लेखक परिचय

डॉ. शुभ्रता मिश्रा

डॉ. शुभ्रता मिश्रा

डॉ. शुभ्रता मिश्रा वर्तमान में गोवा में हिन्दी के क्षेत्र में सक्रिय लेखन कार्य कर रही हैं। डॉ. मिश्रा के हिन्दी में वैज्ञानिक लेख विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं । उनकी अनेक हिन्दी कविताएँ विभिन्न कविता-संग्रहों में संकलित हैं। डॉ. मिश्रा की अँग्रेजी भाषा में वनस्पतिशास्त्र व पर्यावरणविज्ञान से संबंधित 15 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । उनकी पुस्तक "भारतीय अंटार्कटिक संभारतंत्र" को राजभाषा विभाग के "राजीव गाँधी ज्ञान-विज्ञान मौलिक पुस्तक लेखन पुरस्कार-2012" से सम्मानित किया गया है । उनकी एक और पुस्तक "धारा 370 मुक्त कश्मीर यथार्थ से स्वप्न की ओर" देश के प्रतिष्ठित वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित हुई है । मध्यप्रदेश हिन्दी प्रचार प्रसार परिषद् और जे एम डी पब्लिकेशन (दिल्ली) द्वारा संयुक्तरुप से डॉ. शुभ्रता मिश्रा के साहित्यिक योगदान के लिए उनको नारी गौरव सम्मान प्रदान किया गया है।

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डॉ. शुभ्रता मिश्रा

कौशल और कुशलता के पैमानों पर ही किसी राष्ट्र की समृद्धता और प्रसन्नता निर्भर करती है। संयुक्त राष्ट्रसंघ ने हाल ही में किसी देश की प्रतिव्यक्ति आय, सकल घरेलू उत्पाद, स्वास्थ्य, जीवन प्रत्याशा, उदारता, आशावादिता, सामाजिक समर्थन, सरकार और व्यापार में भ्रष्टाचार की स्थिति आदि के मापदण्डों के आधार पर विश्वस्तर पर विभिन्न देशों की प्रसन्नता का मापन किया। इस विश्व प्रसन्नता रिपोर्ट में भारत का स्थान चीन, पाकिस्तान और नेपाल से भी पीछे पाया गया है। यह अवलोकन निश्चितरुप से भारत के लिए शोक और चिंता का विषय है, क्योंकि देश में इस अप्रसन्नता की जड़ें कहीं न कहीं हमारी सामाजिक सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा की असंतोषप्रद स्थितियों पर जाकर ठहरती हैं। वस्तुत: देश में प्रसन्नता का स्तर बढ़ाने के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के एक मनोवैज्ञानिक शोध की तर्ज पर जीवन की परिस्थितियों और उनकी गुणवत्ता बढ़ाने में निजी प्रयासों के सामंजस्य को बनाए रखना अतिआवश्यक हो गया है। प्रसन्नता संतोष पर निर्भर करती है और संतोष कौशल की सफलता पर टिका होता है। उच्‍च स्‍तरीय कौशल का सम्यक विकास किसी भी देश के आर्थिक और सामाजिक विकास की कुशलता और अंततः प्रसन्नता का सबसे बड़ा कारक होता है।
सम्भवतः भारत की इसी कुशलता और प्रसन्नता को चिरस्थायी बना सकने के लिए देश के विकास संबंधी अनेक कार्यक्रम जैसे: ‘डिजीटल इंडिया’, ‘मेक इन इंडिया’ ‘स्किल इंडिया’ आदि चलाए जा रहे हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण ‘स्किल इंडिया’ के तहत भारत में युवा कौशल विकास मिशन की शुरुआत है। इसके तहत राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद, नीति आयोग और राष्ट्रीय कौशल विकास निगम कार्यरत हैं। ये तीनों संस्थान मिलकर न केवल देश में किए जा रहे कौशल विकास प्रयासों को नीतिगत दिशा दे रहे हैं, बल्कि उनकी समीक्षा के साथ साथ संबंधित नियमों को लागू करने के लिए रणनीतियों पर कार्य भी कर रहे हैं। