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    सबको रुला गये हमेशा हंसाने वाले राजू श्रीवास्तव

     ललित गर्ग

    कॉमेडी की दुनिया के सबसे चर्चित कॉमेडियन्स में से एक राजू श्रीवास्तव 21 सितंबर 2022 को 41 दिन से चल रही जीवन और मृत्यु के बीच की जंग हार गए। आज सुबह कॉमेडियन का दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल में निधन हो गया। स्टैंड अप कॉमेडी के जरिए सबको हंसाने वाले राजू श्रीवास्तव के निधन की खबर से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ पड़ी है। सभी जगह गम का मौहाल हैं, वे एक अच्छे कॉमेडियन होने के साथ साथ बहुत अच्छे इंसान भी थे। उन्होंने अपनी प्रतिभा एवं मेहनत से बहुत नाम कमाया। उनका एक विशिष्ट अंदाज था, उन्होंने अपनी अद्भुत प्रतिभा से सभी को न केवल प्रभावित किया बल्कि असंख्य दिलों पर राज किया। उनका निधन कला जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। हंसते-हंसाते आप ऐसे चले गये कि मनोरंजन जगत में कभी न भरने वाला एक बड़ा शून्य छोड़ गये।
    हास्य अभिनेता का अर्थ वह अभिनेता होता है जो अपने अभिनय के माध्यम से लोगों को हँसा देता है। हिंदी फिल्मों में कुछ लोग इसी कार्य के लिए विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं जैसे जॉनी वॉकर, महमूद, आदि। कुछ मुख्य पात्रों ने भी हास्य अभिनय का खूब प्रदर्शन किया है जैसे गोविन्दा, ऋतेश देशमुख, आदि कलाकार। इस दुनिया में सबसे मुश्किल काम है किसी को हंसाना। आप भावुक होकर किसी को रुला तो सकते हैं लेकिन खुद मजाक बनकर दूसरे को हंसाने के लिए काबिलियत की जरूरत पड़ती है, जिसकी कमी कम-से-कम बॉलिवुड में तो नहीं है। बॉलिवुड सितारे भी इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि उनके कॅरियर की सबसे मुश्किल भूमिका वहीं होती है जिसमें उन्हें दर्शकों को हंसाने का काम सौंपा जाता है। राजू श्रीवास्तव ने प्रतिभा, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प से यह विलक्षण कार्य किया। कला का दायरा सारे बंधनों से परे है। राजू श्रीवास्तव खुद को सिर्फ हीरो नहीं बल्कि एक हास्य अभिनेता के रूप में स्थापित करना चाहते थें। वे भारत के प्रसिद्ध हास्य कलाकार थे। वे मुख्यतः आम आदमी और रोज़मर्रा की छोटी-छोटी घटनाओं पर व्यंग्य सुनाने के लिये जाने जाते थे।
              राजू श्रीवास्तव का जन्म 25 दिसम्बर, 1963 को कानपुर में हुआ था। इनके पिता रमेश चंद्र श्रीवास्तव को बलाई काका कहा जाता था, क्योंकि वह एक कवि थे। उनके माता का नाम सरस्वती श्रीवास्तव हैं। राजू श्रीवास्तव ने शिखा श्रीवास्तव से शादी की हैं। उनका एक बीटा आयुष्मान श्रीवास्तव और बेटी अंतरा श्रीवास्तव हैं। राजू श्रीवास्तव बचपन से ही कॉमेडी करते थे और इसी में भविष्य बनाने की सोची। इन्होने बचपन से ही स्टेज शो करने लगे। उनका वास्तविक नाम सूर्यप्रकाश श्रीवास्तव था। वे गजोधर और राजू भैया के नाम से जाने जाते थे। दरअसल, राजू के ननिहाल में गजोधर नामक एक नाई था, जिससे वे अपने बाल कटवाते थे। राजू की मशहूर भूमिकाओं में एक गजोधर की भूमिका थी। उनके पसंदीदा अभिनेता अमिताभ बच्चन थे। जब राजू पहली बार मुम्बई आये थे तो उन्होंने अमिताभ बच्चन की नकल करके ख्याति प्राप्त की थी। राजू श्रीवास्तव 1993 से हास्य की दुनिया में काम कर रहे थे। उन्होंने कल्यानजी आनंदजी, बप्पी लाहिड़ी एवं नितिन मुकेश जैसे कलाकारों के साथ भारत व विदेश में अनेक स्टेज शो में काम किया है। वह अपनी कुशल मिमिक्री के लिए जाने जाते हैं। उनको असली सफलता ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज से मिली। इस शो में अपने कमाल के प्रदर्शन की बदौलत वह जन-जन एवं घर-घर में सबकी जुबान पर छा गए। उन्होंने बिग बॉस 3 में हिस्सा लिया और 2 महीने तक घर में सबको गुदगुदाने के बाद 4 दिसम्बर 2009 को वोट आउट कर गए। उन्होंने अन्य टीवी धारावाहिकों जैसे शक्तिमान, बिग बॉस, कॉमेडी का महा मुकाबला, कॉमेडी सर्कस, कॉमेडी नाइट्स विद कपिल, इत्यादि में कार्य किया।
