लेखक परिचय

प्रवक्‍ता ब्यूरो

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पाला है हमने अब भी ये आज़ार किसलिए

गद्दीनशीन अब भी हैं गद्दार किसलिए

लगता है मुझको दाल में है काला कुछ जरूर

डरती है लोकपाल से सरकार किसलिए

ये लूटमार, रेप, घूस, कत्ल, घोटाले

है संविधान इस कदर बीमार किसलिए

खाते हैं कसम लाएंगे जनलोकपाल बिल

हमको मिला है वोट का अधिकार किसलिए

अब भी अगर न जागे, तो जल जाएगा समाज

है पास शांत-क्रांति का औजार किसलिए

सरकारी लोकपाल की दीवार गिरा दो

कमजोर अगर है, तो ये दीवार किसलिए

अब भी नदी के पार है जनलोकपाल बिल

हमलोग ‘मस्त’ हैं अभी इस पार किसलिए

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संजय सिंह ‘मस्त’

बलरामपुर जिले के अर्जुनपुर निवासी संजय सिंह मुख्यतः कवि व ग़जलकार हैं जो ‘मस्त’ उपनाम से अपनी रचनाएँ लिखते हैं।

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