लेखक परिचय

अनिल अनूप

अनिल अनूप

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार व ब्लॉगर हैं।

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-अनिल अनूप
योग गुरु रामदेव जो 4500 करोड़ रुपये के पतंजलि समूह का प्रमुख चेहरा है, उन्हें एक बार अमेरिका ने उनके कुंवारे होने और बैंक खाता नहीं होने की वजह से वीजा देने से मना कर दिया था. बाद में जब वह संयुक्त राष्ट्र को संबोधित कर रहे थे तो उन्होंने उन्हें बुलावा भेजा और 10 साल का वीजा भी दिया. गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय न्यूयॉर्क में है.
रामदेव ने इंदौर में मध्य प्रदेश सरकार के वैश्विक निवेशक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में बताया कि कैसे पहले उन्हें वीजा देने से मना किया गया और बाद में उन्हें वीजा दिया गया.
बाबा रामदेव का नाम रामकृष्ण यादव था, सन्यासी बनने के बाद उन्होंने अपना नाम स्वामी रामदेव रख लिया. स्कूल में पढाई उन्होंने आठवी तक की, उसके बाद उन्होंने अलग अलग गुरुकुल और गुरुओं के आश्रम में जाकर घर्म, वेद, ग्रंथों, योग और साहित्य के बारे में गहन चिंतन किया.
हरियाणा के खानपुर गाँव के एक आश्रम में रहने के दौरान वे वहां के लोगों को मुफ्त में योग की शिक्षा दिया करते थे. इसके बाद वे हरिद्वार चले गए और वहां के कांगरी विश्वविद्यालय एवं गुरुकुल में प्राचीन भारतीय शास्त्र का ज्ञान कई सालों तक अर्जित किया.
पढाई पूरी करने के बाद रामदेव जी ने दुनियावी बातें छोड़ सन्यास ले लिया. वे जींद गाँव में कालवा गुरुकुल में रहने लगे. यहाँ उन्होंने आसपास के लोगों को योग की शिक्षा देनी शुरू कर दी. इसके बाद माना जाता है कि वे हिमालय में जाकर कई सालों तक तप करते रहे. इसके बाद वे हरिद्वार में आकर बस गए.
स्वामी रामदेव ने स्वामी शंकरदेव जी महाराज से दीक्षा ली थी. इसके बाद वे प्राचीन शास्त्र का अध्यन करने लगे, साथ ही योग, ध्यान को अधिक समय देने लगे रामदेव ने सन 1995 में दिव्य योग्य मंदिर ट्रस्ट की शुरुवात की. आस्था चैनल पर ये प्रोग्राम रोज सुबह 5 बजे आया करता है, जिसे देश विदेश के कई लोग देखकर घर बैठे ही योग किया करते है. इस ट्रस्ट में उनका साथ आचार्य करमवीर व आचार्च बालकृष्ण ने दिया. इस ट्रस्ट का हेड ऑफिस हरिद्वार के कृपालु बाग आश्रम में स्थित है. बाबा रामदेव ज्यादातर योग की शिक्षा इसी आश्रम में दिया करते है. बाबा रामदेव के अथक प्रयासों से भारत में योग इतना प्रचलित हुआ, जिस वजह से भारत के द्वारा ही 21 जून को अन्तराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की शुरुवात की गई.
आज दुनिया के हर कोने में योग की महत्ता को लोग समझ रहे है.
दुनिया के नामी लोग बाबा रामदेव के योग प्रोग्राम से जुड़े हुए है. इन्होने बॉलीवुड के महान अभिनेता अमिताभ बच्चन व अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी को योग की शिक्षा दी है. रामदेव ऐसे पहले गैर-मुस्लिम समुदाय के है, जिन्होंने उत्तर प्रदेश के देवबंद जिले के मुस्लिम मौलवियों को योग की शिक्षा दी थी. रामदेव ने अमेरिका, जापान, ब्रिटेन जैसे बड़े देशों के लोगों को भी योग की शिक्षा दी. 2006 में कोफ्फी उन्नान के द्वारा बाबा रामदेव को सयुंक्त राष्ट्र सम्मलेन में गरीबी उन्मूलन पर एक व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया गया था. योगी हैदर पाकिस्तान में योगा सिखाते है, वे वहां योग के लिए जाने माने जाते है. उनका कहना है कि वे बाबा रामदेव का अनुसरण करते है, और जिस प्रकार बाबा रामदेव ने भारत में योग को इतना प्रचलित कर दिया है, वैसे ही वे पाकिस्तान में वे योग को एक प्रमुख स्थान दिलाना चाहते है.
बाबा रामदेव ने 2010 में भारत स्वाभिमान नाम की पोलिटिकल पार्टी बनाई. उस समय वे आने वाले चुनाव में हिस्सा लेना चाहते थे. लेकिन कुछ समय बाद ही उन्होंने घोषणा की कि वो सीधे राजनीती में आने में दिलचस्पी नहीं रखते है, बल्कि अपनी प्रतिक्रिया देकर लोगों को राजनीती की ओर आने को प्रभावित करेंगें. 2014 के बाद वे नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री कैम्पेन में जुड़ गए, और उनका समर्थन करने लगे.
