वायरल फीवर
वायरल फीवर

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’
इन दिनों देशभर में वायरल फीवर/बुखार का प्रकोप व्याप्त है। जिसके लक्षण सामान्यत: निम्न हैं :—
रोग के सम्भावित लक्षण :

थकान, मांसपेशियों या बदन में दर्द, गले में दर्द, सर दर्द, जोड़ो में दर्द, ग्रस्नी/गलकोष (pharynx) में सूजन, आँखो में लाली और जलन का अनुभव, तेज बुखार, सर्दी, खाँसी, दस्त (diarrhea), त्वचा के ऊपर रैशज़, आदि।
नोट : जरूरी नहीं कि रोगी में सभी लक्षण हमेशा ही विद्यमान रहें या प्रकट हों।
बचाव ही उपचार :

आप या आपका परिवार वायरल से पीड़ित नहीं हो, इसके लिये आपको निम्न काढे का सेवन करना चाहिये:—
घर के पांच सदस्यों के बचाव हेतु काढा :

1. साबुत धनिया—तीन बड़ा चम्मच/टेबल स्पून।

2. साबुत मेथी—तीन बड़ा चम्मच/टेबल स्पून।

3. गिलोय—मध्यम आकार की डाली 15—20 इंच या 15 पत्ते या गिलोय का 20 ग्राम पाउडर।

4. तुलसी के ताजा चत्ते—20 नग, जिन्हें ठीक से कुचल/पीस लें।

5. लौंग—10 नग।

6. काली मिर्च—20 नग।

7. दालचीनी—तीन चुटकी।

8. सोंठ—तीन टी स्पून/छोटा चम्मच या इतना ही ताजा अदरक।

9. हल्दी—तीन टी स्पून/तीन छोटा चम्मच।

10. स्वादानुसार चीनी। मधुमेह/डायबिटीज के रोगियों के लिये चीनी का निषेध है।

11. नींबू—सामान्य/मध्यम आकार के तीन नींबू।

काढा बनाने की विधि :

1. धनिया एवं मेथी दोनों को 300 मि.ग्रा. पानी में 6 घंटे तक भिगो लें। इसके बाद भिगोये हुए धनिया—मेथी को पानी सहित, गिलोय एवं तुलसी के पत्तों के साथ मिक्स्चर में बारीक पीस लें। ध्यान रहे कि मिक्स्चर को रुक—रुक कर और धीरे—धीरे चलायें, अधिक तेजी से चलाने से औषधियाँ गुणहीन हो सकती हैं।

2. उक्त क्रम 5 से 8 तक वर्णित सभी औषधियों को एक साथ मिलाकर खरल में बारीक मिश्रण/पाउडर बना लें और अन्त में इसमें चीनी मिला लें।

3. उक्त समस्त सामग्री को करीब 800 मि.ली. पानी में धीमी आंच पर पकालें/उबाल लें। जब समस्त औषधियों का द्रव्य करीब 500 मि.ग्रा. अर्थात् आधा रह जाये तो रोग प्रतिरोधक काढा बनकर तैयार है।

सेवन विधि :

काढे को छानने से पहले तीनों नींबू का रस निचोड़कर समान मात्रा में पांच कप में डाल दें। इसके बाद सभी पांच कप में उक्त काढे को छानकर परिवार के पांचों सदस्यों को कम से कम दो वक्त सुबह—शाम पिला दें। इस काढे को चाय की भांति धीरे—धीरे पियें। यह काढा लगातार तीन दिन तक सेवन करने के बाद आपका परिवार सामान्य बुखार/फीवर वायरल, डेंगू आदि से 90 फीसदी तक सुरक्षित हो जायेगा।
रोगी को भी सेवन करा सकते हैं :

इस काढे को वायरल के रोगी को भी पिला सकते हैं। इससे वायरल के रोगी भी लाभ होगा। यदि रोगी डेंगू या चिकिनगुनिया से पीड़ित हो तो तुलसी के साथ एक पपीता का पत्ता भी शामिल किया जा सकता है। लेकिन चिकित्सक का परामर्श अवश्य प्राप्त करें।
सावधानी :

यदि रोगी का तापमान 103 या अधिक हो। बुखार सात दिनों से अधिक समय से हो। और बुखार के लक्षण बिगड़ रहे हों तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
अन्तिम महत्वपूर्ण और काम की बात :

आधुनिक वैज्ञानिक खोज एवं अध्ययन से इस बात की पुष्टि हुई है कि प्याज में ऐसे तत्वों की उपस्थिति है जो वायरल बुखार के कीटाणुओं को नष्ट करने की शक्ति रखते है। अत: यदि आप अपने कमरे में प्याज काटकर रख दें तो आप वायरल-प्रकोप से अवश्य बच सकते हैं। चाहे उस कमरे में वायरल रोग से पीड़ित या संभावित पीड़ित कितने भी लोग आते—जाते रहें। साथ ही बचाव हेतु कच्चा प्याज खाना भी लाभप्रद है। कच्चे प्याज का सेवन न केवल वायरल बुखार बल्कि हैजा, मलेरिया, लू आदि से बचने के लिए उपयोगी सिद्ध हुआ है।

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