लेखक परिचय

डॉ. अनिल जैन

डॉ. अनिल जैन

डॉ अनिल जैन जी का सामाजिक परिचय उनके विद्यार्थी जीवन काल से ही प्रारंभ हो जाता है,जब उन्होंने लखनऊ में मेडिकल की अपनी पढाई के साथ-साथ छात्रों की आवाज़ को मजबूत किया | पढाई पूरी करने के पश्चात् आपने झारखण्ड के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में वनबंधुओं के बीच कई वर्षों तक समाजसेवा का कार्य किया | रचनात्मकता और सामाजिक जीवन के अनुभव ने राजनीतिक जीवनधारा की दिशा प्रदान की | अपने चिकित्सकीय सेवा को भी जारी रखते हुए वर्तमान में आप इन्द्रप्रस्थ अपोलो हास्पिटल, दिल्ली में सीनियर कंसल्टेंट सर्जन हैं तथा भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य व जम्मू-कश्मीर के सह प्रभारी हैं | आप भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के अखिल भारतीय संयोजक तथा उत्तराखंड के सह प्रभारी के दायित्व में भी रह चुकें हैं |

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डॉ अनिल जैन

आरक्षण समाज निर्माण का औजार बने, समाज को टुकड़ों में बटने वाला हथियार नहीं |

एक चिकित्सक के रूप में हम यह कह सकते हैं कि शरीर के किसी अंग के कमजोर होने या उसमें कोई दोष उत्पन्न होने के स्थिति में अन्य अंगों के वनिस्पत रोगग्रस्त अंग का इलाज पहले और जल्दी करना पूरे शरीर को स्वस्थ रखने के दृष्टि से जरुरी होता है | समाज के स्वास्थ्य का ख्याल भी कुछ उसी प्रकार रखना जरुरी है | सामाजिक-आर्थिक आधार पर हमारे भारतीय समाज के भूत,वर्तमान और भविष्य पर चर्चा जरुरी है, जिससे कि आरक्षण भविष्य में देश के तरक्की का आलंबन बने, न कि सामाजिक मज़बूरी रूपी अपंगता की वैशाखी | सनातन शब्द निरंतरता का प्रतिक है जिसमें कोई ठहराव भी नहीं है और कोई हठधर्मिता भी नहीं | इसीलिए सनातन जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में परिवर्तन सहज है | भारत की सांस्कृतिक धारा का पहचान वही है किन्तु समयानुरूप इसके सामाजिक, आर्थिक, और राजनीतिक प्रवाह में कई मोड़ भी दिखता है | हिंदी साहित्य की मूर्धन्य विदुषी महादेवी वर्मा अपने पुस्तक ‘भारतीय संस्कृति के स्वर’ में लिखतीं हैं कि भारतीय सांस्कृतिक धारा के किसी एक मोड़ पर खड़े होकर पीछे की धारा का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है, उसके वास्तविकता का साक्षात्कार करना दुर्लभ है क्यों की यह धारा तो सनातन है | भारतीय समाज में हुए किसी भी बदलाव को जब हम इस नदी के प्रवाह के रूप में देखेंगे तो पाएंगे कि बहुत सी बातें सिर्फ अनुमानित हीं है, जिसे हम इतिहास के रूप में पढ़ रहे हैं | कुछ प्रमाणों के आधार पर भारत का सामाजिक इतिहास अब 5000 वर्ष की हो गई है,जिसे वामपंथी इतिहासकार भी मानने लगे हैं | लेकिन स्मृतियों, संहिताओं, पुराणों और वेद के काल पर कोई निश्चितता नहीं बन पाई है | और यह सत्य है कि इन ग्रंथों का रचना काल पाँच हजार वर्ष से भी अधिक है | साथ हीं इन ग्रंथों में वर्णित समाज का काल ग्रन्थ के रचना काल से भी कहीं ज्यादा है | ऐसे में सामाजिक ढांचें और उसमें हुए निरंतर बदलाव का अध्ययन भी वैदिक काल से होना अपरिहार्य है | आरक्षण का लाभ सिर्फ जरुरतमंदों को ही मिलना चाहिए और जरुरतमंद कौन है इसका निर्धारण उसके जाति,पंथ या क्षेत्रीयता से नहीं हो बल्कि उसके जीवन यापन के मूलभूत सुविधाओं के उपलब्धता और अनुपलब्धता के आधार पर हो | सैकड़ों वर्षों से दबे और सुविधाओं से वंचित अपने ही समाज के बंधू-बांधवों को वो सभी सुविधाएँ मिले जिससे की समाज में उनकी प्रतिष्ठा और आगे बढ़ने का समान अवसर उन्हें भी प्राप्त हो सके | आरक्षण सर्वांगीं विकास में सहायक हो, न कि समाज को जाति,पंथ या किसी अन्य मुद्दे पर बांटने का औजार बन जाय, यह भी ध्यान में रखने योग्य है | लेकिन एक और बात काफी महत्वपूर्ण है कि आरक्षण की जरुरत और आरक्षणवादी मानसिकता के फर्क को समझना होगा | सरकारी नौकरी में आरक्षण के आधार पर भर्ती के बाद पदोन्नति का आधार भी आरक्षण ही हो यह जरुरी नहीं है बल्कि पदोन्नति में अवसर की समानता का अधिकार लागू हो | आरक्षण के सबसे बड़े दोष को अर्थात क्रीमी लेयर को पहचानना और उसे हटाना भी जरुरी है ताकि उसी समाज के अन्य लोगों को सुविधा मिले और जल्दी ही आरक्षण विहीन समरस समाज की स्थापना हो | आरक्षण का मुद्दा आन्दोलन का रूप न ले साथ ही आरक्षण देश के तरक्की में भविष्य का सबसे बड़ा रोड़ा न बने | जब गरीब, गरीब ही रह जाये और जाति,पंथ के नाम पर आरक्षण लेने वाला तब भी आरक्षित बना रहे |