2011 में बाबा रामदेव ने भारत को भ्रष्टाचार मुक्त करने और जन लोकपाल बिल को लागु करवाने के लिए रामलीला मैदान में अनशन किया. अनशन काफी दिन तक चला जिससे मनमोहन सिंह जी की सरकार पर काफी दबाब पड़ा. रामदेव की मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने भ्रष्टाचार रोकने की एक कमिटी का गठन किया. बाबा रामदेव पर उस समय बहुत से आरोप लगाये गए, उनके पतंजलि प्रोडक्ट में मिलावट की भी बात आई. बाबा रामदेव के दाहिने हाथ माने जाने वाले आचार्य बालकृष्ण पर नकली पासपोर्ट का आरोप लगा, और उन्हें नेपाल का रहने वाला बताया गया.
हरियाणा के महेन्द्रगढ़ जिले के अली सैयद पुर या अलीपुर गांव में राम निवास यादव और गुलाबो देवी के घर रामकृष्ण यादव का 26 दिसंबर, 1965 को जन्म ‍हुआ था। औपचारिक रूप से उनकी शिक्षा केवल 8वीं तक ही हुई है। इसके बाद उन्होंने भारत के धर्मग्रंथों, योग और संस्कृत का विभिन्न गुरुकुलों में अध्ययन किया। अंतत: वे संन्यासी बनकर बाबा रामदेव बन गए।
हरियाणा के जींद जिले के कलवा गुरुकुल में रहते हुए उन्होंने गांव वालों को मुफ्त योग का प्रशिक्षण दिया। बाद में वे उत्तराखंड के हरिद्वार चले गए और गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में उन्होंने योग और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया।
उन्हें प्रसिद्धि तब मिलना शुरू हुई जब उन्होंने दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट की स्थापना की और लोगों को योग की शिक्षा देने लगे। देश, विदेश की बड़ी हस्तियों के अलावा बहुत सारे लोगों ने उनके योग शिविरों में भाग लिया।
उन्होंने पहली बार सार्वजनिक तौर पर देवबंद के मुस्लिम धर्मगुरुओं को योग की शिक्षा दी। भारत में योग को प्रसिद्ध करने के अलावा उन्होंने ब्रिटेन, अमेरिका और जापान में भी योग को लोकप्रिय बनाया। भारत के अलावा वे अन्य देशों में भी लोकप्रिय हैं। उन्होंने पातंजलि योग पीठ को विदेशों में भी लोकप्रिय बनाया।
रामदेव ने कई अवसरों पर कहा है कि उनकी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है और कोई राजनीतिक पार्टी शुरू करने को लेकर वे उत्सुक नहीं हैं लेकिन उनका मानना है कि योग को लोकप्रिय बनाने के साथ यह भी उनका कर्तव्य है कि वे समाज में सुधार करें और देश को मजबूत बनाने के लिए राजनीति को स्वच्छ बनाने की कोशिश करें। वे वर्ष 2011 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन और जन लोकपाल को लेकर आंदोलन से भी जुड़े रहे हैं।
27 फरवरी 2011 को बाबा रामदेव ने रामलीला मैदान में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक रैली की थी जिसमें राम जेठमलानी, अण्णा हजारे, अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी, स्वामी अग्निवेश और अन्य लोग शामिल हुए थे। इस रैली से जुड़ी सबसे बड़ी बात यह थी कि सभी बड़े मीडिया हाउसेज ने इसका बहिष्कार किया था।
बाबा रामदेव भी विवादों के चलते चर्चित हुए हैं और उन पर भी बहुत सारे आरोप लगाए गए हैं। उन पर आरोप लगे कि वे कर चोरी करते हैं और उनके उत्पादों को अमेरिका में प्रतिबंधित कर दिया गया क्योंकि कुछ उत्पादों में कथित तौर पर पशुओं की हड्िडयां पाई गई थीं।
उन्हें मिलने वाली दान की राशि काला धन होती है। उनके करीबी सहयोगी आचार्य बालकृष्ण की नागरिकता नेपाली है और वे अपराधी हैं जो कि नेपाल में अपराध कर भारत भाग आए हैं। बालकृष्ण ने एक फर्जी पासपोर्ट ले रखा है और उन पर आर्म्स एक्ट के तहत भी एक मामला दर्ज किया गया है। उन पर यह भी आरोप लगाया गया है कि हरिद्वार में उनके आश्रम के लोगों ने आसपास के गांववासियों की जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया था।