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) एक गैर-लाभ वाली कंपनी के रुप में काम करते हुए गैर संगठित क्षेत्र समेत श्रम बाजार के लिए कौशल प्रशिक्षण की आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस मिशन में उद्यमी संस्थाओं के साथ पूरे भारत में कार्यरत सभी गैर-सरकारी संस्थानों को भी जोड़ा गया है। भारत को कौशल का वैश्विक केन्द्र बनाने और रोजगार की समस्या के समाधान के लिए कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) स्थापित किया गया है। इससे पहले कौशल विकास योजनाएं 20 मंत्रालयों द्वारा संचालित की जाती थीं, लेकिन अब इसे एक मंत्रालय द्वारा ही संचालित किया जा रहा है, जो बहुत ही चुनौतीपूर्ण कार्य है।
“कुशल भारत, कौशल भारत” की इसी चुनौती को स्वीकार कर ही विकसित भारत की संकल्पना को साकार किया जा सकता है। प्रतिभावान, उच्च कौशल वाले और नवीन विचारों से पूर्ण भारतीय युवा के अभिनव विचारों का समुचित उपयोग कर ही भारत रोजगार सृजन की संभावनाओं को पूरा कर सकता है। रोजगार के लिए उपयुक्‍त कौशल प्राप्‍त युवा राष्ट्रीय परिवर्तन के सच्चे प्रतिनिधि और कौशल संवाहक सिद्ध हो सकते हैं। इसके लिए व्यापक स्तर पर रोजगार सृजन हेतु युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देना महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत की मूल समस्या रोजगार सृजन की ही रही है। वास्तव में इस समस्या को मूल में रखकर युवा कौशल विकास के लिए अनेक योजनाएं जैसे राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन, कौशल विकास और उद्यमिता के लिये राष्ट्रीय नीति, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, अप्रेंटिस प्रोत्साहन योजना, उद्यमिता, कौशल विकास पहल योजना, शिल्पकार प्रशिक्षण योजना, क्राफ्ट अनुदेशक प्रशिक्षण योजना और कौशल ऋण योजना आदि काम कर रही हैं।
भारत में ऐसे बहुत से बच्चे और युवा मिल जाएंगे जिनको परिस्थितिवश या किन्हीं कारणोंवश स्कूल या कॉलेज छोड़ देना पड़ता है। ऐसे ही गरीब व वंचित युवाओं को कौशल भारत – कुशल भारत मिशन के माध्यम से परंपरागत कौशल की विभिन्न श्रेणियों जैसे हस्तशिल्प, कृषि, बागवानी, पशुपालन, वृक्षारोपण, कृषि यंत्रों की मरम्मत, गाड़ी चलाना, कपड़े सिलना, खाना बनाना, साफ-सफाई करना, मकैनिक का काम करना, बाल काटना आदि में आधुनिक तकनीक के प्रशिक्षण के संबंध में प्रशिक्षित करके प्रमाण-पत्र दिया जाता है, जो सभी सरकारी व निजी, यहाँ तक कि विदेशी संगठनों, संस्थाओं और उद्यमों के लिए भी वैध है। इसके अलावा इस मिशन द्वारा गाँव के लोगों को उनकी आय को बढ़ाने और उनके जीवन स्तर में सुधार करने के लिये प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। गुणवत्ता और कौशल प्रशिक्षण योग्यता की निरंतरता को सुनिश्चित करने के लिए कौशल के आकलन और प्रमाणन के लिए राष्ट्रीय बोर्ड की स्थापना की गई है। इसका काम देश में कौशल विकास के प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के माध्यम से परीक्षाएं लेना, राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाण देना एवं आकलन करना है। आँकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के साझेदारों ने पिछले दो वर्षों में 60,78,999 को प्रशिक्षित किया है और लगभग 19,273,48 लोगों को रोजगार दिलाया है। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम ने अब तक 80.33 लाख युवा विद्यार्थियों को प्रशिक्षित भी किया है।
