जनसंख्या विस्फोट – गरीबों के मुँह से छिनता निवाला

आर.एल.फ्रांसिस

बढ़ती जनसंख्या देश की सबसे गंभीरतम समास्याओं में प्रमुख समास्या है जिस पर चिंता तो अवश्‍य जताई जाती है पर ठोस समाधान के लिए कोई भी आगे आने को तैयार नहीं है। जनसंख्या को नियंत्रण करने में हमारी सरकारे, समाज और व्यवस्था लगातार असफल होते जा रहे है और इसको नियंत्रण करने के लिए चलाये जा रहे कार्यक्रम मजाक का विषय बन कर रह गये है। आज हम आबादी के मामले में चीन के बाद दूसरे नम्बर पर है अगर इसी तरह हमारी आबादी बढ़ती रही तो कोई संदेह नही कि हम चीन को पीछे छोड़ देगें। क्योंकि चीन ने अपने यहां आबादी को नियंत्रित करने के लिये सख्त कदम उठाये है। चीन में दूसरी संतान के बाद दंपतियों पर परिवार नियोजन का नियम लागू रहता है और वह उसे बलपूर्वक लागू भी करते है। हमारे यहा लोकतंत्र है कम से कम हम आम सहमति से इसे अपना सकते है लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि हम अपना वोट बैंक छिटक जाने के डर से इस पर चर्चा करने से भी कतराने लगे है।

जनसंख्या के बढ़ते दबाव के कारण हम बुनयादी सुविधायों में लगातार पीछे जा रहे है शहरों पर बढ़ते लगातार दबाव के चलते शिक्षा, चिकित्सा, सामाजिक सुरक्षा, बिजली उत्पादन में कटौती जैसी गंभीर समास्याए विकराल रुप लेती जा रही है। 1994 में कहिरा सम्मेलन में इस बात पर चिंता जताई गई थी कि जिस प्रकार विकासशील देश जरुरत से ज्यादा संसाधनों का दोहन कर रहे है इसके चलते आने वाले दिनों में अनेक गंभीर संकट खड़े होगें इसका कारण यह है कि इन देषों में आबादी तेज रफतार से बढ़ रही है वही प्रति व्यक्ति जमीन, जल और जंगल की उपलब्धता घट रही है। भारत इसका सबसे बड़ा उदाहरण है रासायनिक उर्वरकों पर अधारित हरित क्रांति ने हमें भले ही थोड़ी राहत दी हो लेकिन आने वाले समय में इससे हम अपनी जनसंख्या का पेट नही भर पायेंगे।

भारत सरकार और राज्य सरकारे बढ़ती जनसंख्या के खतरो से बेपरवाह ही नजर आती है सरकार का दावा है कि वह 2045 तक आबादी को स्थिर कर लेगी वह व्यवहारिक दिखाई नहीं देता। बढ़ती आबादी को रोकने के लिए देश के निर्धन और निर्धनतम वर्गो पर विशेष ध्यान देने की योजना असफल हो चुकी है। परिवार नियोजन के लाभ और उससे जुड़ी विशेषताएं हम इन वर्गो के बीच पहुँचाने में नकारा साबित हुए है और रही सही कसर सरकार द्वारा चलायी जाने वाली ‘जननी सुरक्षा योजना” ने पूरी कर दी है। योजना के तहत सरकारी अस्पताल में प्रसव करवाने वाले लोगों के लिये दो जीवित बच्चों के जन्म तक लाभ पाने का प्रतिबंध अब समाप्त कर दिया गया है। ऐसे में आप परिवार नियोजन की योजनायें कैसे सफल बना सकते है?

परिवार नियोजन को बढ़वा देने के लिए लोगो को आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जानी चाहिए जो सहयता राशि अभी दी जा रही है वह बेहद कम है और किसी को परिवार नियोजन के लिए प्रेरित नहीं करती। इसमें संदेह नही कि अच्छी सोच वाले लोगो की जनसंख्या तेजी से घट रही है दूसरी और निर्धन और निर्धनतम और अभावों में जीने वाले वर्गो की जनसंख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। ‘जननी सुरक्षा योजना’ भी इन वर्गो की जनसंख्या बढ़ाने का एक बड़ा कारण बनती जा रही है। लोकतांत्रिक पद्वति में अगर एक वर्ग की जनसंख्या गिर जाती और दूसरे की बढ़ती जाती है तो कम जनसंख्या वाले को अपने अस्त्तिव पर खतरा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि कभी केरल का चर्च अपने अनुयायियों से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील करता है तो कभी हिन्दू समुदाय ऐसी अपील करता है।

बढ़ती जनसंख्या के बारे में केवल नेताओं या कुछ खास लोगों को ही नहीं बल्कि पूरे देश को सोचना होगा कि देश में अराजकता पनपने का मूल कारण सामाजिक आसमानता और अमीरी गरीबी के बीच की लड़ाई है जो बढ़ती आबादी से जुड़ी हुई है। आबादी कम होगी तो विकास का लाभ सभी को मिल सकेगा। हमें यह नही भूलना चाहिए कि अगर जनसंख्या नियंत्रण के के ठोस और प्रभावी तरीके नहीं अपनाये गये तो स्थितियां हाथ से बाहर होने लगेंगी। अच्छा यही होगा कि हम ऐसी स्थितियां आने ही न दें और जनसंख्या के विस्फोट के खतरे को टालने के लिए प्रभावी तरीके अपनायें।

1 thought on “जनसंख्या विस्फोट – गरीबों के मुँह से छिनता निवाला

  1. अच्छा यही होगा कि हम ऐसी स्थितियां आने ही न दें और जनसंख्या के विस्फोट के खतरे को टालने के लिए प्रभावी तरीके अपनायें।
    हम आप तो चाहेंगे लेकिन नेता जिसने अपना जमीर ही बेच दिया है?

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