लेखक परिचय

लोकेन्द्र सिंह राजपूत

लोकेन्द्र सिंह राजपूत

युवा साहित्यकार लोकेन्द्र सिंह माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में पदस्थ हैं। वे स्वदेश ग्वालियर, दैनिक भास्कर, पत्रिका और नईदुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। देशभर के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में समसाययिक विषयों पर आलेख, कहानी, कविता और यात्रा वृतांत प्रकाशित। उनके राजनीतिक आलेखों का संग्रह 'देश कठपुतलियों के हाथ में' प्रकाशित हो चुका है।

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जब से शहर आया हूं

हरी साड़ी में नहीं देखा धरती को

सीमेंट-कांक्रीट में लिपटी है

जींस-पेंट में इठलाती नवयौवन हो जैसे

धानी चूनर में शर्माते,

बलखाते नहीं देखा धरती को

जब से शहर आया हूं।

गांव में ऊंचे पहाड़ से

दूर तलक हरे लिबास में दिखती वसुन्धरा

शहर में, आसमान का सीना चीरती इमारत से

हर ओर डामर की बेढिय़ों में कैद

बेबस, दुखियारी देखा धरती को

हंसती-फूल बरसाती नहीं देखा धरती को

जब से शहर आया हूं।


-लोकेन्‍द्र सिंह राजपूत

One Response to “कविता / ‘जब से शहर आया हूं…’”

  1. लक्ष्मी नारायण लहरे कोसीर पत्रकार

    laxmi narayan lahare

    आप की कविता में एक दर्द छुपी है जो लड़ना चाहती है नव बरस की हार्दिक बधाई
    लक्ष्मी नारायण लहरे पत्रकार कोसीर छत्तीसगढ़ 9752319395

    Reply

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