राम के देश में रामनाम का स्मरण आचार संहिता का उल्लंघन!

-नरेश भारतीय-
Modi's rally in Faizabad

सही मायनों में रामराज्य ही देश के शासकीय नेतृत्व का संबल बन सकता है, क्योंकि भारत में यही सर्वपंथ सम्भाव संरक्षक राजधर्म है। इसीलिए गांधीजी ने स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात इसी की स्थापना का स्वप्न देखा था। देश के लिए वह दिन अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण होगा जब वोटबैंक राजनीति के लिए छद्म- सेकुलरवाद के आवरण में भारत के राम को देशनिकाला देने का षड्यंत्र करने वालों के प्रयासों को जनता सफल होने देगी। राम भारत की आत्मा की वाणी हैं और उसी अंतरआत्मा के निर्देशानुगत ही देश में असली मायनों में सर्वधर्मपंथ समभाव पनप सकता है।

जिस धर्मनिरपेक्षता की कांग्रेस और कुछ अन्य दलों के द्वारा अपने लिए समाज के किसी एक वर्ग विशेष का समर्थन सुरक्षित करने हेतु बार बार दुहाई दी जाती है अत्यंत भ्रामक, प्रपंचक और विभाजीय राजनीति है। इसकी आड़ में ही ऎसी समाज विभाजक साम्प्रदायिकता को पनपने दिया गया है जिसमें बहु-संख्यकवाद और अल्प-संख्यकवाद की अवधारणा को बल मिला है। कांग्रेस ने अनेक वर्षों से इसी के बल पर अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए वोटबैंक की राजनीति का देश के लिए अहितकर खेल खेला है। इसका अंत होना अवश्यम्भावी है, क्योंकि इसके बने रहने में देश का दीर्घकालिक हित नहीं हो सकता।

जाति, पंथ, रंग और लिंग के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव न करने वाली सर्वसमाज हित रक्षक शासकीय व्यवस्था ही रामराज्य की परिभाषा में आती है। कांग्रेस ने उनके इस स्वप्न को वोटबैंक की विभाजीय स्वार्थपूर्ण राजनीति करके भंग कर दिया। आज राम की जन्मभूमि पर फैज़ाबाद में बोलते हुए देश के अगले संभावित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे साकार करने का आश्वासन देश को दिया है। उनका कहना है कि वे देश को हिन्दू मुस्लिम में बांटकर नहीं देखते बल्कि एक देश के रूप में देखते हैं। यही है भारत के योग्य शासकीय नेतृत्व का राजधर्म जो देश के पूर्व प्रधानमंत्री भाजपा के ही माननीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पूरी तरह निभाया था।

1 thought on “राम के देश में रामनाम का स्मरण आचार संहिता का उल्लंघन!

  1. कोई भी अयोध्या जाएगा उसे राम ही याद आयेंगे। पूरे भारत में नमस्कार, धिक्कार, विदाई आदि सभी के लिये राम राम ही कहते हैं। चुनाव आयोग के अनुसार इसका प्रायश्चित क्या हो सकता है-सेक्यूलर प्रेस द्वारा प्रकाशित रावण सहस्रनाम या मेघनाद कवच का जप और उनके सिद्धान्तों पर चलने की शपथ।

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