      1988 ई में रिलीज फ़िल्म ‘तेज़ाब’ से राजू श्रीवास्तव ने अपने अभिनय की शुरुआत की थी। उसके बाद कई बॉलीवुड फिल्मों जैसे-मैंने प्यार किया, बाज़ीगर, आमदनी अट्ठनी खर्चा रुपैया, बिग ब्रदर, बॉम्बे टू गोवा आदि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कई टीवी धारावाहिकों में भी कार्य किया। उन्होंने मच्छर चालीसा को बनाया, जिसके चलते उन्हें हिंदू कट्टरपंथियों द्वारा कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, क्योंकि वह हिंदू देवता व्यंग करते थे। इसी तरह और एक बार पाकिस्तान से कई धमकी भरेे फोन कॉल आई, उन्हें चेतावनी दी गई कि वह अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम पर चुटकुले न करें। इस तरह संघर्षों एवं संकटों से भरे जीवन में वे एक मंझे हुए कलाकार होने के साथ-साथ एक बेहद ज़िंदादिल इंसान भी थे। सामाजिक क्षेत्र में भी वे काफ़ी सक्रिय रहते थे।
    राजू श्रीवास्तव के कुशल राजनीतिज्ञ भी बनने की लालसा रखते रहे। इसके चलते उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने  वर्ष 2014 के लोकसभा में कानपुर की सीट से उन्हें चुनाव-मैदान में उतारा था। हालांकि, बाद में 18 मार्च 2014 को राजू श्रीवास्तव ने टिकट वापस कर दिया था। और बाद 19 मार्च 2014 को वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गये थे। तभी से वे भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में कार्य करते रहे। 10 अगस्त 2022 को दिल्ली के कल्ट जिम में ट्रेडमिल व्यायाम करते समय राजू श्रीवास्तव को  दिल का दौरा पड़ा और उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था।
    राजू श्रीवास्तव को हम भारतीय सिनेमा का उज्ज्वल नक्षत्र कह सकते हैं, वे चित्रता में मित्रता के प्रतीक थे तो गहन मानवीय चेतना के चितेरे जुझारु, नीडर, साहसिक एवं प्रखर व्यक्तित्व थे। वे एक ऐसे बहुआयामी व्यक्तित्व थे, जिन्हें अभिनय एवं हास्य जगत का एक यशस्वी योद्धा माना जाता है। उन्होंने आमजन के बीच, हर जगह अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया। लाखों-लाखों की भीड़ में कोई-कोई राजू जैसा विलक्षण एवं प्रतिभाशाली व्यक्ति अभिनय-विकास की प्रयोगशाला में विभिन्न प्रशिक्षणों-परीक्षणों से गुजरकर महानता का वरन करता है, विकास के उच्च शिखरों पर आरूढ़ होता है और अपनी अनूठी अभिनय क्षमता, मौलिक सोच, कर्मठता, जिजीविषा, पुरुषार्थ एवं राष्ट्र-भावना से सिनेमा-जगत, समाज एवं राष्ट्र को अभिप्रेरित करता है। वे भारतीय फिल्म-जगत एवं हास्य-जगत का एक आदर्श चेहरा थे। देश और देशवासियों के लिये कुछ खास करने का जज्बा उनमें कूट-कूट कर भरा था। वे कोरोना महासंकट के समय अनेक सेवा-कार्यों के लिये चर्चा में थे। देश की एकता एवं अखण्डता को खंडित करने की घटनाओं पर उनके भीतर एक ज्वार उफनने लगता और इसकी वे अभिव्यक्ति भी साहस से करते, जिसके कारण इन वर्षों में उनका एक नया स्वरूप उभरा।
    राजू श्रीवास्तव एक ऐसे जीवन की दास्तान है जिन्होंने अपने जीवन को बिन्दु से सिन्धु बनाया है। उनके जीवन की दास्तान को पढ़ते हुए जीवन के बारे में एक नई सोच पैदा होती है। जीवन सभी जीते हैं पर सार्थक जीवन जीने की कला बहुत कम व्यक्ति जान पाते हैं। लोगों को हंसाने एवं खुशियां देने का विरल काम करने वाले राजू के जीवन कथानक की प्रस्तुति को देखते हुए सुखद आश्चर्य होता है एवं प्रेरणा मिलती है कि जीवन आदर्शों के माध्यम से भारतीय सिनेमा, राजनीति, पारिवारिक, सामाजिक, राष्ट्रीय और वैयक्तिक जीवन की अनेक सार्थक दिशाएँ उद्घाटित की जा सकती हैं। उन्होंने व्यापक संदर्भों में जीवन के सार्थक आयामों को प्रकट किया है, वे आदर्श जीवन का एक अनुकरणीय उदाहरण हैं, उनके जीवन से कुछ नया करने, कुछ मौलिक सोचने, समाज को मूल्य प्रेरित बनाने, सेवा का संसार रचने, सद्प्रवृत्तियों को जागृत करने की प्रेरणा मिलती रहेगी। उनके जीवन से जुड़ी विधायक धारणा और यथार्थपरक सोच ऐसे शक्तिशाली हथियार थे जिसका वार कभी खाली नहीं गया। वे जितने उच्च नैतिक-चारित्रिक व्यक्तित्व एवं नायक थे, उससे अधिक मानवीय एवं सामाजिक थे। उनका निधन एक जीवंत, हास्यभरी, प्यारभरी सोच के कला का अंत है। वे सिद्धांतों एवं आदर्शों पर जीने वाले व्यक्तियों की श्रृंखला के प्रतीक थे। आपके जीवन की खिड़कियाँ सिनेमा-जगत, हास्य-जगत, समाज एवं राष्ट्र को नई दृष्टि देने के लिए सदैव खुली रही। उनकी सहजता और सरलता में गोता लगाने से ज्ञात होता है कि वे गहरे मानवीय सरोकार से ओतप्रोत एक अल्हड़ व्यक्तित्व थे। बेशक राजू श्रीवास्तव अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन अपने सफल, सार्थक एवं जीवंत अभिनय के दम पर वे हमेशा भारतीय सिनेमा एवं हास्य जगत के आसमान में एक सितारे की तरह टिमटिमाते रहेंगे।

    ललित गर्ग
    ललित गर्ग
    स्वतंत्र वेब लेखक

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