लेखक परिचय

सतीश सिंह

सतीश सिंह

श्री सतीश सिंह वर्तमान में स्टेट बैंक समूह में एक अधिकारी के रुप में दिल्ली में कार्यरत हैं और विगत दो वर्षों से स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। 1995 से जून 2000 तक मुख्यधारा की पत्रकारिता में भी इनकी सक्रिय भागीदारी रही है। श्री सिंह दैनिक हिन्दुस्तान, हिन्दुस्तान टाइम्स, दैनिक जागरण इत्यादि अख़बारों के लिए काम कर चुके हैं।

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औरत तिल-तिल कर

मरती रही, जलती रही

अपने अस्तित्व को

हर पल खोती रही

दुख के साथ

दुख के बीच

जीवन के कारोबार में

नि:शब्द अपने पगचापों का मिटना देखती रही

सृजन के साथ

जनम गया शोक

रुदाली का जारी है विलाप

सूख गया कंठ

फिर भी वह आंखों से बोलती रही

जीवन के हर कालखंड में

कभी खूंटी पर टंगी

तो कभी मूक मूर्ति बनी

अनंतकाल से उदास है जीवन

पर

वह हमेशा नदी की तरह बहती रही


-सतीश सिंह

7 Responses to “कविता- औरत”

  1. लक्ष्मी नारायण लहरे कोसीर पत्रकार

    laxmi narayan lahare

    सतीश जी सप्रेम अभिवादन आप का विचारप्रसंसनीय है न व् बरस की हार्दिक बधाई
    लक्ष्मी नारायण लहरे पत्रकार कोसीर छत्तीसगढ़

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  2. ललित कुमार कुचालिया

    lalit kuchalia

    एक ओरत वास्तव में सो शिक्षको के बराबर होती है अगर ये माँ का रूप धरण कर ले तो

    Reply
  3. ललित कुमार कुचालिया

    lalit kuchalia

    सतीश जी एक ओरत वास्तव में सो शिक्षको के बराबर होती है अगर ये माँ का रूप धरण कर ले तो

    Reply
  4. Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'

    सवाल : हिन्दू नारी की ये तस्वीर भारत में किसने बनाई?
    जवाब : हिन्दू धर्म ग्रंथों ने.
    सवाल : वर्तमान में नारी को कौन आगे नहीं बढ़ने देना चाहता?
    जवाब : हिन्दू धर्म ग्रंथों के संरक्षक. जिनमें प्रमुख हैं. आर एस एस एवं हिंदूवादी कट्टरपंथी संगठन.
    सवाल : नारी समानता के हक़ का कौन विरोध करता है?
    जवाब : हिन्दू धर्म ग्रंथों के संरक्षक. जिनमें प्रमुख हैं. आर एस एस एवं हिंदूवादी कट्टरपंथी संगठन.

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  5. rakesh gupta

    वन्दे मातरम बंधुवर,
    नारी नर की खान है, संसार को देती ज्ञान है,
    इसको अबला मत कहो, ये माँ दुर्गा सी महान है,

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  6. श्रीराम तिवारी

    shriram tiwari

    निरपेक्ष मेटाफर क्या है ….?यह सूरत -ये -हाल .भरपूर नकारात्मकता से लबरेज …यह तो करुणा मई ,मातृत्व -वात्सल्य इत्यादि महिमामय सद्गुणों से बंचित तस्वीर हो सकती है ..

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