दुनिया में भारत युवाओं के देश के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यहां की जनसंख्या का 62 प्रतिशत 15 से 59 वर्ष के बीच की आयुवर्ग का है। यहां तक कि 25 वर्ष से कम आयु वाले लोगों का जनसाँख्यकीय आंकड़ा भी लगभग 54 प्रतिशत आंका गया है। भारत की कौशल महत्वकांक्षाओं की पूर्ति में यह युवा संपदा अत्यधिक लाभप्रद साबित हो सकती है। पिछले अनेक दशकों से भारत अभूतपूर्व आर्थिक रूपांतरण के दौर से गुजर रहा है परन्तु फिर भी युवा बेरोजगारी ने देश में लाखों युवाओं को घर पर बैठने के लिए मजबूर कर रखा है। संयुक्त राष्ट्र श्रम संगठन (आईएलओ) ने ‘2017 में वैश्विक रोजगार एवं सामाजिक दृष्टिकोण’ पर जारी की अपनी एक रिपोर्ट में भारत के संदर्भ में आशंका जताते हुए उल्लेख किया है कि भारत में वर्ष 2017 और 2018 के मध्य रोजगार सृजन में बाधा आएगी और बेरोजगारी बढ़ेगी। इसी तरह पिछले साल ‘एस्पाइरिंग माइंड्स’ की ‘नेशनल इम्पालयबिलिटी रिपोर्ट’ में कहा गया था कि भारत में इंजीनियरिंग डिग्री रखने वाले युवा स्नातकों में कुशलता की बेहद कमी है और उनमें से करीब अस्सी प्रतिशत स्नातक रोजगार के लायक ही नहीं हैं। इसी तरह के एक और सर्वेक्षण में पाया गया था कि देश के लगभग साढ़े पांच हजार बिजनेस स्कूलों में से सरकार द्वारा संचालित भारतीय प्रबंध संस्थानों तथा कुछ अन्य गैरसरकारी संस्थाओं को छोड़ कर शेष सभी स्कूलों व संस्थाओं से डिग्री लेकर निकलने वाले अधिकतर युवाओं में कौशल होता ही नहीं है।
देश के युवाओं के कौशल पर प्रश्नचिन्ह लगाने वाली ऐसी ही विकट परिस्थितियों से निपटने में 15 जुलाई 2015 को शुरु की गई “प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना” कुछ राहत दिलाने का प्रयास कर रही है। इस योजना का लक्ष्य वास्तव में व्यावहारिक स्तर पर पूरे भारत के लगभग 40 करोड़ युवाओं को विभिन्न योजनाओं के तहत सन् 2022 तक प्रशिक्षित करना है। इस योजना के अन्तर्गत आवंटित बजट के रूप में 12,000 करोड़ रूपये खर्च किये जाना है और 10 लाख से अधिक लोगो को रोजगार का लाभ दिया जाना है। इसके अतिरिक्त इस विकास योजना का उद्देश्य भारतीय युवाओं में उनके कौशल के विकास के साथ-साथ उनका मूल्य संवर्धन करना भी है। यह देश में युवाओं के कौशल प्रशिक्षण के लिए एक प्रमुख योजना है। इसके तहत पाठ्यक्रमों में सुधार, बेहतर शिक्षण और प्रशिक्षित शिक्षकों पर विशेष जोर दिया गया है। प्रशिक्षण में अन्‍य पहलुओं के साथ व्‍यवहार कुशलता और व्‍यवहार में परिवर्तन भी शामिल है। इसके तहत प्रारम्भ में 24 लाख युवाओं को प्रशिक्षण के दायरे में लाया गया है। इसका कौशल प्रशिक्षण नेशनल स्‍किल क्‍वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएसक्‍यूएफ) और उद्योग द्वारा तय मानदंडों पर आधारित है। इसमें तृतीय पक्ष आकलन संस्‍थाओं द्वारा मूल्‍यांकन और प्रमाण पत्र के आधार पर प्रशिक्षुओं को नकद पारितोषिक दिए जाते हैं। नकद पारितोषिक औसतन 8,000 रूपए प्रति प्रशिक्षु तय किया गया है। भारत में परंपरागत शिक्षा पाठ्यक्रम प्रचलन के कारण बेरोजगारी शुरु से ही एक बड़ी समस्या रही है। इस योजना के तहत देश में तकनीकी शिक्षण प्रक्रिया में सुधार लाकर विश्व में तेजी से हो रहे परिवर्तनों के साथ अपने आप को गतिशील बनाते हुए शैक्षिक पाठ्यक्रम में विश्व मांग के अनुसार बदलाव करते हुए कौशल के आधार पर युवाओं को प्रशिक्षित किए जाने और रोजगार के अधिकाधिक अवसर प्रदान किए जाने के लक्ष्य रखे गए हैं।
