पानी का कुवां अलग होता है ,अभी भी छूत-अछूत को लोग मान रहे है ! सिख पंथ में भी अलग -अलग
    गुट है और उनमे दुश्मनी चलती रहती है ,मार-काट होती रहती है ! फिर हम धर्म पर क्यों विश्वास करें ? हम सबको इंसानियत
    यह धर्म अपनाना चाहिए और बाकि सब धर्मके बजनेवाले ढोल बंद कर देने चाहिए ! हम सब सूर्य माला के एक गृह पर रहते है और
    सभी इन्सान एक है ! हमें हजारो साल पुरानी सभ्यता को भूलकर नए ज़माने में जीने के लिए निधर्मी होना जरुरी है ! ना धर्म रहेगा
    ना किसीसे दुश्मनी होगी ना कोई उच्च होगा ना कोई नीच हम सब एक होंगे तब ही हम विकास के ओर बढ़ेंगे !

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  14. pritam

    बहुत सटीक लिखा हैं आपने. लिब्रहान आयोग ने जो रिपोर्ट दी है वो सिर्फ सांप्रदायिक वैमन्सयता ही समाज में उतप्नन करता हैं. इस देश से हिंदू और उसके प्रतीक स्वरूप हरेक चीजों को भ्रष्ट करने की कोशिश की जा रही है..
    और दुर्भाग्य इस देश का है कि बहुसंख्यक जनता इस चीज को समझ नही पा रही हैं

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  15. R.Kapoor

    डा. अग्निहोत्री जी विषय को गहराई से पकड़ने में अत्यंत कुशल हैं. अक महत्वपूर्ण पक्ष पर ध्यान दियाजाना चाहिए की आखिर सोनिया लाबी मुस्लिम कट्टरता को प्रोत्साहन और संरक्षण देकर कहाँ मार करना चाह रही है? हिदू को कमजोर बनाने और मुस्लिम को आगे बढाने के पीछे छुपी शरारत क्या है? ईसाईयों की दो सौ साल पुरानी कूटनीति है की हिन्दू – मुस्लिम को लड़ाकर कमजोर बनातेजाना और ईसाईयों को मजबूत बनातेजाना.सोनिया जी की ईसाई परस्ती किसी खुली आँखों वाले से छुपी नहीं है. फिर भी मुसलमानों को ढोल नगाड़े बजाकर अधिमान देने के पीछे छुपी साजिश का शक गलत नहीं होसकता. एक तीर से दो शिकार नही तीन शिकार होते नज़र आरहे हैं. बहुसंख्यक हिन्दुओं को मुस्लिमो के हाथों मरवाकर, कमजोर बनाकर ईसाई शासन का बड़ा कांटा निकालना और फिर आतंकवादी कहकर ,अमेरिका की तर्ज़ पर मुस्लिमों को ठिकाने लगाना कितना आसान काम है. मज़हब परस्त, भावुक मुस्लिम और भोले हिन्दू इस चालाकी का शिकार २०० साल से बन रहे हैं पर न तब समझे ,न अब समझ रहे हैं. जिसतरह से बलि का बकरा पाला जाता है, वही हालत भोले और इस्लाम परस्त मुसलमानों की करनेवाली है हमारी सरकार जो पश्चिमी ताकतों की कठपुतली है. इस तथ्य को हम सबको समझना होगा.

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  16. दिवाकर मणि

    लेखक के आलेख से पूर्ण रूपेण सहमत. जबतक तुष्टिकरण की नीति से ऊपर उठकर नहीं सोचा जाएगा तबतक देश का भला नहीं हो सकता। पता नहीं क्यूं हम और हमारे राजनेता अपने भूत (अतीत) से कुछ सीखने को तैयार नहीं है? जब देश के हर प्रांत के अंदर के अलगाववादी ताकतों को प्रश्रय दिया जाएगा तो हश्र वही होगा जो १९४७ में हुआ। हे ईश्वर, हमारे राजनेताओं को सद्‌बुद्धि दे ताकि वे भविष्य को समझ सकें…….ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

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  17. Abhishek Jain

    येः लेख पदके दुःख होता है की आज भी ऐसी संकीर्ण सोच व्यक्त की जाती है. न जाने कब हम एक पड़े लिखे वक्तितत्व को अपनायंगे. आज भी हम विकास को छोड़ कर जाती की बाते करते है जो की काफी शर्म की बात है. क्या ऐसी सोच तालिबानी नहीं है!!

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  18. Jeet Bhargava

    बहुत सटीक लिखा लेकिन ऐसे राहुल, सोनिया, और सच्चर-रंगनाथ सहित मीडिया बात-बेबात पे हिन्दू जनता की छाती पर ही मूंग क्यों दलती है?
    क्योंकि:
    १. हिन्दुओं को सेकुलरिज्म की फरेबी अफीम पिलाकर सुलाकर रखा है और हिन्दू से झिन्दू (जागने को तैयार नहीं हिन्दू) बना दिया है.
    २. हमारे लिए कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है. दुनिया की नामी प्रतिभाएं, कलाकार, उद्यमी संत हमारे पास है. लेकिन हिन्दू हित और हक़ की बात करने में उन्हें शर्म आती है. जबकि मुस्लिम पहले इस्लाम को तरजीह देता है बाद में बाकी सब करता है. चाहे जावेद अख्तर जैसा नामी फिल्मकार हो या कोई आई आई टी में पढ़ा मुस्लिम युवा, उसे अपने हक़ और हित मालुम है. उसके लिए इस्लाम सर्वोपरि है और इस्लाम की पैरवी करनेवाले को ही वोट देता है, चाहे वह कोंग्रेस हो या कम्युनिस्ट, मुलायम हो या लालू, मायावती हो या शरद पवार. उसके लिए इस्लाम के सामने सभी मुद्दे गौण है..विकास, राष्ट्रहित, सदभाव आदि का ठेका हिन्दुओं ने ही ले रखा है.
    ३. जो संस्थान या संगठन हिन्दू हित और हक़ की बात करते हैं, उन्हें साजिश के तहत साम्प्रदायिक घोषित कर रखा है. और इस साजिश में सेकुलर नेता, मीडिया समेत जेहादी और चर्च भी साथ है. और दुर्भाग्य की बात ये है कि सोये हुए हिन्दुओ (झिन्दुओं) ने भी इनको साम्प्रदायिक मानकर कोसना शुरू करा दिया है. चाहे वहा संघ हो या विहिप, बजरंगदल…फिर भी वहा टूटे-फूटे संसाधनों और उपलब्ध समर्पित कार्यकर्ताओं के बल पर संघर्ष कर रहे हैं.