बाबा रामदेव पर यह भी आरोप लगाया जाता है कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के मोहरे हैं ‍और उनकी शह पर वे सरकार के खिलाफ अनशन, प्रदर्शन और रैलियां करते हैं। उन पर यह आरोप भी लगा कि वे संघ के पैसे का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इस पर बाबा का कहना था कि प्रत्येक देशभक्त उनका समर्थक है और अगर संघ या इससे जुड़े लोग उनका समर्थन करते हैं तो वे कोई भी बने रहें उनको कोई फर्क नहीं पड़ता है।
शुरुआत में संघ परिवार ने उनकी रैलियों और प्रदर्शनों से दूरी बनाई, लेकिन बाद में संघ प्रमुख भागवत ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ आवाज उठाने को कहा है।
वे सैकड़ों कैंसर रोगियों को योग और अपनी दवाओं से ठीक करने का दावा करते हैं। उन्हें कई बड़ी शिक्षण संस्थाओं ने मानद डॉक्टरेट भी दी है जिनमें आई.आई.टी. भुवनेश्वर और एमिटी विश्वविद्यालय शामिल हैं।
हमेशा केसरिया कपड़े पहनने वाले बाबा रामदेव की सुरक्षा में छह पर्सनल कमांडो तैनात रहते हैं।
देश के सबसे बड़े योग गुरु के रूप में बाबा रामदेव ने अपनी पहचान बनाई।
उनका पतंजलि का प्रोडक्ट और पतंजलि योगपीठ आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है।
इसका मुख्यालय हरिद्वार में है। बाबा के पतंजलि ब्रांड की कीमत आज की तारीख में करीब 2000 करोड़ रुपए तक आंकी जाती है।
पतंजलि आयुर्वेद ने बड़े शहरों में फ्रेंचाइजी के जरिए अपने प्रोडक्ट बेचना शुरू किया था।
बाबा के बिजनेस का ये सिलसिला अब कॉस्मेटिक से लेकर किराना के अलावा हर तरह के घरेलू प्रोडक्ट तक पहुंच चुका है।
बाबा रामदेव का टारगेट है कि इस साल वे अपनी कंपनी को 5 हजार करोड़ तक पहुंचा देंगे।
हाल ही में बाबा रामदेव ने पतंजलि ब्रांड के प्रोडक्ट्स को बेचने के लिए किशोर बियाणी के शॉपिंग माल चेन से भी टाइअप किया। जेड प्लस सिक्युरिटी मिली हुई है।
उनके साथ हमेशा उनका एक पीए रहता है,जो बाबा के हर ऑर्डर को नोट करता है।
बाबा से मिलना हो तो पहले नाम,नंबर और मिलने का कारण बताना होता है।
बाबा सुबह जल्दी उठ जाते हैं और योग सिखाते हैं। वे दिन में पतंजलि की बिजनेस मॉनिटरिंग भी करते हैं।
बाबा का जागना,नाश्ता,खाना और सोना सब पहले से तय शेड्यूल के मुताबिक ही होता है।
बाबा कहीं भी जाएं,योग सिखाना कभी नहीं भूलते। यह भी बता दें कि उन्होंने संकल्प लिया है कि वे केवल हाथ से बने कपड़े ही पहनेंगे।
उनका कहना है इससे बुनकरों को रोजगार मिलेगा। बाबा मूल रूप से हरियाणा के हैं।
शुरुआती दिनों में बाबा यहां साइकिल से घूम-घूमकर च्यवनप्राश बेचते थे।
बाबा के पतंजलि ब्रांड की कीमत आज की तारीख में करीब 2000 करोड़ रुपए तक आंकी जाती है।
पतंजलि आयुर्वेद ने बड़े शहरों में फ्रेंचाइजी के जरिए अपने प्रोडक्ट बेचना शुरू किया था।
बाबा के बिजनेस का ये सिलसिला अब कॉस्मेटिक से लेकर किराना के अलावा हर तरह के घरेलू प्रोडक्ट तक पहुंच चुका है।
बाबा रामदेव का टारगेट है कि इस साल वे अपनी कंपनी को 5 हजार करोड़ तक पहुंचा देंगे।
हाल ही में बाबा रामदेव ने पतंजलि ब्रांड के प्रोडक्ट्स को बेचने के लिए किशोर बियाणी के शॉपिंग माल चेन से भी टाइअप किया।
-अनिल अनूप

One Response to “वाद विवादों मे रहनेवाले : बाबा रामदेव”

  1. आर. सिंह

    R.Singh

    बाबा रामदेव की प्रसशतिथोड़ी छोटी हो सकती थी,अगर आपने उनकी प्रशंसा में कहे गए वाक्यों को बार न दुहराया होता.ऐसे मैं यह सोच कर यह आलेख पढता गया कि आपने उनके इस व्यापार प्रबंधन पर भी कुछ प्रकाश डाला होगा , क्या यह अच्छा नहीं होता कि आप उसपर भी कुछ लिखते,क्योंकि एक ऐसा आदमी जिसे व्यापार का न कोई अनुभव हो और न वह ऐसे परिवार से आया हो ,जहाँ व्यापार होता हो ,इतने अल्प समय में इतना इतना बड़ा उद्योग खड़ा कर ले तो यह बहुत ही अनुकरणीय हो जाता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए के आदर्श के रूप में सामने आता है.व्यक्तिगत रूप से भी मैं उनको एक अच्छे योग गुरु के साथ एक अच्छा उद्यमी भी मानता हूँ.

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