आजकल देश के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्रों तथा सभी व्यावसायिक व तकनीकी स्कूलों और पोलिटेक्निक व अन्य व्यावसायिक कॉलेजों में युवा कौशल विकास के लिए अध्ययन प्रवर्तन उद्यमों से लेकर अनेक औपचारिक एवम् अनौपचारिक प्रशिक्षणों द्वारा स्व-रोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए ई-लर्निंग और वेब-आधारित तथा दूरस्थ अध्ययन आधारित कौशल विकास प्रशिक्षणों की सुविधाएं दी जा रही हैं। देश के विभिन्न राज्यों में अनेक ऑनलाइन कौशल विकास केंद्रों को खोला जा रहा है। हाल ही में झारखंड में 35 कौशल विकास केंद्रों की शुरुआत राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा की गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एमएसडीई ने ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात जैसे आदि देशों के साथ अपने बेहतरीन कामों के आदान-प्रदान एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के संरेखण को सुनिश्चित किया है। देश में औद्योगिक प्रशिक्षण उन्नत बनाने के लिए एमएसडीई ने न केवल मौद्रिक समर्थन बल्कि बेहतरीन नीतियों को लागू करने को लेकर विश्व बैंक के साथ साझेदारी भी की है।
पूरे देश में गांवों से लेकर कस्बों, नगरों, शहरों और महागनरों तक युवाओं में कौशल विकास के लिए कार्यनीतिक विस्तार योजनाओं को विस्तार दिया जा रहा है। कौशल विकास द्वारा आर्थिक विकास की प्रक्रिया को वास्तव में एक जन क्रांति का रूप दिया जा सकता है। इनसे लोग अपनी रोजगार समस्याओं का निर्धारण करके तदनुरूप कार्रवाई के माध्यम से अपने दृष्टिकोण में लाभप्रद परिवर्तन एवम् मूल्यांकन करते हुए उनके लिए वांछनीय समाधान तय कर पा रहे हैं। इससे युवाओं और उनके परिवारों को बेहतर और अधिक लाभप्रद जीवन जीने के लिए अधिकतम अवसर मिलने लगे हैं। वे अपने कौशल में सर्वोच्च प्रवीणता बनाए रखने के लिए प्रासंगिक और निरंतर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। व्यापक रोजगार सृजित करने वाले क्षेत्रों जैसे वस्त्र एवं परिधान, चमड़ा एवं फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और हथकरघा एवं हस्तशिल्प में युवाओं की भागीदारी बढ़ रही है। इसके साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी हार्डवेयर एवं इलेक्ट्रॉनिकी जैसे विनिर्माण वाली प्रौद्योगिकी क्षमताओं और दूरसंचार उपकरण, एयरोस्पेस, नौवहन और रक्षा उपकरण जैसे सुरक्षा क्षेत्रों की ओर भी भारतीय युवाओं का रुझान बढ़ा है।
युवाओं में निरंतर जाग रहे इस कौशल आत्मविश्वास से देश में बेरोजगारी की समस्या और गरीबी निःसंदेह समाप्त हो जाएगी। इससे लघु औद्योगिक उत्पादकता में होने वाली भावी वृद्धि का सीधा सीधा असर प्रति व्यक्ति आय पर पड़ेगा और राष्ट्रीय आय में भी वृद्धि होगी। वह दिन दूर नहीं जब भारत की कुशल युवाशक्ति अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर भी विश्व बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करेगी और हमारा देश विश्व का कौशल किरीट पहनकर कुशल समृद्धी का कुबेर बनेगा।

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