आरक्षण

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  मेरे गांव में एक दलित (चमार) है। लालजी राम उसका नाम है। उसकी पत्नी ने मेरी माँ की बहुत सेवा की थी। लालजी राम भी मेरे पिताजी के हर आदेश पर एक पैर पर खड़ा रहता था। वह लगभग रोज ही सवेरे मेरे घर आता था। आम के बगीचे की देखभाल उसी के जिम्मे… Read more »

आरक्षणः ओबीसी के कोटे के भीतर कोटा

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प्रमोद भार्गव पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिए जाने के प्रयास में विपक्ष ने रोड़ा अटकाया तो सरकार ने ओबीसी की विभिन्न वंचित जातियों में पैठ बनाने का रास्ता खोल लिया। केंद्रीय कैबिनेट ने ओबीसी की केंद्रीय सूची के वर्गीकरण के लिए आयोग बनाने के फैसले को मंजूरी दे दी। यानी इस वर्ग में… Read more »

आरक्षण बनाम शिक्षा में सुधार

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पिछले दिनों पांचजन्य साप्ताहिक में सरसंघचालक श्री मोहन भागवत का एक साक्षात्कार छपा, जो मुख्यतः दीनदयाल जी के विचारों पर केन्द्रित था। उसमें एक जगह उन्होंने कहा कि आरक्षण का लाभ जिन्हें मिलना चाहिए था, वह उतना नहीं मिल पा रहा है। अतः इस बात की समीक्षा होनी चाहिए कि डा. अम्बेडकर की भावना के… Read more »

आरक्षण समाज निर्माण का औजार बने

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डॉ अनिल जैन आरक्षण समाज निर्माण का औजार बने, समाज को टुकड़ों में बटने वाला हथियार नहीं | एक चिकित्सक के रूप में हम यह कह सकते हैं कि शरीर के किसी अंग के कमजोर होने या उसमें कोई दोष उत्पन्न होने के स्थिति में अन्य अंगों के वनिस्पत रोगग्रस्त अंग का इलाज पहले और… Read more »

आरक्षित उम्मीदवारों के मैरिट में चयन का औचित्य!

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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ कुछ समय पूर्व मैंने एक खबर पढी थी कि अजा, अजजा एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिये आरक्षित उनंचास फीसदी आरक्षित कोटे के अलावा शेष बचे सामान्य वर्ग के इक्यावन फीसदी पदों पर अजा, अजजा एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के तीस फीसदी प्रत्याशी मैरिट के आधार पर नियुक्त हो गये। इसे… Read more »

आरक्षण समानता और सुरक्षा के मन्त्र नहीं.

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नरेश भारतीय चर्चा सर्वत्र लोकपाल विधेयक को संसद में पेश करने और पारित करवाने की चल रही थी और इस बीच राजनीतिक धुरंधरों की नज़रें विधान सभा चुनावों पर जम रहीं थीं. जनता को लुभाने के लिए हर पार्टी अपने अपने धनुष की प्रत्यंचा पर तरह तरह के तीर चढ़ाती दिखाई पड़ रहीं थीं. यही… Read more »

आरक्षण

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संदीप उपाध्याय आरक्षण नाम सुनते ही, एक भयानक अनुभूति जैसा लगता है, हो सकता है कि मेरे साथ इस आरक्षण के कारण कई मौके चले गए है इसलिए ऐसा लगता है, हालाकि ये सिर्फ एक आदमी की कहानी नहीं हो सकती, जब आप किसी को उठाते है तो साथ में किसी को नीचे दबा भी… Read more »

आर्थिक संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर मिले आरक्षण

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सिद्धार्थ मिश्र स्वतंत्र अभी कुछ दिनों पूर्व योजना आयोग की रिर्पोट ने हंगामा खडा कर दिया है। लोग सोचने पर विवश हैं क्या …„ रूपए पर्याप्त हैं,व्यकित की रोजमर्रा के खानपान और जरूरतों के लिए । इस अल्प राशि में क्या खाएं क्या न खाएं,सोचकर लोगों का दिमाग भन्ना गया है। पत्रकारों और अन्य विशेषज्ञों… Read more »

आरक्षण के प्रश्न पर चुनावी मजबूरियां

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हरिकृ ष्ण निगम आज देश की राजनीति जिस तरह करवटें ले रही है और आरक्षण की चुनावी लाचारियों ने इस समस्या पर विमर्श के स्तर को इतना गिरा दिया है कि कुछ लोग धर्म के आधार पर भी आरक्षण की आवश्यकता को निर्लज्जतापूर्वक संविधान-सम्मत मानने लगे हैं। इसी तरह प्रकाश झा की हाल ही ‘आरक्षण’… Read more »

आरक्षण: दलितों में क्रीमीलेयर तो अभी गिनती के हैं!

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इक़बाल हिंदुस्तानी पिछड़ों का कोटा कम होने से इसकी ज़रूरत वहां वाजिब थी! देश में एक वर्ग ऐसा मौजूद है जो इस सच को आज भी समझने को तैयार नहीं है कि आरक्षण उसके साथ अन्याय नहीं बलिक उनके साथ आंशिक न्याय है जिनके साथ सदियों से या तो जानबूझकर नाइंसाफी की गयी है या… Read more »