लेखक परिचय

मिलन सिन्हा

मिलन सिन्हा

स्वतंत्र लेखन अब तक धर्मयुग, दिनमान, कादम्बिनी, नवनीत, कहानीकार, समग्रता, जीवन साहित्य, अवकाश, हिंदी एक्सप्रेस, राष्ट्रधर्म, सरिता, मुक्त, स्वतंत्र भारत सुमन, अक्षर पर्व, योजना, नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, प्रभात खबर, जागरण, आज, प्रदीप, राष्ट्रदूत, नंदन सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अनेक रचनाएँ प्रकाशित ।

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मिलन सिन्हा

povertyसोचनीय विषयों  पर

सोचते नहीं

वादा जो करते हैं

वह करते नहीं

अच्छे  लोगों को

साथ रखते नहीं

गलत करने वालों को

रोकते नहीं

बड़ी आबादी को

खाना, कपडा तक नहीं

गांववालों को

शौचालय भी नहीं

बच्चों को जरूरी

शिक्षा व पोषण तक नहीं

गरीब, शोषित के प्रति

वाकई कोई संवेदना नहीं

अपने  गुरूर में ही जीते हैं

अपने जमीर की भी सुनते नहीं

वक्त दस्तक देता है

फिर भी चेतते नहीं

सच कहते हैं गुणीजन

ऐसे नेताओं को

आम जनता भूलती नहीं

ऐसे शासकों  को

तारीखें  माफ़ करती नहीं !

One Response to “कविता : तारीखें माफ़ करती नहीं”

  1. अरुण कान्त शुक्ला

    अरुण कान्त शुक्ला

    खुबसूरत कविता..

    Reply

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