राहुल गांधी गले पड़े या गले लगे ?

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. वीरेन्द्र सिंह परिहार

संसद में अविश्वास  प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी जब प्रधानमंत्री मोदी से गले मिलें ,अथवा मोदी के शब्दों में गले पड़ गये, तो पूरा देश हतप्रभ रह गया । कुछ भी हों , अधिकांश  लोगों ने इसे नौटंकी ही माना ,क्योंकि राहुल बाबा आये दिन तरह-तरह की नौंटंकी करते ही रहते हैं ।यह बात अलग है कि इसे वह अपनी मौलिक्ता मानते हैं  ।इधर पूरी काग्रेंस पार्टी राहुल गांधी के इस कदम से पूरी तरह उन पर बिछी पड़ी है। बिछी तो वह तभी से है जबसे राहुल बाबा का जन्म एक खानदान विशेष  में हुआ – जो देश में  राजपाठ करने का अपना विशेषाधिकार मानता है । पर जबसे उनका पदार्पण राजनीति मे हुआ तबसे कांग्रेसजन उन्हे सिर्फ क्रान्तिकारी नेता के रूप में ही नहीं, एक महान दार्शनिक  और गहन तत्वज्ञानी के बतौर भी देखने लगे। खैर मोदी से गले मिलने अथवा गले पड़ने के बाद कांग्रेसजनों का कहना है कि अब उनमे एक ऐसी महान आत्मा प्रविष्ट हो गई है कि उनका सम्पूर्ण कायाकल्प हो गया है ।अब वह राग-द्वेश  से पूरी तरह परे होकर सर्वथा समत्व की दशा मे पहुंच गये हैं। स्थिति यहां तक आन पहुंची है कि अब वह क्रोध केा क्षमा से जीतेंगे ,घृणा को प्यार से जीतेंगे । यदि कोई उन्हे एक थप्पड़ मारेगा तो वह दूसरा गाल भी आगे कर देंगे । अब वह राहुल गांधी नही रहे जो अक्सर कुर्ते को बांह मे चढा़या करते थें ,अथवा कैबनेट के फैसलों को रद्दी कागज के टुकड़ो की तरह चीथड़े उड़ा देते थे । पर देश  के बहुत से सुधी जनों का कहना है कि इस तरह से ‘सिखाए पूत’ दरबार नहीं जाते। वस्तुतः एैसे लोगों का कहना है कि यह राहुल गांधी की नई छवि गल-कूद मचाते है ।पर जब मंदसौर (म0प्र0) मे सात साल की मासूम एक हिन्दू बच्ची के साथ इरफान और आसिफ वीभत्स बलात्कार कर मरा समझकर एक झाड़ी मे फेंक  देते है तो राहुल बाबा की जुबां नहीं खुलती । राहुल गांधी तथाकथित मुस्लिम बुद्धिजीवियों की बैठक मे भले ही कांग्रेस पार्टी को मुस्लिमों की पार्टी बताए पर कांग्रेसजनो का कहना है कि राहुल गांधी इस तरह से कांग्रेस को सभी की पार्टी बता रहे होते है । है-न चमत्कारिक बात! राहुल गांधी कहते कुछ हैं और उसका अर्थ कुछ और होता है । आखिर मे देश  के गले पड़ने के लिए कुछ इस तरह के प्रयोग निहायत जरूरी हैं ।

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