लेखक परिचय

डॉ. मधुसूदन

डॉ. मधुसूदन

मधुसूदनजी तकनीकी (Engineering) में एम.एस. तथा पी.एच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त् की है, भारतीय अमेरिकी शोधकर्ता के रूप में मशहूर है, हिन्दी के प्रखर पुरस्कर्ता: संस्कृत, हिन्दी, मराठी, गुजराती के अभ्यासी, अनेक संस्थाओं से जुडे हुए। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (अमरिका) आजीवन सदस्य हैं; वर्तमान में अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्‍था UNIVERSITY OF MASSACHUSETTS (युनिवर्सीटी ऑफ मॅसाच्युसेटस, निर्माण अभियांत्रिकी), में प्रोफेसर हैं।

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प्रवेश: एक घना निबिड़ अरण्य। जलाशय के किनारे, प्राचीन खंडहर शिवाला विलुप्तसा। पगडंडी परभी पेड पौधे। मिट चुकी पगडंडी। बरसों से कोई यात्री ही नहीं। श्रद्धालु तो, निष्कासित हैं। कवि वहां पहुंचता है। प्रगाढ शांति -भंग करने की झिझक, और द्विधा के क्षण पर, यह कविता-एक सबेरे, चेतस की सितारी यूं, झन झना कर गई।

सरवर-जल पर तैरता,

खंडहर शिवालय।

शीर्ण ध्वज, बटकी जटाएं,

निःशब्द, नीरव।

चहुं दिश बहे, घन निबिड-

बन, एकांत शांत।

योजनो, योजनो तक,

निर-बाट निर्जन।

झूलती बट की जटाएं।

मध्य में खंडहर शिवाला।

शिवजी करते वास-

इस एकांत में।

जटा जूट में, खो चुका,

खंडहर शिवाला।

छतपर लटकी ,

जीर्ण जर्जर शृंखला।

शृंखला पर लटका घंट,

घंटपर लोलक लटका,

लोलक पर लटका शब्द,

ही समाधि-मग्न!

कई बरसों से सुन रहा।

अनाहत नाद!

अनाहत नाद।

अना–हत–नाद।

बस एकांत।

—-

—-

—-

अब न कोई घंटी बजाए।

कोई शब्द को जगाए ना।

रूद्र शिव बैठे हैं, तप में।

कोइ पगध्वनि ना करें।

भंग शांति ना करें।

सरवर जलपर तैरने

दे खंडहर शिवालय।

शीर्ण ध्वज, बटकी जटाएं,

निःशब्द नीरव।

4 Responses to “प्रो. मधुसूदन की कविता : खंडहर शिवाला”

  1. शकुन्तला बहादुर

    Shakuntala Bahadur

    खंडहर शिवाला – कई बरसों से सुन रहा हूँ अनाहत नाद। बस एकान्त। रुद्र शिव बैठे….भंग शान्ति न करें।
    मनीषी मधुसूदन जी ने निर्जन एकान्त वन में , आश्रम जैसे वातावरण में जो शब्द चित्र खींचा है ,वह आँखों के सामने आकर मन पर छा गया । और… मन वहीं भक्ति में रम सा गया । बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति !!

    Reply
  2. प्रतिभा सक्सेना.

    गहन नीरव एकान्त में, निर्विकार ध्यान-मग्न शिव का प्रभावी भाव-चित्र अंकित किया है डॉ. मधुसूदन जी की लेखनी ने -केवल प्रकृति है वहाँ और छाँह दिये एक पुरातन वट-वृक्ष !

    Reply
    • डॉ. मधुसूदन

      डॉ. मधुसूदन

      आपकी टिप्पणी से अनुगृहीत -मधुसूदन

      धन्यवाद।

      Reply

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