राजगृह का राजवैद्य जीवक

—विनय कुमार विनायक
मगधराज बिम्बिसार की अभिषिक्त,
शालवती थी नगर वधू राजगृह की!
राजतंत्र की देवदासी सी एक कुरीति,
वैशाली की गणिका आम्रपाली जैसी!
किन्तु गणिका नहीं राज नर्तकी थी,
गणिका तो गण की हुआ करती थी!

मगध गणराज्य नहीं महाजनपद था,
राजगृह का राजवैद्य जीवक पुत्र था
परित्यक्त, नगर वधू शालवती और
सम्राट बिम्बिसार की अवैध संतति!
जिसे उठाके कूड़े की ढेर से पाले थे
बिम्बिसार-नन्द श्री के युवराज ने!

अगर अजातशत्रु पितृहत्यारा ने मार
बिम्बिसार को मगधराज की गद्दी
ना हथियाई होती तो अभय ही पाते
मगध साम्राज्य का वैध उत्तराधिकार!

कहते हैं मारने वाले से सदा-सदा से
श्रेष्ठ होते हैं जीवन को बचाने वाले
जीवक के जीवरक्षक अभय ने भेजा
शिक्षा दीक्षा व मानवीय संस्कारार्थ!
जीवक को जीव रक्षा का वचन देके
जीव विज्ञान आयुर्वेद ज्ञानार्जन हेतु
विश्व प्रसिद्ध शिक्षा केन्द्र तक्षशिला!

वैद्याचार्य आत्रेय से पाके आयुर्ज्ञान
जीवक ने किया औषधि अनुसंधान
आयु वर्धक जीवन औषधि ‘जीवक’
ऋषियों का जीवन धारक ‘ऋषिभक’!

जीवक बन गया निपुण कौमारभृत्य
जीवक शिशुरोग विशेषज्ञ,ब्रेन सर्जन
बिम्बिसार से लेकर अवंतिराज चण्ड,
भगवान बुद्ध एवं बौद्ध भिक्षु गण
उनकी चिकित्सा सेवा के लाभुक थे!

बिम्बिसार और बुद्ध का अर्श रोग
प्रद्योत की पीलिया,श्रेष्ठी का आंत्र
शल्य चिकित्सा जीवक ने की थी,
जीते जी जीवक ने चिकित्सा की
बौद्ध भिक्षु, श्रमणों का निःशुल्क!

आदर्श जीवक का चिकित्सा कार्य,
प्रमाणित किया जीवक ने प्रतिभा
विरासत नहीं जन्म,जाति,वंश की
मानव अंतर्मन में प्रतिभा उपजती!

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