वास्तव में जरुरत हमारे सोच में बदलाव लाने की भी है | हम सब एक ही उदर से पैदा हुए हैं अर्थात हम सभी सहोदर है यदि ये भाव समाज में निहित हो जाये तो क्या हमारा समाज एक आदर्श समाज नहीं बन सकता ! जिस आदर्श समाज कि कल्पना मनु ने किया, जिस समर्थ समाज कि कल्पना चाणक्य ने किया | वह समाज में ‘सहोदर’ भाव की जाग्रति से संभव है | सरकारी सुविधाओं में आरक्षण मात्र से समाज के उस पिछड़े वर्ग का उत्थान नहीं होगा, बल्कि प्रत्येक समर्थ का यह कर्त्तव्य बनता है कि वह अपने उदारता,सहिष्णुता का परिचय दे और अपने सामर्थ्य के अनुरूप सामाजिक कार्यों में सहयोग सुनिश्चित करे |

 

2 Responses to “आरक्षण समाज निर्माण का औजार बने”

  1. pankaj

    आरछण की वैशाखी का सहारा लेने बाले देश की बढती प्रतिभा और बिकास में वाधा हें! देश में आजादी के बाद से ही आरछण की लड़ाई शुरू हो गई धर्म और जाति के नाम पर लोग आपस बटना शुरू हो गए लोगो को बाँटने का काम नेताओं ने भली भांति निभाया पहले तो हिन्दू और मुस्लिम के नाम पर और फिर जाति और धर्म के नाम पर देश का बिस्तार जेसे जेसे बड़ता गया वेसे वेसे देश की राजनीती में नेता और अलग अलग दल भी बड़ने लगे समय के साथ देश का बिकास धीमा होता गया और राजनेतिक दलों का बिकास होने लगा राजनेतिक दलों को ऐसा सत्ता का नशा चड़ा की वह देश के बिकास के बारे में भूल कर अपने बिकास के बारे में हर पल सोचने लगे और वही राजनेतिक दल जिनके नेताओं और कार्यकर्ताओं के पास दो जोड़ी कुर्ते नहीं पूजते थे आज कोर्पोरेट जेसे ऑफिस बनाए बेठे हे सभी राजनेतिक दलों के पास अपने अपने ढोल मंजीरे हे जिन्हे बजा कर बे जनता को बेवकूफ बनाते रहते हे हर पांच साल में नये राग अलापते हें देश के अलग अलग राज्यों से अपनी अपनी जाति को आरछण दिलाने की मांग को लेकर कोई न कोई नया नेता सड़क पर आन्दोलन करने उतर आता हे जिस आरछण को गरीबी अमीरी ,ऊँचनीच ,और धर्म का भेद भाव मिटाने का हथियार बनाया गया था वह आज लोगो की वैशाखी बन गया हें नेताओं ने इस वैशाखी का लालच देदे कर खूब सत्ता पर राज किया लोग इस बात को समझ नहीं सके की आरछण उनकी आने वाली नस्ल की प्रतिभाओ को निगल जायेगी और आने बाली नस्ल और भी ज्यादा अलाल और नक्कारा हो जायेगी
    देश में सत्ता पाने का नशा नेताओं पर सिर पर ऐसा चड़ा की बे सब भूल गए और उन्होंने देश की दिशा और दशा ही मोड़ दी जब भी देश में चुनाव होता हें तब राम मंदिर बनाने की बात सामने आ जाती हें जिसमे जनता का कोई मत नहीं लिया जाता नेता ही मंच पर चड़कर चिल्लाने लगते हें की इस बार मदिर बनकर रहेगा ये बीजेपी का मजबूत मुद्दा जिसे पिछले संसदीय चुनाव कम इस्तेमाल किया गया उस चुनाव में हिंदुत्व और कश्मीरी पंडितो का मुद्दा छाया रहा नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए हिंदुत्व का मुद्दा सबसे जयादा काम आया बीजेपी पूर्ण बहुमत से देश की सत्ता में काविज हो गई मोदी जी जल्द ही देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री में गिने जाने लगे लेकी नोटबंदी करके मोदी जी ने सारे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया तीन माह तक सारा देश कतार में लगा रहा लेकिन मोदी जी का साथ नहीं छोड़ा लेकिन नोटबंदी से जो नुक्सान देश को होगा उसको मोदी जी ने सोचा भी नहीं होगा मिडिया पर चाहे कितनी भी तारीफ मोदी जी बटोर ले लेकिन तीन महीने जो देश की ग्रोथ रुकी रही उसकी भरपाई आने बाले दस साल में भी नहीं हो सकती नोटबंदी ने उसी