    कितनी शर्म की बात है कि दुनिया के सबसे बड़े अमीर लक्ष्मी मित्तल, अम्बानी आदि हिनू है और उसी हिन्दू कौम के लोग दो वक्त की रोटी के लिए अपना धर्म बदलकर ईसाई बन रहे हैं.
    इससे भी बड़ी शर्म की बात है कि चर्च के लोग फर्जी एन जी ओ बनाकर हिन्दुओं से ही चेरिटी और दान उगाहते हैं और उनके (हिन्दुओं के) ही धन से उनके (हिन्दुओं के) ही भाइयो का धर्मं बदलवाकर इसाई बनाते हैं और फिर उनके (हिन्दुओं के) ही खिलाफ खडा करते हैं.

    देश में ९०% आयकर हिन्दू उच्चा वर्ग और माध्यम वर्ग भरता है, लेकिन सरकार उसे खर्च करती है अपने वोट बैंक पर. किसी को हज सबसिडी, तो किसी को इस्लामी मदरसे या विश्वविद्यालय खोलने के लिए. जो कर भरता है उसे तो ठेंगा ही मिलता है. और किस्मत अच्छी नहीं रही तो किसी जेहादी के हाथो कुत्ते की मौत मारा जाता है. सरकार चार आंसू बहाकर साम्प्रदायिक सदभाव की अपील और पाकिस्तान को करारा जवाब देने की हूंकार भर कर चुप हो जाती है और अपने वोट बैंक की चापलूसी में वापस लग जाती है.
    जब खुद हिन्दू जाति को अपनी नहीं पडी है तो कौन उसे बचाएगा…?

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  19. Satyendra Kumar

    एक बढ़िया लेख लेकिन आवेश में लिखा हुआ लेख जो समस्या का हल नहीं बताता है | प्रश्न यह नहीं है की राहुल गाँधी ने क्या कहा पर प्रश्न यह है की राहुल गाँधी के कहने से हम क्यों प्रभावित हैं | हम जितना समय लिखने और बोलने पर गवां रहे हैं उतना समय एक स्वस्थ समाज के निर्माण पर क्यों नहीं लगा रहें हैं, जहाँ हमारी पहचान भारतीय से हो और हमारा धर्म इंसानियत हो | सबसे पहले हमें शुरुआत अपने से करनी परेगी, फिर अपने परिवार, फिर मोहल्ले, फिर गाँव और शहर से करनी होगी |
    जब तक मुस्लिम समाज मदरसों की ओट से नहीं निकलेगा तब तक महज उनका उपयोग होता रहेगा | सरकारी त्रंत की अपेक्षा पहल समाज को करनी परेगी, बाद में उसी समाज के प्रतिनिधि राष्ट्र-निर्माण में अपना योगदान देंगे | मेरे हिसाब से हमारे पास यही एक विकल्प है |

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  20. sadhak ummed singh baid

    देश की रक्षा का बना, नाजुक बङा सवाल.
    कोई कुछ भी बोल दे, मीडेया करे बवाल.
    मीडीया करे बवाल, सनसनी बिकती ज्यादा.
    पैसा आये किसी तरह भी, यही इरादा.
    कह साधक ज्यादा चिन्तन इस भ्रमका करना.
    नाजुक बङा सवाल, समझ की चिन्ता करना.

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  21. Krishna Baraskar

    आपका “भारत को मुस्लिम देश बनाने की तयारी” आर्टिकल बहुत ही अच्छा लगा आपके विचार से मै पूरी तरह से सहमत हूँ.. निश्चित ही हम हिन्दुवों को ख़त्म करने की साजिस चल रही है और कांग्रेस उसमे हमेशा से ही भागीदार रही है…
    पर भाई साहब मुझे लगता है की इसमें हमारी भी कुछ कमियां है जिनके कारन हम इनके सामने कम पड़ जाते है… हमारे धार्मिक संगठन एकमत कभी नहीं दिखे.. और न ही हम जनता का समर्थन ले पाए क्योंकि सिम्मी, अलकायदा, या अन्य आतंकवादी समूह मुश्लिमो में वीरो का समूह है .. लेकिन हिन्दुवों में विश्व हिन्दू परिषद्, बजरंग दल, श्री राम सेना सब विलन है.. जिस प्रकार मुश्लिमो और ईसाईयों के लिए राहुल महाजन, सोनिया गाँधी या डॉ. मनमोहन सिंह प्रचार करते है .. हमारी और से कोई भी प्रचार नहीं कर पाया… आपने देखा ही होगा बीजेपी का चेहरा ? आजतक हम अपने देश को हमारे धार्मिक संगठनो की हकीकत नहीं बता पाए है फिर हम उम्मीद भी क्या करे .. हिन्दू विनाश हो रहा है निरंतर हो रहा है… निरंतर

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