तरह देश की ग्रोथ रोकी जेसे कोई रफ़्तार में चलती हुई ट्रेन की चेन खींच देता हें प्राइवेट बेंको के कर्मचारियों ने भी जम का कमीसन खोरी की नोटबंदी में खेर अब ये बाते पुरानी हो चली हें हाल ही में देश के पांच राज्यों में चुनाव चल रहे थे जिसमे उत्तरप्रदेश में कुछ वोटिंग बाकी हें इन पांचो राज्यों में जाति के नाम पर अधिकतर वोट मांगे गये राजनेतिक दलों ने अपने अपने घोषणा पत्रों में किसानो ,मजदूरो और महिलाओं को लेकर जमकर घोषणाये की व्ही मोहन भागवत के व्यान ने उत्तरप्रदेश की राजनीती में भूचाल ला दिया बीजेपी के भी बड़े बड़े नेता इस व्यान का समर्थन करने से कतराने लगे और खुद प्रधानमंत्री मोदी जी को कहना पड़ा की आरछण कभी ख़त्म नहीं होगा बीजेपी का मानना हे की बिहार के चुनाव में इसी तरह के व्यान बीजेपी की हार का कारण बन गये थे अब बीजेपी इस तरह की कोई गलती करने के मुड में नहीं दिख रही वही कांग्रेस पार्टी जिसके पास न मुद्दे हे और नाही बफादार कार्यकर्त्ता वह तुरंत ही इस व्यान पर सक्रिय हो गई और मायाबती का तो कहना ही क्या था माया जी के पास तो जातिके अलावा कोई मुद्दा ही नहीं हे जिस पर बे चुनाव लड़ सके मायाबती के लिए तो भोले भाले दलितों को बहकाकर उनका शोषण करने का सबसे बड़ा हथियार हे आरछण!
    इन नेताओं को कोई ये क्यों नहीं बत्ताता की नोकरी और शिच्छा में पीछे रहने बालो को प्राथमिकता देना दोनों ही बच्चो को नुक्सान पहुचा रहा हें जिसको नोकरीऔर शिच्छा मिली वह केवल उतनी ही प्रतिभा को ध्यान में रखकर काम करेगा जिससे उसको सफलता मिली हे और जो आरछण की बजह से अपनी प्रतिभा में सफल होकर भी सफल न हो सका उस बच्चे के मन से निकली टीस कोन से नेता और किस दल की सरकार समझ पाएगी आज जो भी आरछण ख़त्म करने की बात करता हें वह्ननेताओ का दुश्मन बन जाता हें मायाबतीऔर नितीश कुमार जेसे लोग आरछण की बैशाखी थामे सत्ता तक पहुच जाते हें लेकिन देश की प्रतिभा को अपने पेरो से कुचलने बाले ये नेता ये भूल रहे हें की उनकी भी आने बाली नस्ले इस दंश को झलेगी और देश को कागजी आंकड़ो में तो बड़ता हुआ दिखाकर वाह वाही लूटी जा सकती हें लेकिन हकीकत क्या हें समझदार लोग जानते हें दुनिया का कोन सा देश हे जो प्रतिभा को कुचल कर जाति और धर्म के आधार पर बच्चो को सिच्छा बेरोजगारों को नोकरी और व्यापार करने वालो लों देता हें ध्यान रहे आरछण की वैसाखी लेकर चलने बालो हम स्वस्थ होकर भी अपने देश को बिक्लांग कर रहे हें

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  2. mahendra gupta

    आज आरक्षण समाज निर्माण का नहीं,सरकार निर्माण का औजार है,अंग्रेजों ने संप्रदाय के आधार पर सआज आरक्षण समाज निर्माण का नहीं,सरकार निर्माण का औजार है,अंग्रेजों ने संप्रदाय के आधार पर समाज और देश को दो फाड़ कर राज किया और उसी नीति को और ज्यादा गहराई से लागू कर कई भागों में फाड़ कर राज करने का नुस्खा इन निर्लज्ज नेताओं ने अपना लिया है,समाज के सभी तबकों तथा बुधिजीविओं को इस विषय पर आगे बढ़ कोई निर्णय करना चाहिए अन्यथा कुछ समय में देश गर्त में चला जायेगा.माज और देश को दो फाड़ कर राज किया और उसी नीति को और ज्यादा गहराई से लागू कर कई भागों में फाड़ कर राज करने का नुस्खा इन निर्लज्ज नेताओं ने अपना लिया है,समाज के सभी तबकों तथा बुधिजीविओं को इस विषय पर आगे बढ़ कोई निर्णय करना चाहिए अन्यथा कुछ समय में देश गर्त में चला जायेगा.

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